बिना पारिश्रमिक बच्चों को पढ़ा रहे बेरोजगार अनिल

Palamu News - राजकीयकृत उच्च विद्यालय लालगढ़ में बच्चों को पिछले 10 वर्ष से निशुल्क शिक्षा दान करने वाले अनिल कुमार पाठक स्वयं...

Jan 20, 2020, 07:35 AM IST
Medininagar News - anil is teaching unemployed children without wages
राजकीयकृत उच्च विद्यालय लालगढ़ में बच्चों को पिछले 10 वर्ष से निशुल्क शिक्षा दान करने वाले अनिल कुमार पाठक स्वयं बेरोजगार हैं, लेकिन इसके बाद भी हुए 2010 से लेकर 2019 तक इस स्कूल के बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाते रहे। शिक्षक पिता के पुत्र होने के कारण शायद उनके मन में शिक्षा के प्रति लगाव और शिक्षा के महत्व को लेकर एक ऐसा भाव रहा था जस कारण वे गरीब व अभावग्रस्त बच्चों को शिक्षा का दान करने को ही अपना ध्येय बनाया। इसी स्कूल से पढ़ने के बाद विज्ञान से स्नातक की शिक्षा लेने के बावजूद कहीं किसी जॉब में नहीं जा पाने के बाद उन्होंने अपने शिक्षा का दान करने को ही एक बेहतर और सृजनशील उपक्रम के रूप में अपनाया।

अनिल कुमार।

स्कूल में एक टीचर हैं, उन्हें सारा काम देखना है : अनिल पाठक

अनिल कुमार पाठक बताते हैं कि 2010 में जब इस हाई स्कूल में केवल एकमात्र संस्कृत के टीचर हीरालाल ही स्कूल में रह गए थे। उन्हीं के जिम्मे स्कूल के प्रभार से लेकर से हर काम की जवाबदेही आ गई थी। ऐसे में एक दिन उनसे अनायास हुई मुलाकात में उन्होंने व्यथित भाव से यह बताया कि उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर वे बच्चों को किस तरह से स्कूल बुलाए और और उन्हें यह समझाएं कि बिना पढ़ाई के ही वे स्कूल आएं। इसी बातचीत के क्रम में मैंने उनसे स्कूल आकर बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जाहिर की। जिसका समर्थन स्कूल के अनुसेवक श्यामा प्रसाद ने भी कर दी। इसके बाद हमारा स्कूल आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके बाद हमने नियमित रूप से संभावित सभी विषयों को पढ़ाने का काम शुरू किया। यह क्रम न सिर्फ पढा़ई के के लिए ही नहीं, बल्कि हमने परीक्षा के आयोजन से लेकर अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कार्यालय से संबंधित कार्यों में भी अपना योगदान दिया। यह सिलसिला लगातार पिछले वर्ष तक चलता रहा।

कुछ परेशानियां हुईं, पर आत्मसंतोष मिला

ऐसा करके हमें बेशक बेहद आत्मसंतोष का बोध होता रहा है। निश्चय ही इस क्रम में उन्हें कुछ परेशानियां भी हुई, लेकिन उन्होंने स्कूल आना बंद नहीं किया। लेकिन वर्ष 2018 आते-आते जहां विद्यालय को प्लस टू का दर्जा प्राप्त हो गया, वहीं प्लस टू से लेकर मैट्रिक स्तर तक कई शिक्षकों की पदस्थापना भी विद्यालय में कर दी गई। वर्तमान में इस विद्यालय में 15 शिक्षक पदस्थापित हैं। लेकिन इसके बाद भी विद्यालय आते-जाते रहे हैं। बच्चों को पढ़ाने की जैसे आदत सी हो गई है। बच्चों के साथ लगाव ने हमें स्कूल से जोड़े रखा है। इस संबंध में अनुसेवक श्यामा प्रसाद का कहना है कि निश्चय ही अनिल पाठक का योगदान अतुल्य है। जिस निस्वार्थ भाव से उन्होंने न सिर्फ विद्यालय को बढ़-चढ़कर सहयोग किया है। बल्कि बढ़-चढ़कर हर विषय की पढ़ाई कराई है। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हीरालाल का कहना है कि अनिल कुमार पाठक यदि तब हमें संबल नहीं दिए होते तो शायद मेरे लिए स्कूल का संचालन और खासकर बच्चों को स्कूल से जोड़े रखना काफी मुश्किल होता।

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