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भुरकुंडा कोलियरी को 20 दिनों के लिए मिला सीटीओ, उत्पादन लक्ष्य 6.52 लाख टन
सीसीएल बरका सयाल प्रक्षेत्र के भुरकुंडा कोलियरी को झारखंड सरकार द्वारा मात्र बीस दिनो के लिये सीटीओे दिया गया है। सीटीओ मे भुरकुंडा कोलियरी को बीस दिनों में 6 लाख 52 हजार टन कोयला का उत्पादन करना है। जो प्रबंधन के लिए आसमान से तारे तोड़ने के बराबर है। प्रबंधन किसी भी कीमत पर इस उत्पादन लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकती है। भुरकुंडा कोलियरी के भूमिगत, ओपेन कास्ट और बलकुदरा आउट सोर्सिंग माइंस एक माह मे करीब सवा लाख टन ही उत्पादन कर सकती है। उसमे भी बलकुदरा माइंस एक लाख टन कोयला का उत्पादन करती है। ऐसी परिस्थिति मे भुरकुंडा कोलियरी सात माह के अपने टारगेट को कैसे 20 दिनों में पूरा करेगी। पिछले 31 दिसंबर को भुरकुंडा कोलियरी को सीटीओ नहीं मिलने के कारण बंद करना पड़ा था। प्रबंधन ढाई माह तक सीटीओ के लिए प्रयासरत रही। प्रबंधन को 31 मार्च तक ही सीटीओ मिला है। इससे पूर्व भी भुरकुंडा कोलियरी सीटीओ नहीं मिलने के कारण नौ माह बंद था। सीटीओ मिलने के बाद गुरुवार की देर रात काे कोलियरी से उत्पादन चालू हा़े गया।
इधर भुरकुंडा कोलियरी के पीओ अशोक कुमार ने कहा कि 31 मार्च तक सीटीओ मिला है। प्रबंधन आगे भी सीटीओ के लिये प्रयासरत है। प्रबंधन दिसंबर माह तक के लिए दो दिनो के अंदर सीटीओ के लिये अप्लाई करेगी। इतने कम समय में टारगेट पूरा नहीं किया जा सकता है।
गिद्दी कोलियरी को भी मिला सीटीओ
गिद्दी | सीसीएल अरगडा प्रक्षेत्र के गिद्दी कोलियरी को 30 जून 2020 तक का सीटीओ क्लीयरेंस झारखंड प्रदूषण विभाग द्वारा दे दिया गया है। गिद्दी कोलियरी को विभाग द्वारा 12 मार्च को सीटीओ दिया गया है। गिद्दी कोलियरी को सीटीओ क्लीयरेंस मिलने के बाद गिद्दी परियोजना कर्मियों में हर्ष व्याप्त है। बताते हैं कि बीते 22 मार्च की रात्रि पाली से गिद्दी प्रबंधन ने गिद्दी परियोजना का ईसी व सीटीओ क्लीयरेंस नहीं होने के कारण खदान को बंद कर दिया था। साथ ही खदान में कार्यरत आॅपरेटरों एवं अन्य कर्मियों का अरगडा प्रक्षेत्र के अन्य परियोजना में प्रतिनियोजित कर दिया था। बाद में झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड ने 24 सितंबर को गिद्दी परियोजना का सीटीओ क्लीयरेंस 31 मार्च 2020 तक किया था। परंतु झारखंड राज्य प्रदूषण बोर्ड ने फिर से 25 जनवरी को गिद्दी प्रबंधन को एक मेल भेज कर अपरिहार्य कारण बता सीटीओ क्लीयरेंस को रद्द कर दिया था।
31 दिसंबर से बंद पड़ी थी कोलियरी
भुरकुंडा कोलियरी को बीस दिनो के लिए सीटीओ मिला है। पिछले 31 दिसंबर को सीटीओ के कारण भुरकुंडा कोलियरी बंद हो गया था। ढाई माह के बाद प्रबंधन के प्रयास के बाद बीस दिन के लिये सीटीओ मिला है। इसके पूर्व वर्ष 2018 के अक्टूबर माह मे सीटीओ के कारण कोलियरी बंद कर दिया गया था। वर्ष 2019 के जुलाई माह में करीब नौ माह के बाद सीटीओ मिलने के बाद उत्पादन शुरू हुआ था। इधर भुरकुंडा कोलियरी प्रबंधन को सीटीओ मिलने के साथ करीब साढे छह लाख टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला है। वह भी मात्र बीस दिनो मे पुरा करना है। जो प्रबंधन के लिये कहीं से संभव नही है। भुरकुंडा कोलियरी प्रत्येक माह करीब सवा लाख टन ही कोयला का उत्पादन करते आ रही है। इस हिसाब से प्रबंधन सात माह के उत्पादन लक्ष्य को बीस दिनों में कैसे पूरा करेगी।
बंद पड़ी बलकुदरा आउट सोर्सिंग माइंस।