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डीसी सभागार में विरोध के बीच 401 विद्यालयों के विलय का प्रस्ताव पारित

Potka News - भास्कर न्यूज |जमशेदपुर/घाटशिला विधायकों के विरोध के बीच उपायुक्त कार्यालय सभागार में हुई जिला प्रारंभिक...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
डीसी सभागार में विरोध के बीच 401 विद्यालयों के विलय का प्रस्ताव पारित
भास्कर न्यूज |जमशेदपुर/घाटशिला

विधायकों के विरोध के बीच उपायुक्त कार्यालय सभागार में हुई जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति की बैठक में जिले के 401 स्कूलों के विलय का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। समिति के 16 सदस्यों में से 14 सदस्यों के समर्थन से प्रस्ताव का पारित हुआ। इससे पूर्व झामुमो विधायक कुणाल षाड़ंगी व राज्य की रघुवर दास सरकार को समर्थन दे रहे आजसू के विधायक राम चंद्र सहिस ने स्कूलों के विलय के प्रस्ताव का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया। बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकले कुणाल षाड़ंगी ने प्रस्ताव की जो प्रति उन्हें उपलब्ध कराई गई थी, उसे फाड़ कर अपना विरोध दर्ज कराया। बाहर निकालने से पूर्व दोनों विधायकों ने अपने - अपने क्षेत्र के स्कूलों के विलय पर अपने सुझाव भी दिए थे, जिसे बैठक के मिनट्स में शामिल किया गया था।

भाजपा विधायक ने किया प्रस्ताव का समर्थन

बैठक में पोटका की विधायक की भाजपा विधायक मेनका सरदार,घाटशिला के विधायक लक्ष्मण टुडू, सीएम रघुवर दास के विधायक प्रतिनिधि पवन शर्मा, मंत्री सरयू राय के शिक्षा प्रतिनिधि एसपी सिंह व सांसद विद्युत वरण महतो के प्रतिनिधि संजीव कुमार ने कुछ सुझावों के साथ जिला प्रशासन के विलय को अनुमोदित कर दिया। बैठक के बाद विधायक मेनका सरदार ने कहा कि विलय की स्वीकृति देते समय शिक्षा अधिकार अधिनियम को प्राथमिकता दी गई और एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी के स्कूलों का विलय नहीं किया है। रेलवे लाइन , बिना गेट मैन से लेबल क्रासिंग , एनएच , पहाड़ी रास्ता , नाला व नदीं को ध्यान में रखकर स्कूलों के विलय की स्वीकृति प्रदान की गई है।

कुणाल षाड़ंगी ने प्रस्ताव की प्रति फाड़ कर जताया विरोध

डीसी आफिस के सामने प्रदर्शन करते आजसू कार्यकर्ता।

डीसी अमित कुमार ने कहा कि स्कूलों के विलय के प्रस्ताव को आंशिक बदलाव के साथ जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति ने मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रारंभिक शिक्षा समिति के अगर कोई सदस्य तथ्यात्मक आपत्ति दर्ज कराते हैं तो उस पर विचार किया जाएगा। बैठक में विधायक कुणाल षाड़ंगी व रामचंद्र सहिस ने भाग लिया, पर अधूरा छोड़ कर वे चले गए। सैद्धांतिक रूप से दोनों विधायक की आपत्ति दर्ज नहीं हो पाएगी। स्कूलों की सूची बनाने के लिए तीन चरणों में जांच की गई है। इसके बाद सूची बनाई गई। पहले 890 स्कूलों की सूची थी। बाद में वह घटकर 463 पर पहुंच गई। प्रखंड शिक्षा समिति ने 399 स्कूलों के विलय को मंजूरी देते हुए प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति के पास भेजा था। डीसी ने कहा कि शिक्षा अधिकार अधिनियम के मापदंड को पूरा करते हुए स्कूलों का विलय किया गया है।

तथ्यात्मक आपत्ति पर विचार किया जाएगा: डीसी

बैठक के शुरू होने के साथ ही कुणाल षाड़ंगी व सहिस विरोध जताने लगे। सहिस ने कहा कि स्कूलों के विलय की सूची विधायकों को पहले से नहीं दी गई है। इस पर डीसी अमित कुमार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिले के सभी विधायकों व सांसदों को विलय किए जाने वाले स्कूलों की सूची उपलब्ध करा दी गई थी। जिन स्कूलों का विलय किया जाना है, उसे प्रखंड शिक्षा समिति ने पारित कर जिला शिक्षा समिति के पास भेजा था। मालूम हो कि विधायक प्रखंड शिक्षा समिति के सदस्य होते हैं। विधायकों अथवा उनके प्रतिनिधियों ने प्रखंड शिक्षा समिति की बैठक में स्कूल के विलय के प्रस्ताव का विरोध नहीं किया था, लेकिन जब प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति के समक्ष पहुंचा तो विरोध शुरू हुआ है। बैठक करीब 11.30 बजे शुरू हुई थी। विधायक कुणाल षाड़ंगी व रामचंद्र सहिस करीब 12 बजे बैठक में पहुंचे थे। 45 मिनट तक दोनों बैठक में रहे। इस बीच दोनों ने अपनी बात बैठक में रखी और बाहर निकल गए। इस दौरान उन दोनों ने उपस्थिति पंजी पर अपना हस्ताक्षर भी नहीं किया।

बैठक शुरू होते ही जताने लगे विरोध

डीसी आफिस में प्रदर्शन करते झामुमो कार्यकर्ता।

िवराेध करतीं छात्राएं।



मिटिंग का विरोध कर बाहर प्रस्ताव की प्रति फाड़ते षाड़ंगी।

स्कूलों को बंद करना प्रासंगिक नहीं: कुणाल

बैठक में सभी सदस्यों को विलय होने वाले स्कूलों के प्रस्ताव से जुड़े कागजात एक फाइल में दी गई थी। बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकलने के बाद विधायकों ने सार्वजनिक तौर पर प्रति फाड़ कर फेंक दी। इसके बाद षाड़ंगी ने पत्रकारों से कहा कि स्कूलों को बंद करना वर्तमान समय में प्रासंगिक नहीं है। ग्रामीण इलाके में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सरकारी स्कूलों पर ही निर्भर है। विधायक ने कहा कि नीति आयोग कोई निर्वाचित संस्था नही है, जिसकी हर बात मान लेनी चाहिए। यह राज्यव्यापी समस्या है। सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जिसमें सर्वसम्मति से स्कूलों के विलय के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार व नीति आयोग को भेजा जाएगा।

स्कूलों के विलय की रिपोर्ट अधूरी : सहिस

बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकले आजसू के विधायक रामचंद्र सहिस ने कहा स्कूलों के विलय का प्रस्ताव आधा - अधूरा है और जल्दीबाजी में बनाया गया है। भौगोलिक व सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखे बिना स्कूलों का विलय किया जा रहा है। विधायक ने कहा कि ग्रामीण इस बात को लेकर परेशान हैं कि उनके बच्चे अब पढ़ने के लिए कहां जाएगे। अभिभावकों के द्वारा उनसे शिकायत की जा रही है। उन्होंने कुणाल षाड़ंगी के उस मांग का समर्थन किया जिसमें विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की गई है। विधायक ने कहा आजसू स्कूलों के विलय को सहन नहीं करेगी , चाहे सरकार में रहना पड़े अथवा बाहर आना पड़े।

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