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400 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम, चुटिया में एक दिन पहले जली होलिका

एक वर्ष पहले
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चुटिया में एक दिन पहले जली होलिका. - Dainik Bhaskar
चुटिया में एक दिन पहले जली होलिका.
  • नागवंशी परंपरानुसार चुटिया वासियाें ने एक दिन पहले हाेलिका दहन किया
  • महंत गाेकुल दास ने विधिवत पूजन के बाद हाेलिका दहन संपन्न हुआ

रांची. डाेल जतरा मैदान अपर चुटिया में 1685ई. से चली आ रही नागवंशी परंपरानुसार चुटिया वासियाें ने एक दिन पहले हाेलिका दहन किया। फग डाेल जतरा समिति के नेतृत्व में चुटियावासियाें ने दिन में ही हाेलिका दहन हुआ। रात 10:30 बजे गांव के पाहन ने जलावन लकड़ियाें के बीच रखी अरंडी की डाल काे एक झटके में काटकर बगैर पीछे मुड़े घर की प्रस्थान करते हुए फगुआ की शुरुआत की। महंत गाेकुल दास ने विधिवत पूजन के बाद हाेलिका दहन संपन्न हुआ। इससे पहले समिति शाम 7 बजे हाेली मिलन समाराेह का आयाेजन किया।


नागपुर से आए कलाकाराें ने मनमाेहक हाेली के मनाेहक नृत्य-संगीत की प्रस्तुति दी।  चुटियावासी मंगलवार काे दाेपहर एक बजे तक गीले रंग से हाेली खेलेंगे। 2 बजे के लाेग तैयार हाेकर जतरा मैदान भगवान श्रीराम और लखन की मूर्तियाें काे डाेली में सजाएंगे। भगवान के चरण पर अबीर चढ़ाकर नगरवासी एक-दूसरे काे लगाएंगे। इस बीच चुटिया के सबसे पुरानी मूर्तियाें काे राम मंदिर के डाेल में सजित कर मंदिर की परिक्रमा करवाएंगे। इसके बाद शाेभायात्रा निकलेगी।

बांग्ला परंपरानुसार दुर्गाबाड़ी में भी होलिका दहन
श्रीश्री दुर्गापूजा समिति और श्री हरिसभा द्वारा रविवार को दुर्गाबाड़ी परिसर में होलिका दहन किया गया। श्री शिव मंदिर और राधा गोबिंद मंदिर के पुजारी बलभद्र मिश्रा ने होलिका दहन से पहले धार्मिक अनुष्ठान कराए। सचिव गोपाल भट्टाचार्य समेत कार्यकारिणी सदस्यों की मौजूदगी में मंत्रोचारण के बीच 7.30 बजे अग्नि संस्कार शुरू हुए । पूजा-अर्चना के बाद चांचर से पवित्र अग्नि प्रज्जवलित की गई।

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