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इस गांव से आज तक कोई केस नहीं गया थाने

पतरातू प्रखंड के विभिन्न थानों में जहां समस्याओं व विवादों की लंबी कतार है। वहीं अपवाद स्वरूप बासल थाने का एक ऐसा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 09, 2018, 03:25 AM IST

इस गांव से आज तक कोई केस नहीं गया थाने
पतरातू प्रखंड के विभिन्न थानों में जहां समस्याओं व विवादों की लंबी कतार है। वहीं अपवाद स्वरूप बासल थाने का एक ऐसा भी गांव है जहां से आज तक एक भी मामला थाने व कोर्ट नहीं पहुंचा। गांव का नाम है पिठौरबेड़ा, जो आपसी एकता, भाईचारगी के लिए खासतौर पर चर्चित है। हरिजन,आदिवासी, मुंडा, गंझू जाति के यहां कुल 46 घर हैं, जिनका मुख्य पेशा खेती व मजदूरी करना है।

इस गांव की खासियत यह है कि यहां किसी भी तरह की समस्या हो, फैसला गांव के पंचों की सहमति से कटहल पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर आपसी सहमति से होता है। गांव के वृद्ध चंद्रदेव मुंडा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि कटहल के पेड़ पर पितरों का वास होता है और उन्हें साक्षी मानकर यहां हर फैसला लिया जाता है।

इस चबूतरे पर पारिवारिक, हिस्सेदारी, सामाजिक विवादों का फैसला होता है, जो यहां के लोगों के लिए अंतिम निर्णय होता है। इसके अलावा वन्य जीवों से बचाव, गांव के लिए रास्ता, सिंचाई, आदि सार्वजनिक समस्या का निदान भी यहां मिल बैठकर किया जाता है।

पतरातू प्रखंड के बासल थाना अंतर्गत पिठौरबेड़ा गांव मंे कटहल पेड़ के नीचे होता है सभी विवादों का निपटारा

कचहरी में जो मामला दस साल में निपटता है, यहां दस दिन में होता है समाधान

मिलजुल कर हर विवाद निपटाते हैं पिठौरबेड़ा गांव के लोग।

गांव का मामला बाहर जाए, तो होगी बदनामी : गांव के संजय मुंडा, बंधन मुंडा बताते हैं कि हमारा पूरा गांव एक परिवार है। गांव के किसी भी मामले को कोर्ट-कचहरी या गांव से बाहर ले जाने में गांव की बदनामी होती है। कचहरी में जो फैसला दस साल में भी नहीं हो पाता, आपसी सहमति से दस दिन में हो जाता है। मुखिया कहते हैं कि यहां के लोगों की सूझबूझ और यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए अनुकरणीय है।

गांव की अदालत में ही तय हुआ, सभी बच्चों को पढ़ाना है : ग्रामीण रामा मुंडा ने बताया कि महज दस साल पहले गांव में एक भी व्यक्ति दसवीं पास नहीं था। गांव के न्यायालय में यह तय किया गया कि अगली पीढ़ी को हर हाल में शिक्षित बनाना है, इसके लिए भले ही भूखे क्यों नहीं रहना पड़े। आज गांव के बच्चे नियमित तौर पर स्कूल-कालेज जाते दिखाई दे रहे हैं।

पिठौरबेड़ा से कोई मामला नहीं आया : थाना प्रभारी

इस संदर्भ में बासल थाने के प्रभारी विमल तिर्की ने बताया कि बासल थाने में उपलब्ध रिकार्ड के अनुसार पिठौरबेड़ा गांव से आज तक एक भी मामला थाने तक नहीं पहुंचा है। यह समाज के लिए अनुकरणीय है।

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