तब युद्ध में भी धर्म की नीति चलती थी, आज धर्म में भी लड़ाई की जाती हैै : साध्वी ज्योति

Palamu News - तुलसी मानस मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम चरित मानस नवाह्न परायण पाठ में श्रीराम कथा के क्रम में शुक्रवार की रात...

Nov 10, 2019, 07:37 AM IST
तुलसी मानस मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम चरित मानस नवाह्न परायण पाठ में श्रीराम कथा के क्रम में शुक्रवार की रात प्रवचनकर्ताओं ने विभिन्न प्रसंगों पर चर्चां की। कथा प्रवचन के क्रम में साध्वी ज्योति ने कहा कि गिद्ध जटायु और रावण के बीच युद्ध की चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब रावण माता सीता का हरण कर ले जा रहा था, तो उनके विलाप काे सुनकर कई लोग व्यथित थे। इस घटना का सबको दुख था। परंतु त्रिलोक विजेता रावण के समक्ष किसी ने यह हिम्मत नही दिखाई की सामने आकर वह इसका विरोध कर सके। लेकिन जब सीता का रूदन वृद्ध जटायु के कानों तक पहुंचा तो जटायु खुद को राेक नहीं सका। कमजोर होने के बाद भी उसने रावण के सामने जाकर उसके इस कृत्य का विरोध किया।

एक महिला के अपमान के खिलाफ वीर जटायु रावण जैसे बलशाली से भी भीड़ जाने में कोई संकोच नहीं किया। अपनी चोंच से हमला कर कुछ देर के लिए तो रावण को भी उसने लाचार कर दिया। भले वह अधिक देर तक रावण के समक्ष टिक न सके और आखिरकार उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। मगर ऐसा कर उन्होंने जो आदर्श स्थापित किया, वह भी हमारी संस्कृति की विशिष्टता का ही परिचायक है। साध्वी ज्योति ने कहा कि थोड़ी ही देर के लिए सही, मगर जब गिद्ध जटायु ने रावण को मूर्छित किया, तब उस समय वे उसे मौत के घाट भी उतार सकते थे। मगर हमारी संस्कृति ऐसी रही है,जहां युद्ध में भी धर्म की नीति चलती थी। मगर आज धर्म में भी लड़ाई हो रही है। हमारा पड़ाेसी पाकिस्तान हर रोज यही करता है। वह धर्म को जाने बगैर ही धर्म के नाम पर लड़ाई लड़ रहा है। इस अवसर पर श्रीराम चरित मानस नवाह्न परायण पाठ महायज्ञ समिति के सचिव शिवनाथ अग्रवाल सहित अन्य पदधारी तथा शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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