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भूलने की समस्या को गंभीरता से लें, यह मानसिक रोग ः डॉ. आशीष

एक वर्ष पहले
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प्रशिक्षण में जानकारी देते डॉ. आशीष कुमार।

मेदिनीनगर | जिला स्वास्थ्य समिति के तत्वावधान में कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को मेंटल का प्रशिक्षण दिया गया । सिविल सर्जन कार्यालय सभागार में शनिवार को आयोजित प्रशिक्षण में मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार ने कहा कि बहुत से ऐसे मानसिक रोग हैं जिनके बारे में लोगों को पता नहीं होता है। भूलने की बीमारी भी ऐसी ही आदत है। यह भी एक प्रकार का मानसिक रोग है। 60 वर्ष की उम्र के बाद पांच फीसदी, 70 वर्ष की उम्र के बाद 10 फीसदी और 80 वर्ष की उम्र के बाद 15 फीसदी लोगों को यह बीमारी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि कम नींद आना, ज्यादा सोना, उलझन, घबराहट, हीन भावना, जिंदगी के प्रति नकारात्मक सोच, एक ही विचार मन में बार-बार आना, एक ही कार्य को बार-बार करने की इच्छा होना, डर लगना, अनावश्यक शक होना, कानों में आवाज आना समेत कई प्रकार के ऐसे लक्षण हैं जो मानसिक बीमारियों से जुड़े हुए हैं। अगर चिकित्सक को दिखा कर सही परामर्श लिया जाए तो समय रहते बीमारी ठीक हो सकती है। उन्होंने कहा कि कहा कि अवसाद और तनाव से आत्महत्या की प्रवृत्ति बनती है। देश में हर साल करीब आठ लाख लोग आत्महत्या कर लेते हैं। जबकि आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक होती है।

बड़ी संख्या में लोगों का आत्महत्या करना या आत्महत्या का प्रयास करना स्वस्थ समाज में अच्छा संकेत नहीं है। कोई भी व्यक्ति आत्महत्या के लिए कदम तुरंत नहीं उठाता। उसके मन में विचार काफी दिनों से चलता है। यदि आसपास के लोग उसके व्यवहार को जांचकर इसके बारे में जान पाए तो व्यक्ति आत्महत्या से रोका जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरुक किया जाए। उन्होंने बताया कि गंभीर मानसिक रोग की स्थिति में व्यवहारिक और चिकित्सक की सलाह से इसको दूर किया जा सकता है। आत्महत्या करने के मुख्य कारणों में सदमा लगना, पारिवारिक समस्या, डिप्रेशन या अवसाद, रिश्तों में तनाव होने से मन-मुटाव होना, मानसिक या शारीरिक रोग होने पर, कैरियर में फेल होना आदि कारणों से समाधान पर विस्तार से बताया गया। आत्महत्या के रोकथाम के उपाय की चर्चा करते हुए सलाह दिया कि नकारात्मक बातों को न सुनें। बार बार रोने की आदत बुरा है। आत्महत्या की विचार वाले व्यक्ति को अकेला न छोड़ें। डिप्रेशन दूर करने के लिए उसे गीत संगीत से जोड़े। उसकी समस्याओं को हल करने में मदद करें।
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