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सूखारोधी कुसुम की नई किस्म अगले साल से
भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान-हैदराबाद के वैज्ञानिक डॉ. पुष्पा एचडी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने शनिवार को क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी का दौरा किया। दौरे के क्रम में वैज्ञानिकों ने सूखारोधी कुसुम के उन्नतशील और संकर किस्माें के प्रारंभिक प्रयोग का निरीक्षण किया। अनुसंधान के शोधकर्ता वैज्ञानिक डॉ. एखलाक अहमद ने टीम को अनुसंधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो समूह में कुसुम के 23 किस्माें पर शोध चल रहा है। पहला समूह एवीएचटी 2में 10 प्रभेद पर शोध कार्य अंतिम चरण में है। इसमें संकर के साथ-साथ उन्नतशील प्रभेद भी शामिल है, को अगले साल किसानों के लिए रिलीज किया जाएगा। दूसरा समूह एवीटी 1 एस में 13 प्रभेद पर शोध कार्य चल रहा है। उसके एक साल और शोध होने के बाद उसको एवीएचटी 2में लाकर शोध किया जाएगा। उसमें सबकुछ मानक के अनुसार होने पर उसको किसानों के लिए रिलीज किया जाएगा। वैज्ञानिकों के दल ने पाया कि बारिश से खेत में पानी भरा हुआ है। बारिश के बाद पानी को खेत से निकालने व खेत के सूखने के बाद फंफूदनाशक का छिड़काव करने का निर्देश दिया गया।
कुसुम में 20-26 प्रतिशत तक तेल
वैज्ञानिक डॉ पुष्पा एचडी ने बताया कि कुसुम में 20-26 प्रतिशत तक तेल होता है। कोल्हू में डालकर तेल निकालने पर 20 प्रतिशत तेल निकलता है। सरसों, रिफाइन के वनिस्पत इसके कोल्हू से निकले तेल में 82 प्रतिशत पोली अनसिचुरेटेड फैटी एसिड होता है। इसके सेवन से रक्त का सही प्रवाह होता है। उन्होंने बताया कि इसके फूल की सूखी पंखुडी का चाय बनाकर पीने से बीपी नार्मल होता है। उन्हाेंने बताया कि संस्थान के अंतर्गत पूरे देश में 6 मुख्य सेंटर यथा अन्नागरी, शोलापुर, परबेनी (तीनों महाराष्ट्र), लंथूर-तेलगांना, इंदौर, रायपुर तथा पांच वोलेटंरी सेंटर लातूर, बुलादाना, अकोला (तीनों महाराष्ट्र),कवरधा(छतीसगढ़), चियांकी में कुसुम के उन्नत किस्माें का मूल्यांकन कार्य चल रहा है। इसमें जो प्रभेद यहां के लिए उपयुक्त पाया जाएगा, उसको प्रमोट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्षा आधारित खेती क्षेत्र होने के कारण इसकी खेती की भरपूर संभावना है। परती धान खेत की नमी का उपयोग से कुसुम की खेती की जा सकती है। कांटेदार फसल होने के कारण पशुओं से कोई खतरा नहीं है। इसके पहले क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, चियांकी के सह निदेशक डॉ नजरुस्लाम ने टीम के सदस्यों का स्वागत किया और केंद्र के द्वारा किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी।
कुसुम की फसल का निरीक्षण करती वैज्ञानिकों की टीम।