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जवानों पर युवक को नक्सली बता गोली चलाने का आरोप, एनएच जाम

Palamu News - पहले पुलिस ने युवक को पकड़ा, फिर जंगल में ले जाकर गोली मारने की कोशिश की, लेकिन गोली मिसफायर हो गई। इसके बाद युवक...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 03:00 AM IST
जवानों पर युवक को नक्सली बता गोली चलाने का आरोप, एनएच जाम
पहले पुलिस ने युवक को पकड़ा, फिर जंगल में ले जाकर गोली मारने की कोशिश की, लेकिन गोली मिसफायर हो गई। इसके बाद युवक भागकर अपने गांव मनिका थाना क्षेत्र के सधवाडीह गांव पहुंचा व पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इतना सुनते ही गांव के लोग आक्रोशित हो गए व एनएच 39 पर नामुदाग गांव के पास पहुंचकर एनएच को तीन घंटे तक जाम कर दिया। घटना गुरुवार की है। बताया जाता है कि सधवाडीह का युवक सकेंद्र सिंह अपनी भगिनी की सहेली का मैट्रिक का रजिस्ट्रेशन कराने बरवाडीह हाईस्कूल गया था। इसी क्रम में बरवाडीह में सीआरपीएफ ने उसे पकड़ लिया और माओवादी बताते हुए मारपीट की। उसके बाद उसे मुर्गीडीह पिकेट में ले गए।

सकेंद्र ने बताया कि पुलिस उसे लगातार माओवादियों के बारे में पूछताछ कर रही थी। मुझे भी माओवादी ही कहा जा रहा था। कुछ देर बाद मुझे सीआरपीएफ जवान लेकर चियांकी (पलामू) स्थित सीआरपीएफ कैंप ले गए। वहां भी पूछताछ की गई तथा हमें लेकर वे लोग दुबियाखांड़ जंगल में ले गए। सीआरपीएफ द्वारा मुझे मारने की बात कहकर गोली भी चलाई गई, लेकिन गोली मिसफायर हो गई। मैं मौका देखकर वहां से पैदल ही जंगल के रास्ते भाग निकला। भागता-भागता पैदल ही गांव पहुंचा व पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

इसके बाद ग्रामीण सड़क पर उतर गए व एनएच को जाम कर पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, नक्सली बताकर ग्रामीणों को तंग-तबाह करना बंद करो के नारे लगाने लगे। चक्का जाम की सूचना पर मनिका पुलिस वहां पहुंची और ग्रामीणों से वार्ता की। ग्रामीण सीआरपीएफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े रहे। ग्रामीण जब पुलिस की बात मानने से इनकार कर गए तो इसकी सूचना लातेहार जिला पुलिस मुख्यालय को दी गई। सूचना के बाद एसपी प्रशांत आनंद के निर्देश पर एसडीपीओ अनुज उरांव जामस्थल पर पहुंचे तथा जामकर्ताओं को समझा-बुझाकर शांत कराया। एसडीपीओ ने दोषी जवानों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर जाम हटा। यह जाम सुबह 11 बजे से दो बजे तक रहा। ग्रामीणों का कहना था कि एक ओर पुलिस ग्रामीणों के बीच सामग्री वितरित कर संबंध सुधारने में लगी है और दूसरी ओर पुलिसवाले निर्दोष ग्रामीण की जान लेने पर उतारू है। आखिर यह कैसी सामुदायिक पुलिसिंग है?

मनिका में सड़क जाम करती ग्रामीण महिलाएं।

जाम कर रहे लोगों को समझाते पुलिस अधिकारी।

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