डोनाल्ड ट्रम्प से भयभीत है चर्च

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सेंट जॉन चर्च, वाशिंगटन में प|ी मेलानिया के साथ जाते डोनाल्ड ट्रम्प।

डेविड फ्रेंच

21 जून को लेखिका जीन कैरोल ने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रम्प ने 1990 में एक डिपार्टमेंटल स्टोर में उनके साथ दुष्कर्म किया था। वे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प पर दुराचरण का आरोप लगाने वाली 22 वीं महिला हैं। ये दावे पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर लगाए गए आरोपों से ज्यादा गंभीर हैं। यहां ट्रम्प और क्लिंटन की तुलना हो सकती है। क्लिंटन के अवैध संबंध उजागर होने के बाद चर्च-सदर्न बैपटिस्ट कन्वेंशन ने नेताओं की नैतिकता और चरित्र पर प्रस्ताव जारी किया था। इसमें कहा गया, ‘नेताओं के गलत आचरण को बर्दाश्त करना संस्कृति को चोट पहुंचाता है। समाज में अनियंत्रित अनैतिकता और अराजकता फैलती है’।

इस पृष्ठभूमि में सवाल उठता है, फिर इवेंजेलिकल चर्च (प्रोटेस्टेंट ईसाइयों की एक धारा)और उसके अनुयायी खामोश क्यों हैं? अधिकतर इवेंजेलिकल ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक हैं। पक्षपात और सत्ता से नजदीकी के कारण ऐसा हो सकता है। ट्रम्प के मामले में इवेंजेलिकल चर्च और अनुयायियों की चुप्पी का एक कारण भय भी है। इस समय चर्च को आक्रामक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रगतिशील तत्व धार्मिक संस्थाओं के खिलाफ कानूनी हमले कर रहे हैं। वामपंथ समर्थक गर्भपात और गर्भनिरोध में छूट की मांग उठाते हैं।

अंधकार से भरी दुनिया में इवेंजेलिकल चर्च से रोशनी का स्रोत बनने की अपेक्षा है। लेकिन, 2016 में क्रिश्चियन पुरुष और महिलाएं हिलेरी क्लिंटन के राष्ट्रपति बनने के विचार से ही भयभीत थे। क्रिश्चियन लेखक एरिक मेटाक्सस ने लिखा, यदि हिलेरी जीतती हैं तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। निश्चय ही यह धर्म नहीं है। अमेरिकी चर्च के पास बहुत ताकत है। वे इतने शक्तिशाली हैं कि किसी भी रिपब्लिकन प्रत्याशी के राजनीतिक अवसरों को खत्म कर सकते हैं। फिर भी चर्च चाहता है कि ट्रम्प उनकी सुरक्षा करें।

खबरें और भी हैं...