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लैम्पस की बजाय खुले में औने-पौने दाम में धान बेच रहे किसान, मिल मालिक हो रहे मालामाल

सरकार जहां किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास में लगी है वहीं लैम्पस में धान खरीददारी की जटिल प्रक्रिया के कारण...

Dainik Bhaskar

Feb 16, 2018, 03:35 AM IST
लैम्पस की बजाय खुले में औने-पौने दाम में धान बेच रहे किसान, मिल मालिक हो रहे मालामाल
सरकार जहां किसानों की आमदनी बढ़ाने के प्रयास में लगी है वहीं लैम्पस में धान खरीददारी की जटिल प्रक्रिया के कारण किसान औने पौने दाम पर खुले बाजार में बेचने को विवश है। दूसरी ओर धान के दुगना दाम पर चावल बिक रहा है। सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1700 रुपए प्रति क्विंटल के दर से किसान से ख़रीदारी का दाम रखा है। वही किसान अभी भी सरकारी पेंच के कारण 1200 रुपए में ही धान बेचने को मजबूर है। उन्हें अपनी लागत का भी मूल्य नहीं मिलता है। मंहगाई के कारण मजदूर से लेकर खाद तक सभी चीजों के खर्च में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। जहां धान की कीमत में 2 रुपए प्रति किलो की तेजी आई है वही चावल में 7 से 8 रुपए प्रति किलो में बढ़ोतरी हो गयी है। वही किसान फटेहाल है तो मिल मालिक मालामाल है। इस पर चावल मिल मालिक का कहना है कि चावल बांग्लादेश निर्यात हो रहा है। धान भी कम मिल रहा है और धान की गुणवक्ता भी नहीं है। जिसके कारण चावल में तेजी है। कुलड़ीहा के किसान रंजीत गिरी का कहना है कि हम किसानों को लैम्प्स में धान बेचने में काफी परेशानी हो रही है। रजिस्ट्रेशन के लिए जमीन के कागजात की मांग की जाती है। लेकिन अभी खाजना का रसीद नहीं कट रहा है जिसके कारण हमारा रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ और मजबूरी में धान बिचौलिया को 1200 रुपए प्रति क्विंटल में बेचने को मजबूर है।

लैम्पस ने कहा, गोदाम में जगह नहीं : अमित

किसान अमित साहू ने बताया कि हमने पोटका ब्लॉक में सरकार को धान देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। धान देने के लिए मैसेज भी आया लेकिन लैम्पस में बोला जा रहा है कि अभी गोदाम में जगह नहीं है। मिल वाले धान नहीं ले रहे जब जगह होगा तब धान लेंगे। अब मजबूरी में हमे धान 1200 रुपए प्रति क्विंटल में बेचना पड़ रहा है। लागत भी नहीं मिल रही है।

रजिस्ट्रेशन कराया, पर नहीं आया मैसेज: शरद

किसान शरद सिंह ने बताया कि हमने धान लैम्पस में देने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन अभी तक हमे मैसेज ही नहीं आया है और मजबूरी में धान कम दाम में बेचना पड़ रहा है। इन जटिलता के कारण किसानों को सरकारी लाभ नहीं मिल रहा है। वही किसान मजबूरी में धान कम दाम में बेच कर घर में खाने के लिए चावल दो गुना दाम में खरीदना पड़ रहा है। जहां किसान धान कम में बेच रहे है वही चावल के दाम में बेतहाशा तेजी हो गयी है।

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