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समझौते के तहत कार्य नहीं होने पर प्लांट शिलान्यास का होगा बहिष्कार

पीवीयूएनएल प्रबंधन के रवैये पर विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने भारी असंतोष जताते हुए नये पावर प्लांट...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:05 AM IST
पीवीयूएनएल प्रबंधन के रवैये पर विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा ने भारी असंतोष जताते हुए नये पावर प्लांट शिलान्यास कार्यक्रम का बहिष्कार आैर निकाय चुनाव के बाद राजभवन मार्च का निर्णय लिया है। मोर्चा ने प्रबंधन के लोगों पर आरोप मढ़ते हुए कहा है कि पीवीयूएनएल प्रबंधन ने विस्थापितों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। समझौता कर ग्रिड निर्माण कार्य चालू कराया। इसके अलावे कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी लेकिन 26 मार्च 2018 को हुए दो पक्षीय समझौते के अनुरूप अबतक कोई पहल नहीं की गई। प्रबंधन की ओर से कोई लिखित पत्र नहीं दिया गया। इन परिस्थितियों में पीवीयूएनएल प्रबंधन की मानसिकता पर कई सवाल खड़े हो गए है। ऐसा लग रहा है कि विस्थापितों, रैयतों को धोखा दिया जा रहा है। कई प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखते हुए पुन: आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ने पर अपनी हुंकार भरी। अध्यक्षता आदित्य नारायण प्रसाद और संचालन भुवनेश्वर महतो ने की।

आंदालेन की चेतावनी : बैठक में विस्थापित प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि अब पीवीयूएनएल प्रबंधन के साथ कोई वार्ता करना संभव नहीं होगा। आंदोलन के बल पर हक और अधिकार की बात होगी। क्योंकि इससे पूर्व कई बार समझौते किए गए। वार्ता हुई। लेकिन प्रबंधन का रवैया रैयत विस्थापितों के प्रति संतोषजनक नहीं रहा। बैठक में यह भी कहा गया कि पीवीयूएनएल के 4000 मेगावाट वाली नये पावर प्लांट के शिलान्यास कार्यक्रम जो अप्रैल माह में हीं होना सुनिश्चित हुआ है। उसका पुरजोर तरीके से बहिष्कार किया जाएगा। दीवार लेखन कर प्रबंधन के रवैये को उजागर किया जाएगा।

प्रत्येक गांव में जागरूकता अभियान चलेगा : बैठक में रणनीति बनाई गई कि आंदोलन को आगे बढाने के लिए प्रत्येक विस्थापित गांव में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक रविवार को हेसला पंचायत भवन में विस्थापित रणनीति की समीक्षा की जाएगी। रणनीति के तहत हर गांव के लिए प्रतिनिधियों का टीम जागरूकता अभियान में शामिल रहेगा।

बैठक में 25 गांव के प्रतिनिधि शामिल थे : बैठक में 25 विस्थापित गांव के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। जिनमें विजय साहू, किशोर महतो, राजाराम प्रसाद, अब्दुल क्यूम अंसारी, दुर्गाचरण प्रसाद, मो. अलीम, कौलेश्वर महतो, माधव प्रसाद, प्रदीप महतो, वीरमोहन मुंडा, कमालुद्दीन अंसारी, वीरेंद्र झा, एम रहमान, मो. मुमताज, कलाम अंसारी, ननकू मुंडा, नेपाल प्रजापति, सरोज गुप्ता, नागेंद्र सिंह, विजय मुंडा, मंटू कुमार, जगदेव प्रजापति, अनिल मुंडा, लालू महतो, अमोद प्रसाद, कमल प्रजापति, नरेश प्रजापति, लालू पाहन, कृष्णा प्रजापति, विकास मुंडा, जीतू प्रजापति, दामोदर प्रसाद, ओमनाथ प्रसाद, सुनील मुंडा, जागेश्वर पाहन, नरेश पाहन, बालदेव मुंडा, सहदेव मुंडा आदि उपस्थित थे।

बैठक में शामिल 25 विस्थापित गांव के प्रतिनिधि।