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सेंसेक्स सहित दुनियाभर के सात शेयर बाजारों में लगा लोअर सर्किट

एक वर्ष पहले
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क्रूड दशक की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर

सिंगापुर| कीमतों को लेकर मचे घमासान और कोरोना वायरस से जुड़ी चिंताओं के बीच शुक्रवार को कच्चे तेल में चार प्रतिशत तक की तेजी रही। हालांकि, यह अभी भी एक दशक से अधिक की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की राह पर बढ़ रहा है। कच्चे तेल के कारोबार में शुक्रवार को भी उथल-पुथल जारी रही। शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट दोनों के वायदा भाव में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, एशियाई बाजारों में मध्याह्न कारोबार में दोनों की चाल में सुधार हुआ। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट चार प्रतिशत चढ़कर 33 डॉलर प्रति बैरल पर और ब्रेंट क्रूड 3.9 प्रतिशत उछलकर 34.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


24 घंटे में 40% गिरा क्रिप्टोकरंसी का मार्केट कैप


भास्कर न्यूज |नई दिल्ली

शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार चढ़ाव के बाद अंतत: बाजार में गिरावट का दौर थम गया। शुक्रवार को सेंसेक्स 1325.34 अंक (4.04%) और निफ्टी 365.05 अंक (3.81%) चढ़कर बंद हुए। वैश्विक परिस्थितियों और अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के चलते सुबह भारतीय बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। कुछ ही देर में सेंसेक्स और निफ्टी में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट के चलते बाजार में लोअर सर्किट लगानी पड़ी। लिहाजा ट्रेडिंग 45 के लिए रोक दी गई। पिछले 24 घंटे में दुनिया के 7 शेयर बाजारों में लोअर सर्किट लग चुकी है। अमेरिकी बाजार डाउ जोंस, नैस्डैक, एसएंडपी 500, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, रूस और भारत के सेंसेक्स में लोअर सर्किट लग चुका है। हालांकि सेंसेक्स में दुबारा कारोबार शुरु होने पर इसने एक दिन की सबसे बड़ी रिकवरी की। सेंसेक्स के सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए। बीएसई बैंकेक्स शुरुआती कारोबार मे ं11.19 फीसदी से ज्यादा गिरे लेकिन मजबूत रिकवरी करते हुए 4.68 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए।

इस सप्ताह के चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3473.14 अंक गिरा

इस सप्ताह के चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स तीन दिन गिरावट रही। इस दौरान सेंसेक्स में कुल 3473.14 अंक यानी 9.24 फीसदी की गिरावट रही। कोरोनावायरस के चलते वैश्विक बाजारों के साथ साथ घरेलू बाजारों में भी गिरावट का दौर रहा। इस समयावधि में निवेशकों का 15.05 लाख करोड़ रुपए साफ हो गया। शुक्रवार को सेबी और सरकार आश्वासन और अमेरिकी शेयर बाजार में सुधार की उम्मीदों के दम पर सेंसेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ।

कोरोनावायरस के कारण बाजार में छाई मंदी के चलते क्रिप्टोकरंसी के मार्केट कैप में बीते 24 घंटों में 40 फीसदी की कमी आई है। कॉइनमार्केटडॉट कॉम के अनुसार इसकी टोटल मार्केट कैप 6.90 लाख करोड़ रुपए (93.5 बिलियन डॉलर) रह गई। वहीं सिंगापुर समय के अनुसार गुरुवार सुबह 10 बजे से शुक्रवार सुबह 10 बजे तक के बीच बिटक्वाइन की वैल्यू में भी 48 फीसदी की कमी आई थी और 1 बिटक्वाइन की वैल्यू 4000 डॉलर हो गई थी। हालांकिं बाद में शुकवार शाम तक इसकी कीमत वापस 5500 डॉलर प्रति कॉइन पर पहुंच गई।

अमेरिकी सेना के हमले से मिली मजबूती

शेयर बाजारों में तेजी तब आई जब अमेरिका की सेना ने इराक में हवाई हमले शुरू किए। इससे कच्चे तेल को मजबूती मिली। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में अभी भी 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट बनी हुई है। यह 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में सप्ताह के दौरान करीब 25 प्रतिशत की गिरावट बनी हुई है।

अब तक के 4 लोअर सर्किट

21 दिसंबर 1990- सेंसेक्स में 16.19% की गिरावट दर्ज की गई थी। इस गिरावट के बाद शेयर बाजार 1034.96 के स्तर पर पहुंचा था।

28 अप्रैल 1992- तब सेंसेक्स में 12.77% की गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन शेयर बाजार 3896.90 के स्तर पर बंद हुआ था।

17 मई 2004 - शेयर बाजार में 11.14% की गिरावट दर्ज की गई। तब शेयर बाजार 4505.16 के स्तर पर जाकर बंद हुआ था।

24 अक्टूबर 2008 - सेंसेक्स में 10.96% की गिरावट आई थी। उस दिन शेयर बाजार 8701.07 के स्तर पर बंद हुआ था।

13 मार्च 2020 - सेंसेक्स 11% तक गिरा, इसके बाद लोअर सर्किट लग गई। इसके बाद बाजार को 45 मिनट तक बंद करना पड़ा।

2008 की मंदी के बाद पहली बार लगा लोअर सर्किट : शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में साल 2008 की वैश्विक मंदी के बाद पहली बार लोअर सर्किट लगा। शेयर बाजार में अचानक आए बड़े उतार-चढ़ाव को थामनेे के लिए सर्किट लगाया जाता है। ये दो तरह के होते हैं। अपर सर्किट और लोअर सर्किट। अपर सर्किट तब लगाया जाता है, जब बाजार एक तय सीमा से ज्यादा बढ़ जाता है। जब उसी सीमा से ज्यादा घटता है तो लोअर सर्किट का इस्तेमाल किया जाता है। सेबी ने सर्किट के लिए तीन ट्रिगर लिमिट 10%, 15% और 20% तय की हैं। यानी उस वक्त बाजार जितने पर है, उसका 10%, 15% और 20% घटने-बढ़ने पर सर्किट लगता है।
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