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विस्थापितों के साथ हुए समझौते लागू करे पीवीयूएनएल प्रबंधन

पतरातू के हेसला पंचायत सचिवालय भवन में रविवार को विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 03:20 AM IST

विस्थापितों के साथ हुए समझौते लागू करे पीवीयूएनएल प्रबंधन
पतरातू के हेसला पंचायत सचिवालय भवन में रविवार को विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा की समीक्षा बैठक हुई। जिसमें पीटीपीएस के विस्थापितों और प्रभावितों के हक और अधिकार को लेकर किए जा रहे आंदोलन की समीक्षा की गई। इस दौरान मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य नारायण प्रसाद ने कहा कि 26 मार्च को पीवीयूएनएल प्रबंधन के साथ वार्ता के बाद जो समझौते हुए थे, उसे लिखित रूप में दिया जाए। यदि प्रबंधन की आेर से एेसा नहीं किया जाता है तो हम विस्थापित यहां किसी भी प्रकार का कार्य नहीं होने देंगे।

समीक्षा बैठक के दौरान राजभवन मार्च से लेकर पांच मई को बासल थाना में पीवीयूएनएल के साथ हुई बैठक पर भी समीक्षा की गई। जिसमें पीवीयूएनएल द्वारा विस्थापितों को रोजगार से जोड़ने की बात कही जा रही है। प्रतिनिधियों ने कहा कि 25 गांव के विस्थापित परिवार के लोग अपने गांव के मुखिया को विस्थापित बेरोजगारों की सूची देंगे । फिर मुखिया इन सूचियों को मोर्चा अध्यक्ष के पास जमा करेंगे। अध्यक्षता आदित्य नारायण और संचालन कुमेल उरांव ने की। मौके पर भुवनेश्वर महतो, दुर्गाचरण प्रसाद, प्रदीप महतो, विजय साव, किशोर महतो, लालू महतो, क्यूम अंसारी, माधो महतो, विजय मुंडा, मो. सज्जाद, मो. मुमताज, वीरेंद्र झा, कपिल मुंडा, विजय मुंडा, कृष्णा मुंडा, ननकू मुंडा, नेपाल प्रजापति, संतोष तुरी, जागेश्वर पाहन, शंकर मुंडा, दीपक मुंडा, राजेंद्र पाहन, अमोध प्रसाद, त्रिलोकी गिरी, धर्मेंद्र मुंडा, सुनील मुंडा आदि मौजूद थे।

समीक्षा बैठक में मौजूद विस्थापित प्रतिनिधि।

पीटीपीएस कर्मचारियों के बकाया ओवरटाइम का भुगतान हो : बैकुंठ

पतरातू | झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिक सप्लाई वर्कर्स यूनियन के केंद्रीय महामंत्री बैकुंठ नंदन सिंह ने झारखंड ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक को ज्ञापन देकर पीटीपीएस कर्मचारियों के लंबित समस्याओं के समाधान की मांग की है। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने कहा है कि पीटीपीएस के कर्मचारियों ने पीटीपीएस से विद्युत उत्पादन बढाने और संस्था की साख बचाए रखने के लिए कड़ी मेहनत की। कर्मचारियों ने एक जनवरी 1997 से 31 मार्च 2001 तक ओवर टाइम किया। जिसके बकाये का भुगतान आज तक लंबित है। इस संबंध में शीर्ष प्रबंधन से कई बार समझौते हुए, वार्ता हुई। लेकिन स्थिति यथावत बनी हुई है। ज्ञापन देने वालों में सत्यनारायण साह, प्रभात कुमार आदि शामिल थे।

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