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बेटा-बेटी का मुंडन करा दो मई को ही जम्मू लौटे थे शहीद सीताराम

सिटी रिपोर्टर | गिरिडीह/पीरटांड़ अप्रैल में बेटा-बेटी के मुंडन कार्यक्रम में शरीक होने के बाद ही 2 मई को छुट‌्टी के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 19, 2018, 03:40 AM IST

बेटा-बेटी का मुंडन करा दो मई को ही जम्मू लौटे थे शहीद सीताराम
सिटी रिपोर्टर | गिरिडीह/पीरटांड़

अप्रैल में बेटा-बेटी के मुंडन कार्यक्रम में शरीक होने के बाद ही 2 मई को छुट‌्टी के बाद श्रीनगर ड्यूटी ज्वॉइन किया था। सीताराम छोटा भाई थे। जबकि उनके घर में माता-पिता, भाई-भाभी सहित भरा पूरा परिवार है। शहीद सीताराम की प|ी ने कहा जुलाई में छुट्‌टी लेकर वे घर आने वाले थे। कहा मेरा सबकुछ छीन गया, जिसके लिए सिर्फ और सिर्फ मोदी सरकार जिम्मेवार है। अब उनके और दोनों मासूम बच्चों की जिंदगी का क्या होगा। इन बच्चों ने मोदी सरकार का क्या नुकसान किया था। पूरी दुनिया अंधेरा दिख रहा है, कि अब पहाड़ जैसी जिंदगी कैसे कटेगी। वर्ष 2014 में देवघर जिले के सारठ थाना अंतर्गत फूलचुआं की रेशमा कुमारी से उनकी शादी हुई। बताया जाता है कि गुरुवार की देर रात मुठभेड़ के दौरान जवान सीताराम उपाध्याय ने 20 आतंकवादियों को ढेर कर दिया था। इसकी सूचना इनके परिजनों को जम्मू कश्मीर से मिली। जिस पर परिजनों ने फक्र महसूस करते हुए कहा शहीद बहादुर बेटे पर उन लोगों को गर्व है। शहीद हुए जवान सीताराम उपाध्याय का पार्थिव शरीर शनिवार को करीब 4 बजे पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। बताया गया कि कश्मीर से शहीद जवान सीताराम उपाध्याय का पार्थिव शरीर दिल्ली पहुंचेगी।

उसके पश्चात शनिवार को रांची में इनका राजकीय सम्मान किया जाएगा। उसके बाद सड़क मार्ग से मधुबन पहुंचेगा, वहीं से अपने पैतृक गांव पालगंज पहुंच कर कुलमती नदी में इनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

शहीद होने की खबर सुनते ही मां का फटा कलेजा

दहाड़ मारकर रोती मां।

बेटे की पुकार लगाकर शहीद की मां किरण देवी रो-रो कर बेहाल है। हर आधे घंटे में बेहोश हो रही है। कहती है तो बहुत कष्ट से अपने दोनों बेटों का उसने पालन पोषण की है। लेकिन आज एक बेटा इस दुनिया से चला गया। इस बार वह कहकर गया था कि अगले बार जब वह आएगा तो मधुबन में घर की ढलाई करेगा। लेकिन मेरे बबुआ के जाने से उस परिवार का सब कुछ लूट गया है। घर का वह इकलौता होनहार था। बताते चलें कि मधुबन में भी इनका घर बनाया जा रहा था। फिलहाल इनके घर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

बेटे को कंधे पर लिए शहीद जवान सीताराम।

शहीद की खबर मिलते ही गम में डूबा पूरा गांव

इधर सीताराम के शहीद होने की सूचना के बाद से पूरे इलाके में मातम व सन्नाटा पसर गया है। हर आंख में गम के आंसू साफ दिख रहा है। आंख से दिव्यांग शहीद के पिता सुबह से ही न कुछ बोल पा रहे हैं और न ही रो पा रहे हैं। मां चीख-चीख कर रो रही है। पूरा इलाका रो-रो रहा है। हर जुबान से सिर्फ एक ही आवास निकल रही है, गांव के एक होनहार काे दुश्मनों ने छीन लिया। शहीद सीताराम का पार्थिव शरीर शनिवार को गिरिडीह स्थित पीरटांड़ पहुंचेगा। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार गांव में ही किया जाएगा।

सांत्वना देने वालों का लगा रहा तांता | घटना की सूचना मिलते ही पीरटांड़ बीडीओ बैद्यनाथ उरांव, प्रमुख सिकन्दर हेम्ब्रम, थाना प्रभारी उपेन्द्र राय सहित कई स्थानीय प्रमुख लोगों का आगमन हुआ। इन सबों ने दुख व्यक्त करते हुए परिवार जनों को सांत्वना दी है। वहीं भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। ग्रामीणों में पाकिस्तान के खिलाफ काफी आक्रोश पनप रहा था।

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