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आदिम जनजाति के तीन लोगों की मौत के बाद राजनीति तेज
सदर प्रखंड में पिछले शुक्रवार को अचानक आई बाढ़ की चपेट में आकर आदिम जनजाति परिवार के तीन लोगों की मौत पर राजनीति तेज हो गई है। सोमवार को जहां प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर भाजपा की एक टीम ने तरवाडीह पंचायत के नरेशगढ़ गांव के कुंडपानी गांव पहुंचकर पीड़ित परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढ़स बंधाया और घटना के चार दिन बीतने के बाद भी गांव में किसी प्रशासनिक पदाधिकारी के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। वहीं, दूसरी ओर मनिका के कांग्रेस विधायक के निर्देश पर कांग्रेस पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी गांव का दौरा किया और परिजनों को हर हाल में सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। गौरतलब हो कि पिछले शुक्रवार को एक पहाड़ी नदी में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आकर आदिम जनजाति परिवार के तीन सदस्यों दासो परहिया सहित प|ी बसंती देवी व उसकी पुत्री सरिता कुमारी की मौत हो गयी थी। शनिवार को ग्रामीणों ने काफी खोजबीन के बाद उनके शव बरामद किया था। इधर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, जनजाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार पाहन के निर्देशानुसार भाजपा की टीम गांव में पहुंची। इसका नेतृत्व अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रदेश मंत्री अवधेश सिंह चेरो कर रहे थे। टीम के अन्य सदस्यों में भाजपा नेता और मनिका से पार्टी प्रत्याशी रहे रघुपाल सिंह, पूर्व बीस सूत्री उपाध्यक्ष राजधनी यादव और राजेश्वर सिंह शामिल थे। टीम जांच करके भाजपा प्रदेश संगठन को अपनी रिपोर्ट सौपेंगी। अवधेश सिंह चेरो ने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासियों के नाम पर राज कर रही है, जबकि विलुप्तप्राय होती जनजाति की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान होने के बावजूद इनकी सुध लेनेवाला कोई नहीं है। यहां के विधायक रामचंद्र सिंह संवेदनहीन हैं। राजधनी यादव ने कहा कि गांव के लोगों के साथ जो हुआ, वह बहुत ही पीड़ादायक है।
इधर मनिका से कांग्रेस विधायक रामचंद्र सिंह के निर्देश पर गांव पहुंचे कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मृतकों के परिजन उपेंद्र परहिया को पांच हजार रुपये नगद सहयोग राशि सौंपी। साथ ही, परिजनों को सरकारी लाभ अवश्य दिलाने का भरोसा दिलाया। कांग्रेस लातेहार विधानसभा अध्यक्ष साजन कुमार ने कहा कि हेमंत सरकार और स्थानीय विधायक गरीब परिवार के साथ है और पार्टी परिजनों को हर तरह की सहायता उपलब्ध कराएगी। टीम ने बताया कि युवा कांग्रेस नेताओं ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर उनके पैतृक गांव भिजवाया था और अंचलाधिकारी व प्रखंड विकास पदाधिकारी से 10 हजार रुपये की सहायता राशि भी दिलवायी थी।