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शहीदों से प्रेरणा लेकर देश के पुनर्निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें ः वीसी

एक वर्ष पहले
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा शनिवार को जालियावाला बाग शहादत के 100 वर्ष पूरा होने पर नमन करो इस मिटटी को सन्देश यात्रा निकाला गया। यात्रा का शुभारंभ जेएस कालेज से किया गया। यहां से यात्रा जीएलए कालेज, महिला कालेज होते हुए एनपीयू विवि कार्यालय पहुंची। विवि कार्यालय में कुलपती डा एसएन सिंह व सभी कालेजों के प्राचार्य व अन्य पदाधिकारियों द्वारा मां सरस्वती व स्वामी विवेकानंद की तस्वीर एवं जालियावाला बाग की पवित्र मिटटी पर माल्यार्पण किया गया। मौके पर कुलपती डा एसएन सिंह ने कहां कि हमें उन शहीदों से प्रेरणा लेकर देश के पुनर्निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करनी चाहिए। जालियावाला बाग के स्मरण मात्र से देश के युवाओं में राष्ट्रवाद की चिंगारी फूटने लगती है। जनता शिवरात्रि महाविद्यालय राणा सिंह ने कहा कि हमारे इतिहास में हमारी जड़े निहित हैं। इसलिए जरूरी है कि हम स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं का स्मरण कर देशभक्ति की लौ जलाए रखें। एनपीयू के परीक्षा नियंत्रक विजय प्रसाद ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर स्थित जालियाँवाला में बैसाखी के दिन रॉलेट एक्ट जैसे काला कानून के विरोध में शांतिपूर्ण सभा कर रहे देश के स्वतंत्रता सेनानियों पर अंग्रेज सैन्य अधिकारी जनरल डायर ने बर्बरता पूर्वक गोलियां चलाकर नरसंहार किया था। इतिहासकारों ने इस घटना को दुनिया का सबसे ज्यादा बर्बरता पूर्ण घटना करार दिया।

जालियावाला बाग की घटना बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थी

प्रदेश मंत्री राजीव रंजन देव पांडेय ने कहा कि जालियावाला बाग की घटना भारत ही नही बल्कि विश्व इतिहास की एक बहुत निंदनीय घटना थी जिस प्रकार शांतिपूर्ण भीड़ पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई, उसने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थी। जालियावाला बाग की घटना ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में आग में घी का काम किया जिसका परिणाम स्वरूप अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीयों का आक्रोश बढा एवं भारत की आजादी का मार्ग प्रशस्त हुआ।

केंद्रीय मंत्री के हाथों सम्मानित चंदवा की शिक्षिका।
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