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विस्थापितों की पीढ़ियां गुजर गईं पर समस्याएं जस की तस : आदित्य

सरकार और पीवीयूएनएल प्रबंधन विस्थापितों के अस्तित्व को नकार रही है। उन्हें चुनौती दे रही है, लेकिन पीटीपीएस से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 23, 2018, 03:25 AM IST

सरकार और पीवीयूएनएल प्रबंधन विस्थापितों के अस्तित्व को नकार रही है। उन्हें चुनौती दे रही है, लेकिन पीटीपीएस से प्रभावित 25 गांव के विस्थापित परिवारों ने हार नहीं मानी है। अब यह लड़ाई और तेज होगी क्योंकि पीढ़ियां गुजर गईं लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। इन बातों की समीक्षा रविवार को विस्थापित प्रभावित संघर्ष मोर्चा की सांकुल में बैठक के दौरान हुई।

बैठक में मोर्चा के अध्यक्ष आदित्य नारायण ने कहा कि पीटीपीएस के स्थापना काल से विस्थापित परिवार नौकरी पुनर्वास और मुआवजा की मांग करते रहे हैं। 2002 में इस समस्या के समाधान के लिए तत्कालीन बिजली सचिव की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनी। उम्मीद थी कि समाधान हो जाएगा। सात फरवरी 2016 को भी रामगढ़ उपायुक्त ने लिखित आश्वासन दिया था लेकिन हर बार स्थिति यथावत बनी रही। अब आंदोलन ही रास्ता बचा है। इसके समाधान और अस्तित्व कर रक्षा के लिए दो मई को राजभवन मार्च होगा। साथ हीं राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई जाएगी। एक मई को मशाल जुलूस का निर्णय लिया गया। अध्यक्षता मुखिया शिवधन गंझू और संचालन सरोज प्रसाद ने किया। मौके पर भुवनेश्वर महतो, किशोर महतो, दुर्गाचरण प्रसाद, प्रदीप महतो, माधो प्रसाद, ननकू मुंडा, फन्नू सिंह, भगवान सिंह, सुजीत सिंह, बबलू राम, जागेश्वर मुंडा, शंकर मुंडा, सुनील मुंडा, मनोज मुंडा, शंकर उरांव आदि शामिल थे।

नौकरी और मुआवजे की मांग पर प्रबंधन विरोधी नारेबाजी करते विस्थापित और प्रभावित।

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