जन्मभूमि के प्रति निष्ठा व प्रेम से बढ़कर कोई और दूसरा कर्तव्य नहीं : ज्योति

Palamu News - श्रीराम चरित मानस नवाह्न परायण महायज्ञ में चल रहे संगीतमय श्री सीताराम कथा प्रवचन के क्रम में साध्वी ज्योति ने...

Nov 12, 2019, 07:41 AM IST
Medininagar News - there is no other duty than loyalty and love towards the birthplace jyoti
श्रीराम चरित मानस नवाह्न परायण महायज्ञ में चल रहे संगीतमय श्री सीताराम कथा प्रवचन के क्रम में साध्वी ज्योति ने कहा कि भगवान राम जब 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने सबसे पहले अपनी जन्म भूमि को नमन किया। इसके बाद उन्होंने अयोध्या वासियों से मिलकर अपनी खुशी का इजहार किया। इस संदर्भ को वर्तमान से संदर्भित करते हुए उन्होंने कहा कि जन्मभूमि के प्रति निष्ठा और उसके प्रति प्रेम से बढ़कर व्यक्ति के लिए कोई और दूसरा कर्तव्य नहीं। भारत की मिट्टी से बढ़कर भारत वासियों के लिए कोई चंदन नहीं और वंदेमातरम से बेहतर कोई और वंदन नहीं। उन्होंने कहा कि जिसे अपने देश से प्रेम नहीं वह सचमुच उस देश में रहने का हकदार भी नहीं। जिसे भारत माता से, भारत की भूमि से प्यार नहीं उसे देश में रहने का कोई अधिकार नहीं। उन्होंने कहा जिस देश में व्यक्ति पैदा होता है, उसके लिए वही उसका वतन और उसके लिए उसका बलिदान ही उसका जन्नत है।

उन्होंने देशप्रेम और राजधर्म को एक साथ समन्वित करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की अनुपस्थिति में भरत जी ने राजा होने के बावजूद एक वनवासी के रूप के रूप में शासन किया। उनके लिए भगवान राम की चरण पादुका ही उनका मार्गदर्शक बना रहा। भरत जी ने जिस नि:स्वार्थ व निश्चल भाव से प्रभु श्रीराम के प्रति अपनी भक्ति व निष्ठा दिखायी और राजधर्म का पालन किया, वह वास्तव में अपने अराध्य के साथ देश की सेवा और देश प्रेम है। उन्होंने कहा कि वास्तव में प्रभु श्रीराम का चरित्र एक ऐसा विहंगम चरित्र है जहां व्यक्ति को जीवन का हर आदर्श रूप देखने को मिलता है।

प्रवचनकर्ता साध्वी ज्योति।

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