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मासूम बच्ची के शव के साथ लिपट कर रोती रही मां, इलाज करने से पहले डॉक्टर बोले थे -तुम ज्यादा जानते हो...

लगभग दो घंटे तक हंगामा के बाद परिजन शव लेकर चले गए।

Dainik Bhaskar

Apr 27, 2018, 12:06 AM IST
बच्ची के शव के साथ लिपट कर रोती मां। बच्ची के शव के साथ लिपट कर रोती मां।

रांची. स्वास्थ्य विभाग के हेड सेकेट्री ने बीते बुधवार को 4 घंटे रिम्स का निरीक्षण किया था और अधीक्षक को फटकार लगाई थी। व्यवस्था ठीक नहीं करने पर रिजाइन करने तक को कहा था। परिवार वालों ने कहा-बच्ची को मंगलवार को भर्ती कराया था लेकिन गुरुवार को तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। हमने इमरजेंसी में इलाज करने को कहा तो डॉक्टर बोल-तुम हमसे ज्यादा जानते हो। और कुछ देर बाद बच्ची ने दम तोड़ दिया। डायरेक्टर और डॉक्टरों को व्यवस्था ठीक करने के लिए कई निर्देश दिए थे। लेकिन, दूसरे ही दिन गुरुवार को रिम्स की अव्यवस्था से 10 वर्षीय बच्ची जैसमीन की मौत हो गई। ये था पूरा मामला...

- शिशु वार्ड में भरती जैसमीन की मौत के बाद परिवार वालों ने खूब हंगामा किया। बच्ची के परिवार वाले डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे थे।

- मौत के बाद परिजन रिम्स के मेन गेट पर ही शव के साथ बैठ गए और शव को ले जाने से मना कर दिया।

- उनका कहना था कि जब तक स्वास्थ मंत्री और स्वास्थ सचिव नहीं आएंगे, यहां से नहीं जाएंगे।

- डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती है। इसके कारण हमारी बच्ची की मौत हुई है। लगभग दो घंटे तक हो हंगामा के बाद परिजन बच्ची के शव को लेकर चले गए।

पिता का आरोप

- मृतक के पिता योगेंद्र कुमार का कहना था कि हमने बेटी को बेहतर इलाज के लिए यहां लाया लेकिन, डॉक्टरों की कोताही के कारण बच्ची मर गई।

- सुबह ही वह अच्छे से बात कर रही थी। ट्रॉली मैन पर आरोप लगाते हुए कहा कि कई घंटे से हम ट्रॉली की मांग कर रहे थे लेकिन, कोई सुनने वाला नहीं था।

डॉक्टर की सफाई

- जैसमीन का इलाज कर रहे डॉ. अमर वर्मा ने कहा कि दो दिन पहले बच्ची को गढ़वा सदर अस्पताल से रेफर किया गया था, पेशेंट को जांडिस था और ब्लड की भी कमी थी।

- पहले जड़ी-बूटी से इलाज किया गया था। इस हालत में 12 दिन तक घर पर ही रखा गया था। पेशेंट को जब तक यहां लाया गया था।

गढ़वा की जैसमीन जांडिस की चपेट में थी


- जैसमीन गढ़वा जिले के मझगांव की रहने वाली थी। उसका इलाज गढ़वा सदर अस्पताल में चल रहा था। बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया।

- 24 अप्रैल को बच्ची को शिशु वार्ड में भर्ती किया गया था। उसका इलाज डॉ. अमर वर्मा कर रहे थे। गुरुवार को अचानक उसकी तबियत बिगड़ी और मौत हो गई।

- बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए शव को इमरजेंसी के पास रख दिया और हंगामा करने लगे।

डेथ सर्टिफिकेट रिम्स से जो दिया गया, उसमें मौक के कारण का जिक्र ही नहीं किया। डेथ सर्टिफिकेट रिम्स से जो दिया गया, उसमें मौक के कारण का जिक्र ही नहीं किया।
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बच्ची के शव के साथ लिपट कर रोती मां।बच्ची के शव के साथ लिपट कर रोती मां।
डेथ सर्टिफिकेट रिम्स से जो दिया गया, उसमें मौक के कारण का जिक्र ही नहीं किया।डेथ सर्टिफिकेट रिम्स से जो दिया गया, उसमें मौक के कारण का जिक्र ही नहीं किया।
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