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समिति गठन के आदेश को निरस्त करने की मांग

त्रिस्तरीय चुनाव के पूर्व जिस तरह ग्रामीण मुंडाओं द्वारा अपने अधिकार और सम्मान में कटौती की आशंका को लेकर...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 02:30 AM IST
त्रिस्तरीय चुनाव के पूर्व जिस तरह ग्रामीण मुंडाओं द्वारा अपने अधिकार और सम्मान में कटौती की आशंका को लेकर त्रिस्तरीय चुनाव का विरोध किया जा रहा था। आज कमोबेश वही स्थिति गांवों के मुखियाओं की हो गई है। अब मुखियाओं को भी इस बात का भय सताने लगा है कि राज्य सरकार सभी गांवों में आदिवासी विकास समिति व ग्राम विकास समिति का गठन कर उनके अधिकारों का हनन करना चाह रही है। ग्राम विकास समिति व आदिवासी विकास समिति के विरोध में प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित किसान भवन में नोवामुंडी प्रखंड मुखिया संघ की बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता दुधबिला पंचायत की मुखिया सह मुखिया संघ की प्रखंड अध्यक्ष रानी तिरिया ने की। बैठक में सरकार द्वारा गठित समितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी समरेश प्रसाद भंडारी को ज्ञापन सौंप कर समिति गठन के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई। बीडीओ को सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि सरकारी आदेश से सभी ग्राम पंचायतों में समितियों का गठन किया जा रहा है। उक्त समितियों के गठन से मुखियाओं के कार्य क्षेत्र व उनके अधिकारों पर हस्तक्षेप करने के सामान होगा। जब कि त्रिस्तरीय पंचायत राज अधिनियम के अंतर्गत मुखियाओं को जो शक्ति प्रदान की गई है। वो एकमात्र विकास कार्य करने व योजनाओं की देखरेख की भूमिका पर आधारित है। न कि किसी विधि व्यवस्था के उपर जैसे कि विधान सभा क्षेत्र के विधायक विधान सभा मे राज्य के हित में विधि व्यवस्था (कानून)बनाने पर आधारित है। जब कि मुखिया को ग्राम पंचायत स्तर पर सिर्फ विकास कार्यो को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिनिधित्व का दायित्व दिया गया है। ज्ञापन की प्रति प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी रविंद्र सिंहदेव को भी दी गई है। बैठक में प्रखंड अध्यक्ष रानी तिरिया, उपाध्यक्ष राज बारजो, मतियस सुरेन, राजा तिर्की, रेवती पूर्ति, यशमती तिरिया एवं कृष्णा लागुरी आदि मुखिया उपस्थित थे।

नोवामुंडी में बैठक करते विभिन्न पंचायतों के मुखिया।