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जिले में पदस्थापित दस डॉक्टरों के वेतन पर हो रहे लाखों खर्च

रामगढ़ जिले में लगभग एक वर्ष पूर्व सरकार द्वारा आयुष विभाग की स्थापना की गई है। डॉ. मनाेरमा कुमारी की आयुष चिकित्सा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 08, 2018, 03:35 AM IST

जिले में पदस्थापित दस डॉक्टरों के वेतन पर हो रहे लाखों खर्च
रामगढ़ जिले में लगभग एक वर्ष पूर्व सरकार द्वारा आयुष विभाग की स्थापना की गई है। डॉ. मनाेरमा कुमारी की आयुष चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर पदस्थापना होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा पुराने सिविल सर्जन कार्यालय में आयुष अस्पताल खोलने के लिए जगह भी मुहैया कराई गई थी। वहीं विभाग द्वारा रामगढ़ जिले के रामगढ़ प्रखंड में तीन, गोला में एक, मांडू में एक और पतरातू सीएचसी में तीन आयुष चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है और इनके वेतन पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद जिले के लोगों को आयुर्वेद, यूनानी, होमियोपैथिक और प्राकृतिक विधि से इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है।

आयुष डाॅक्टरों की ड्यूटी स्कूल हेल्थ प्रोग्राम और ओपीडी में

स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारियों ने बताया कि सरकार ने सभी आयुष डॉक्टरों को राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत (स्कूल हेल्थ प्रोग्राम) ड्यूटी पर लगाया है। जिसके कारण आयुष डॉक्टरों से स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य की जांच का काम लिया जा रहा है। वहीं पतरातू सीएचसी में पदस्थापित आयुष डॉक्टर मनोज कुमार गुप्ता को ओपीडी में भी लगाया गया है। जहां आयुष डॉक्टर आयुर्वेद की जगह मरीजों के पर्चे पर अंग्रेजी दवा लिखते हैं।

आयुष डॉक्टर बच्चों की जांच कर रहे : सिविज सर्जन

जिले के सिविल सर्जन डॉ. मार्शल आइंद का कहना है कि सरकार ने आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत की है। अायुष डॉक्टरों का काम स्कूल में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करना है। आयुष डॉक्टरों द्वारा आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथिक के जगह ओपीडी में मरीजों के पर्ची पर अंग्रेजी दवा लिखे जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में डॉक्टर के अभाव में उन्हें ओपीडी में लगाया जा सकता है। वहीं पतरातू सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. स्वराज ने कहा कि आयुष चिकित्सक का भी ओपीडी चलता है। जिसके लिए अस्पताल में आयुर्वेद दवा की व्यवस्था है।

आयुष चिकित्सा पदाधिकारी का कार्यालय और अस्पताल।

डॉक्टरों को लगाया बच्चों की जांच में, लोगों को नहीं मिल रही आयुर्वेदिक-होमियोपैथिक इलाज की सुविधा

जिले में पदस्थापित आयुष डॉक्टरों की सूची

रामगढ़ प्रखंड: डॉ. पिंकी रानी पाठक, डॉ. राधिका सिंह और डॉ. चंदन ।

चितरपुर उपस्वास्थ्य केंद्र : डॉ. लक्ष्मी कच्छप।

पतरातू सीएचसी : डॉ. पल्लवी झा, डॉ. मनोज गुप्ता और डॉ. विशेश्वर पासवान।

मांडू सीएचसी : डॉ. कविता।

गोला सीएचसी : डॉ. प्रीति सुमन।

अभी बिजी हूं, बात नहीं कर सकती : डॉ. मनोरमा कुमारी

जिले में आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का इलाज आरंभ नहीं होने से संबंधित जानकारी के लिए जब डॉ. मनोरमा से उनके कार्यालय में संपर्क किया गया, तो वे नदारद मिलीं। उनके मोबाइल नंबर 9835500721 पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि अभी बिजी हूं, बात नहीं कर सकती। वहीं कार्यालय के कर्मी कैलाश कुमार अंबष्ठ ने बताया कि अबतक सरकार की ओर से आयुष विभाग को फंड नहीं मिला है। मैनपावर, संसाधन, दवा और डॉक्टरों के अभाव में आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथिक विधि से यहां मरीजों के इलाज में अड़चन आने की वजह से अोपीडी चालू नहीं हो पाया है। इस संबंध में निदेशक को विभागीय पत्र लिखा गया है।

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