गोला क्षेत्र में 18 घंटे बिजली की कटौती से मचा हाहाकार
झारखंड की नई सरकार के गठन के साथ बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो गया। बिजली कटौती अब तो हद को पार कर चुकी है। जिसका दुष्प्रभाव उपभोक्ताओं के जीवन पर पड़ रहा है। चारों ओर बिजली की कटौती को लेकर हाहाकार है। बच्चों की परीक्षा की तैयारी, किसानों की सिंचाई, छोटे छोटे घरेलू उद्योग और सबसे बड़ी बात पेयजलापूर्ति पर इसका जबरदस्त असर हुआ है। उपभोक्ताओं में सरकार के रवैये पर आक्रोश स्पष्ट दिखाई देता है।इस विषय की हर जगह चर्चा आम है कि नई सरकार का एक सौ यूनिट बिजली मुफ्त देने की योजना की शुरुआत हो गई है। उन्होंने कहा सरकार की गलतियों का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि डीवीसी का बिल बकाया रखकर झारखंड सरकार राजनीति कर रही है। बिजली कटौती में केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ कर इसके समाधान करने बात करने की जगह जनता को भ्रमित कर रही है। डीवीसी का झारखंड विद्युत बोर्ड (जेवीएनएल) के पास करीब पांच हजार करोड़ रुपये बकाया है। मांग की गई है कि सरकार बकाए की राशि का शीघ्र भुगतान करने का प्रयास करे जिससे जनता की समस्या का समाधान हो। भाजपा के नेताओं ने मुख्यमंत्री द्वारा कही गई उस बात जबाब देते हुए कहा कि पिछली सरकार से यह बकाया जारी है जबकि उस बकाया राशि के भुगतान की जबाबदेही अब वर्तमान सरकार की है। नेताओं ने सरकार से शीघ्र बिजली समस्या का समाधान करने की मांग की है।