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जल, जंगल और जमीन से जुड़ी प्रकृति की उपासना का पर्व है सरहुल : बिनोद

एक वर्ष पहले
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न्यू चिलमटुंगरी स्थित सरना स्थल शुक्रवार को सरहुल महोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में रजरप्पा थाना प्रभारी बिनोद कुमार मुर्मू व विशिष्ट अतिथि मायल मुखिया टुशील देवी, झामुमो के जिला संगठन सचिव महेंद्र मिस्त्री मौजूद थे। मौके पर मुख्य अतिथि ने कहा की प्रकृति की उपासना का पर्व है सरहुल। यह पर्व जल जंगल जमीन से जुड़ी हैं। क्योंकि हमलोग पेड़ पौधा की पूजा करते है। जिससे उनसे हमे जीवन की प्राप्ति होती है। इससे पूर्व अतिथियों का स्वागत सरना समिति के सदस्यों द्वारा पगड़ी पहनाकर किया गया। इससे पूर्व पहान सिमतराम मांझी द्वारा आदिवासी रीति रिवाज के साथ सरना स्थल में पूजा अर्चना किया गया। तत्पश्चात लोगों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया। मौके पर रोगन मांझी, सुखलाल मुर्मू, पुरन सोरेन, बिहारी मरांडी, रूपलाल किस्कू, बाबूदास सोरेन, बासुदेव हेम्ब्रम, बालाराम सोरेन, बंशी मांझी, बबलू किस्कू, हरिलाल मांझी, सोहन मांझी, लक्ष्मण हांसदा सहित कई मौजूद थे।

संथालियों ने सरहुल पूजा कर मांगी गांव की खुशहाली

मगनपुर | प्रखंड क्षेत्र के अति सुदूरवर्ती गांव बाघाकुदर, कोनारडीह मांझी टोला में एतवा मरांडी की अध्यक्षता में सरहुल पूजा का आयोजन किया गया। इस दौरान गांव के पाहन द्वारा अहले सुबह सखुआ के पेड़ पर ग्राम देवता की पूजा अर्चना कर गांव की खुशहाली की कामना की। साथ ही ढोल मांदर की थाप पर महिला व पुरुष पारंपरिक लिबास पर टोले मुहल्ले में झूमते नजर आए। मौके पर गांव के दर्जनों महिला पुरुष उपस्थित थे।

सरहुल महोत्सव में मांदर की थाप पर झूमते मुख्य अतिथि व अन्य।
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