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पशुपालन अफसरों ने नौकरी से हटाने की धमकी दे फर्जी रसीद बनवाई थी

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के चारा घोटाला मामले आरसी 47 में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 02:00 PM IST

डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी के चारा घोटाला मामले आरसी 47 में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान सीबीआई ने मामले में अपने 454 वेंं गवाह का बयान दर्ज कराया। गवाह के रूप में लातेहार प्रखंड के तात्कालीन पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सतीश प्रसाद ने गवाही देते हुए कहा कि वर्ष 1992 से 1994-95 की अवधि में तत्कालीन पशुपालन विभाग के वरीय पदाधिकारी ने उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी और दबाव देकर उनसे कुल 90,000 क्विंटल पीली मकई की आपूर्ति से संबंधित प्राप्ति रसीद ले ली थी। 32 हजार मूंगफली की खली की आपूर्ति के संबंध में प्राप्ति रसीद बनवाई। इस दौरान पलामू जिले में पशुपालन पदाधिकारी के पद पर बीएन शर्मा, डॉ. कामेश्वर सहाय और डॉ. धनंजय पांडे के साथ-साथ चलंत पशुपालन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार सिन्हा कार्यरत थे। गवाह का क्रॉस एग्जामिनेशन भी किया। इस दौरान कोर्ट में मामले के आरोपी लालू प्रसाद यादव समेत अन्य को जेल से कोर्ट में पेश किया गया।

दुमका मामले में बहस हुई

दूसरी तरफ दुमका कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले आरसी 38 ए के तहत बहस हुई। सुनवाई कर रहे स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने वकीलों से कहा है कि आरोपियों के अल्फाबेटिकल नाम के अनुसार बहस जारी रखें।

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