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कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों से फिर लैस होंगे वन अधिकारी, शिकारियों की गतिविधियों पर लगेगी लगाम
पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारी एक बार फिर कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों से लैस होंगे। उसके बाद पलामू टाइगर रिजर्व में अवस्थित जैप, सीआरपीएफ के सशस्त्र बलों के साथ वन गश्ती करेंगे। इससे पलामू टाइगर रिजर्व में शिकारियों के संभावित गतिविधियों पर रोक लग सकेगी ।
साल 2008 के बाद अधिकारियों ने नहीं कराया नवीकरण : पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों को पूर्व में कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्रदत थी । इसमें डीएफओ,एसीएफ और रेंजर को कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां मिली हुई थीं। इस कारण वे बेतला में मौजूद जैप के जवानों के साथ जंगलों में गश्ती करते थे। इससे उनको जंगलों में सक्रिय लकड़ी माफियाओं को भगाने में सफलता भी मिली थी। क्षेत्र निदेशक सह मुख्य वन संरक्षक वाईके दास बताते हैं कि वह साल 2005-2007 के दौरान पलामू टाइगर रिजर्व के उत्तरी प्रमंडल के उप निदेशक के पद पर कार्यरत थे। उस दौरान उन्होंने स्वयं कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों का कई मर्तबा बखूबी इस्तेमाल किया था । साल 2008 के बाद के अधिकारियों ने कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों का नवीकरण नहीं कराया , जिस कारण उनलोगों को कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियों से हाथ धोना पड़ा।
कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्राप्त करने का दिया निर्देश
क्षेत्र निदेशक सह मुख्य वन संरक्षक वाईके दास ने उत्तरी प्रमंडल के उप निदेशक कुमार आशीष को लातेहार उपायुक्त से मिलकर कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। वह बताते हैं कि उपायुक्त प्रस्ताव को कार्मिक विभाग को अग्रसारित करेंगे । उसके आधार पर कार्मिक विभाग वन अधिकारियों को कार्यपालक दंडाधिकारी की शक्तियां निर्गत करेगा,जो छह माह के लिए प्रभावी रहेगा । उसके बाद हर छह माह पर उसका नवीकरण कराना होगा ,जो उपायुक्त के माध्यम से होगा।
बेतला नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार।