सामूहिक विवाह / लिव इन में रहने वाले 128 आदिवासी जोड़ों का निमित फाउंडेशन ने कराया विवाह

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 07:35 PM IST


128 जोड़ों की दीनदयाल नगर स्थित झारखंड सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शादी कराई गई। 128 जोड़ों की दीनदयाल नगर स्थित झारखंड सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शादी कराई गई।
X
128 जोड़ों की दीनदयाल नगर स्थित झारखंड सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शादी कराई गई।128 जोड़ों की दीनदयाल नगर स्थित झारखंड सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शादी कराई गई।

रांची.   मकर संक्रांति, टुशु और सोहराई जैसे पावन पर्व के अवसर पर सोमवार को खूंटी, तोरपा, गुमला, बसिया, पालकोट और घाघरा प्रखंड के अलावा रांची जिले के एक जोड़े सहित कुल 128 जोड़ों की दीनदयाल नगर स्थित झारखंड सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट के परिसर में शादी कराई गई। निमित फांउडेशन की ओर से आयोजित इस समारोह में झारखंड की सामाजिक विविधताओं का पूरा खयाल रखा गया और 40 हिन्दू, 66 सरना और 22 ईसाई जोड़ों की शादी कराई गई। इस समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष प्रो. दिनेश उरांव थे। उन्होंने अपने संबोधन में सामाजिक और वैधानिक मान्यता दिलाने के निमित के प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह एक प्रशंसिया ही नहीं अपितु ईश्वरीय कार्य है। सरकार को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह के कार्यों के लिए संस्थाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने सभी से ऐसे सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का अनुरोध किया।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 75 जोड़ों का उठाया खर्च

  1. निमीत फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 75 जोड़ों के विवाह का खर्च उठाया। इस कार्यक्रम को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक का भी उल्लेखनीय सहयोग मिला। वहीं, पूरे आयोजन में प्रदान ने निमित के मुख्य सहयोगी की भूमिका निभाई। प्रदान ने ही गुमला और खूंटी जिलों में अपने महिला समूहों के माध्यम से ढुकुवा जोड़ों की पहचान कर उनके विवरण उपलब्ध कराए। मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, खेल सचिव राहुल शर्मा, रांची जिला प्रशासन और नगर निगम ने भी आयोजन को अपना पूर्ण समर्थन और सहयोग दिया।

  2. लिव इन रिलेशन में रहते हैं हजारों परिवार

    झारखंड के विभिन्न जिलों के गांवों में लिव इन रिलेशन में हजारों आदिवासी परिवार रह रहे हैं। निमित फाउंडेशन की सचिव निकिता सिन्हा के अनुसार झारखंड के कई स्थानों पर लिव इन में रहने वाले जोड़े हैं। उसे उनके समाज की स्वीकृति भी प्राप्त है। दरअसल, परंपरा के अनुसार पूरे गांव को खाना खिलाना पड़ता है, जिसके बाद विवाहित माना जाता। ऐसा करने में सक्षम नहीं रहने वाले जोड़े साथ में तो होते हैं। लेकिन आर्थिक स्थिति दयनीय होने के कारण यह समाज की परंपरा निभाने में अक्षम होते हैं। इसलिए बिना विवाह किए ही साथ में रहते हैं। कई जोड़े तो बुजुर्ग भी हो चुके हैं। उनके बड़े-बड़े बच्चे भी हैं। लेकिन सामाजिक रूप से वह बिना विवाह किए रह रहे हैं। ऐसे ही जोड़ों को तलाश कर उनकी शादी कराई जा रही है। रजिस्ट्रार के यहां से शादी को कानूनी रूप भी दिलाई जाती है।

  3. 64 जोड़ों का पहले कराया जा चुका है विवाह

    निमित्त द्वारा गत दो वर्ष वर्षों से ऐसे जोड़ों को सामाजिक एवं कानूनी मान्यता दिलाने के लिए सामूहिक शादी कराई जा रही है। वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में 21 एवं 43 जोड़ों की शादी कराई गई है। अब यह जोड़े सामान्य परिवारों की तरह रहकर सरकार और समाज कि परिवारोन्मुखी सभी योजनाओं और प्रक्रियाओं का लाभ ले रहे हैं।

  4. महिला व बच्चों को नहीं मिलता संपत्ति में हक

    इस सामाजिक कुप्रथा की वजह से पुरूष पार्टनर की मृत्यु पर जमीन एवं संपत्ति महिला एवं बच्चों को नहीं मिलती। बच्चों के कान छेदन की मनाही होती है और महिलाओं की असामायिक मृत्यु पर उन्हें अंतिम क्रियाकर्म का अधिकार भी नहीं दिया जाता है। वहीं, आने वाली पीढ़ी भी इन परिवारों की शादी से वंचित रह जाती है। वहीं, शादी कराए जाने के बाद अब इस परिवार को सामाजिक व कानूनी मान्यता प्राप्त हो जाएगी है। इसके कारण इन्हें परिवार को सभी तरह के हक मिल सकेंगे।

COMMENT