मंडल डैम को मिला क्लीयरेंस, काम से पहले करना होगा विस्थापितों का पुनर्वास

Palamu News - वन विभाग से मंडल डैम निर्माण को लेकर स्टेज टू क्लीयरेंस मिल गया है। इसके साथ मंडल डैम के अधूरे कार्य को पूरा करने का...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:36 AM IST
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वन विभाग से मंडल डैम निर्माण को लेकर स्टेज टू क्लीयरेंस मिल गया है। इसके साथ मंडल डैम के अधूरे कार्य को पूरा करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। जल्द ही भारत सरकार का उपक्रम “बेवकोस’ मंडल डैम के अधूरे कार्य को पूरा करेगा। क्लीयरेंस इस शर्त पर दिया गया है कि जल संसाधन विभाग काम शुरू करने से पहले विस्थापन एवं पुनर्वास की कार्रवाई पूरी करे। गौरतलब है कि मंडल डैम के डूब क्षेत्र में पलामू टाइगर रिजर्व के कोर एरिया वर्तमान में उत्तरी प्रमंडल व्याघ्र परियोजना अंतर्गत कुटकू रेंज का 1007.29 हेक्टेयर वन भूमि आता है। इस एरिया में 3,44,644 साल के पेड़ हैं।

हालांकि इसके बदले में वन विभाग पलामू, गढ़वा व लातेहार जिला के में दो हजार हेक्टेयर में पौधराेपण करेगा। इसके लिए जलसंसाधन विभाग वन विभाग को 461 करोड़ रुपए दे चुका है। जलसंसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुकेश कुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने केंद्र से विस्थापितों काे मुआवजा देने के लिए राशि की मांग की है। केंद्र द्वारा राशि उपलब्ध होते ही सभी 780 परिवारों को एकमुश्त 15 लाख मुआवजा दिया जाएगा।

पांच जनवरी 2019 को पीएम नरेंद्र मोदी ने डैम की रखी थी आधारशिला

मंडल डैम।

झारखंड की 19,604 हेक्टेयर भूमि होगी सिंचित

मंडल डैम के लिए 2855 वर्ग किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण होगा। इससे 15 गांव के 1600 परिवार विस्थापित होंगे। मंडल डैम की ऊंचाई 222.40 फीट है। इस परियोजना में 405 लाख एकड़ फीट पानी संचय होगा। मंडल डैम के बनने से कुल 1,11,521 हेक्टेयर भूमि सिंचिंत होगी। इसमें झारखंड की मात्र 19,604 हेक्टेयर एवं बिहार की 91,917 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।

नियमों में विरोधाभास के कारण फंसा था पेंच

मंडल डैम के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए वन विभाग से जलसंसाधन विभाग को स्टेज टू क्लीयरेंस मिला। इसमें कुल 24 शर्तों में से 5 और 9 (सी 1) के परस्पर विरोधाभास होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। इसमें इसमें शर्त नंबर 5 के अनुसार जल भंडारण करने के पहले विस्थापन एवं पुनर्वास की कार्रवाई पूरी करनी है। वहीं शर्त नंबर 9 (सी 1) के अनुसार काम शुरू करने के पहले विस्थापन एवं पुनर्वास की कार्रवाई पूरी करनी है। इसमें से वन विभाग ने 9 (सी 1) के अनुसार कार्य करने की अनुमति के साथ स्टेज टू क्लीयरेंस दिया है। राज्य सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी सुनील कुमार ने पीसीसीएफ सह बंजर भूमि विकास बोर्ड के कार्यकारी निदेशक को इस आशय का पत्र लिखा है। पत्र में जिक्र किया गया है कि मंडल डैम में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 के तहत 1007.29 हेक्टेयर वनभूमि को स्टेज 9 (सी 1) तथा 18 के पूर्ण अनुपालन के बाद ही डैम का फाटक बंद किया जाएगा। इसी शर्त के आधार पर स्टेज टू क्लीयरेंस प्रदान किया गया। गौरतलब है कि स्टेज 18 में वन भूमि के चारों तरफ कंक्रीट का पिलर बनाना है।

780 परिवार का होगा विस्थापन व पुनर्वास

पूर्व में मंडल डैम के डूब क्षेत्र में आने वाले कुल 634 परिवारों को मुआवजा दिया गया था लेकिन कार्य पूरा नहीं होने से उनका विस्थापन एवं पुनर्वास नहीं हो सका। पूर्व में 367.28 मीटर डैम की उंचाई निर्धारित की गयी थी। उस समय टाइगर प्रोजेक्ट का अस्तित्व नहीं था। समय पर कार्य पूरा नहीं होने से और बाद में टाइगर प्रोजेक्ट के गठन के उपरांत वन विभाग के आपत्ति के बाद रि-एस्टीमेट में डैम की उंचाई को घटाकर 341 मीटर किया गया। इससे अब 341 हेक्टेयर में ही पानी का भंडारण होगा। इस कारण वर्तमान में डूब क्षेत्र में रहने वाले 780 परिवार विस्थापित होंगे। जिनको एकमुश्त 15 लाख मुआवजा दिया जाएगा।

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