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बारिश से फसलें बर्बाद, किसानों को सैकड़ों क्विंटल अनाज का नुकसान
पिछले दस दिनों से मौसम में आये बदलाव से जन-जीवन अस्त -व्यस्त हो गया है। लोगों के लिए रोजमर्रा का जीवन जीना जैसे मुश्किल हो गया है। इस बारिश ने ग्रामीण इलाकों की स्थिति और खराब कर दी है। जहां कीचड़ और जल जमाव ने लोगों की परेशान कर दिया है। उनकी परेशनी का एक कारण जहां किसानों की फसल की बर्बादी है, वहीं कच्चे घरों में उनका रह पाना उनकी परेशानी का एक अन्य कारण बना है। उनके मन में बारिश की अधिकता के कारण कच्चे व खपरैल घरों के गिर जाने का भय बना हुआ है।
इसी तरह पशुपालकों तथा किसानों के लिए अपने पशुओं को सुरक्षित रखना और उनके लिए लिए चारा की व्यवस्था कर पाना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों की बात करेें तो यह बारिश उनके लिए काफी घातक साबित हुआ है। किसान चंद्रिका पाठक का कहना है कि हर महीने में पानी होते रहने के कारण जहां अरहर में केवल फूल ही लगते रह गए वहीं पिछले दस दिनों की बारिश ने सब्जी के फसल को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है । इसके साथ ही मसूर, तीसी, राई, चना और खेसारी- बटूरा जैसी फसलें भी पानी से पूरी तरह सड़ गयी हैं। गाय पालने वाले प्रदीप चौधरी का कहना है कि लगातार बारिश के कारण गायों को पानी में ही छोड़ना पड़ रहा है।
सवा लाख क्विंटल फसल की क्षति का अनुमान
बारिश के कारण हुए फसलों के अनुमानित नुकसान की बात करें तो जिन रबी व तेलहनी फसलों के अधिक नुकसान अथवा बर्बाद होने की संभावना है उनमें चना, मसूर, तीसी और सरसोंं प्रमुख है । जिनका इस वर्ष आच्छादन और उसकी उपज की मात्रा के आधार पर यदि 50 प्रतिशत भी संभावित नुकसान अथवा क्षति आकलन की बात करें तो यह मात्रा करीब सवा लाख क्विंटल के बराबर है। जहां चना का 15648, मसूर का 6241, सरसों 16298 व तीसी 2437 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगी है। इनकी उपज की मात्रा चना 12 से 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, मसूर 10 से 12, सरसों 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा तीसी 5 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही है।
731 किसान हुए हैं ओला वृष्टि से प्रभावित
बारिश के कारण सड़ जाने व सुख जाने के कारण होने वाले नुकसान के अनुमान के अतिरिक्त ओलावृष्टि से भी फसलों को नुकसान पहुंचा है । जिसके लिए सैकड़ों किसानों ने जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी के पास अपना आवेदन जमा कराये हैं । विभिन्न अंचलों से प्राप्त कुल 731 आवेदनों को अभी तक स्वीकृत किया गया है । इस संबंध में जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी जयराम सिंह यादव ने बताया कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों द्वारा अब भी आवेदन दिया जा रहा है । इसके बाद भी अब तक 731 किसानों के आवेदन पर कार्रवाई करते हुए विभाग ने सरकार से इन किसानों को भुगतान के लिए 20,50,385रूपये की राशि की मांग की है ।
चैनपुर में बेमौसम बरसात से गरीब का घर गिरा
चैनपुर | चैनपुर प्रखंड क्षेत्र बोड़ी पंचायत के सागा दोहा टोला निवासी रमेश कोरबा का मकान तेज आंधी पानी में शनिवार की सुबह अचानक गिर गया। परिवार के लोग इस घटना में बाल बाल बच गए। रमेश कोरबा करीब 10 वर्ष पूर्व इंदिरा आवास बनाकर रह रहा था। इस घटना के बाद रमेश काेरबा अपने पूरे परिवार के साथ गांव के ही दूसरे के घर में शरण लिया हुआ है।
कोरोना का भय बढ़ा रहा है गीला मौसम
आवश्यकता से 10 गुणा अधिक बारिश
मार्च के महीने में आज सुबह तक 130 एमएम बारिश हो चुकी है जबकि बारिश अब भी जारी है। फसलों के लिहाज से इस महीने में मात्र 15-20 एमएम बारिश की ही जरूरत होती है। चियांकी अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डा अखलाक अहमद का कहना है कि मार्च के पहले सप्ताह में गेहूं की फसल के लिए 15-20 एमएम बारिश की जरूरत होती है। चूंकि बाकी के अन्य फसल पकने की स्थिति में होते हैं, इसलिए उनके लिए पानी की जरूरत नहीं के बराबर होती है। ऐसी स्थिति में इतनी अधिक बारिश में गेहूं को छोड़ भी दें तो बाकी के करीब सभी फसलों को नुकसान पहुंचा है।
गेहूं व जौ के फसल में जमा पानी।
इस मौसम ने ने लोगों के लिए जो एक और बड़ी चिंता की स्थिति उत्पन्न की है, वो पूरी दुनिया व देश भर में भय का माहौल कायम करने वाला करोना वायरस का भय है। ऐसा माना जाता है कि इस तरह के गिले अर्थात नम मौसम में वायरस संक्रमण की संभावनाएं ज्यादा होती हैं । यही नहीं ऐसे कीचड़ में खासकर ग्रामीण इलाके के लोगों के लिए साफ- सफाई पर ध्यान देना भी मुश्किल है । हालांकि इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से जनहित में यह सलाह जारी की गयी है कि राज्य में कोरोना का कोई प्रभाव नहीं है। इसलिए इसे लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है । इधर सीएस जेएफ केनेडी ने भी कल बैठक कर एहतियात के तौर पर सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आइसोलेशन सेंटर खोले जाने की बात कही है । लेकिन इसके बाद भी इस मौसम में ग्रामीण इलाके के लोगों के लिए खुद को केयर कर पाना मुश्किल हो रहा है।
किसानों के लिए अपने पशुओं को सुरक्षित रखना और चारा की व्यवस्था कर पाना हो रहा मुश्किल
बारिश से गली चना व मसूर की फसल