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गोपीचंद ने साइना, सिंधु और श्रीकांत के लिए बनाया स्पेशल प्लान, बोले- इस साल इंजर्ड हुए बिना ज्यादा टूर्नामेंट जीतेंगे मेरे खिलाड़ी

बैडमिंटन के नंबर-1 कोच पी. गोपीचंद ने इस साल अपने खिलाड़ियों को नंबर-1 बनाने के लिए नया प्लान बनाया है। उन्होंने कहा कि...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 03:15 AM IST
बैडमिंटन के नंबर-1 कोच पी. गोपीचंद ने इस साल अपने खिलाड़ियों को नंबर-1 बनाने के लिए नया प्लान बनाया है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल शेड्यूल बेहद टफ है। खिलाड़ी को लगातार अच्छा खेलने के लिए हमेशा फिट रहना जरूरी है। बार-बार इंजर्ड होने वाला खिलाड़ी नंबर-1 नहीं बन सकता। इसलिए हम इस साल खिलाड़ी को इंजरी से बचाए रखने के लिए एक टूर्नामेंट रिटेन सिस्टम पर काम कर रहे हैं। इससे खिलाड़ी चोटिल हुए बिना ज्यादा टूर्नामेंट जीत सकेंगे। इसका सीधा फायदा रैंकिंग में होगा। फिलहाल पीवी सिंधुु और श्रीकांत वर्ल्ड नंबर-3 खिलाड़ी हैं। साइना नेहवाल 12वें स्थान पर काबिज हैं। गोपी ने कहा, ‘हम दबाव से निपटने के नए तरीकों पर काम कर रहे हैं। अब आप सिंधु या अन्य खिलाड़ियों को बड़े फाइनल में हारते हुए कम देखेंगे। बल्कि कोई भी खिलाड़ी अगर फाइनल में पहुंचा, तो उसके जीतने की संभावना फिटनेस की वजह से विरोधी खिलाड़ी से 10% हमेशा ज्यादा रहेगी। यह 10 फीसदी ही वर्ल्ड के हर बड़े खिलाड़ी पर भारी होंगे।’ गोपीचंद ने बताया कि सिंधु और साइना फाइनल में न हारें, इसके लिए वह हार्डवर्क कर रही हैं। खासकर वह वर्ल्ड नंबर वन ताइवान की ताई जू यिंग को हराने की रणनीति तैयार कर रही है। जू यिंग के खिलाफ साइना और सिंधु दोनों का रिकॉर्ड बेहद खराब है। ताई जू यिंग ने हाल ही में इंडोनेशिया मास्टर्स के फाइनल में साइना को हराया था।

इस साल होंगे बैडमिंटन के 27 बड़े टूर्नामेंट, गोपीचंद ने खिलाड़ियों की फिटनेस के लिए बनाया नया सिस्टम

बड़े टूर्नामेंट में ही उतरेंगे प्रमुख खिलाड़ी : गोपीचंद

गोपीचंद ने बताया कि इस साल काॅमनवेल्थ, एशियन गेम्स सहित 27 बड़े इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट होंगे। वर्ल्ड बैडमिंटन एसोसिएशन ने साल में कम से कम 12 टूर्नामेंट खेलने जरूरी कर दिए हैं। इससे शेड्यूल टफ हो गया है। हमने इसका दबाव कम करने के लिए टूर्नामेंट रिटेन सिस्टम तैयार किया है। जो महत्वपूूर्ण टूर्नामेंट होंगे, उनमें बड़े रैंकिंग खिलाड़ी खेलेंगे। उनका फोकस केवल टूर्नामेंट जीतना होगा। टूर्नामेंट से पहले उसकी फिटनेस, कमियाें पर काम होगा। ताकि वह टूर्नामेंट जीतकर रैंकिंग में नंबर वन बने। दूसरे टूर्नामेंट में दूसरे स्तर के खिलाड़ियों को मौका दिया जाएगा। इससे ओलिंपिक से पहले भारत के पास कई खिलाड़ी होंगे।