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पाक को चकमा देने के लिए 6 जेट दूसरी तरफ भेजे, तब बालाकोट में हमला किया

एक वर्ष पहले
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एयर स्ट्राइक के लिए 25-26 फरवरी की रात का समय ही क्यों चुना गया?

कुछ कारण तो मैं आपको नहीं बता सकता लेकिन, मकसद से जुड़ी तीन परिस्थितियों से आपके सवाल का समाधान हो जाएगा। पहला और बड़ा कारण यह था कि हम ऐसे समय हमला करना चाहते थे, जब सभी आतंकी एक जगह जमा हों। यह रात का समय हो सकता था। हमने गौर किया था कि इस आतंकी ठिकाने पर सुबह चार बजे हलचल शुरू हो जाती है, जब तड़के की नमाज होती है। लिहाजा एक घंटे पहले वे अपने बिस्तरों में होने थे। भारत में उस समय साढ़े तीन बजे होंगे और पाकिस्तान में तीन। दूसरा कारण, चांद की खास स्थिति थी। 19 फरवरी को पूर्णमासी थी। मिशन के समय 3 से 4 बजे तक चांद क्षितिज से 30 डिग्री पर होना था। ऐसे में चांदनी एकदम आदर्श थी। उस दिन मौसम की पश्चिमी हलचलों का असर कम था। सटीक बमबारी में हवाएं आड़े आ सकती थीं।

हमले का टारगेट किसने दिया था?

खुफिया एजेंसियों ने। सरकार ने पाक के आतंकी ठिकानों की जानकारी रॉ से जुटा ली थी।

बालाकोट के लिए ग्वालियर से भी कुछ विमान उड़े थे, उस समय ग्वालियर में क्या हो रहा था?

गोपनीयता बनाए रखने के लिए हमने इस बात पर गहन विचार किया कि ग्वालियर में बेस के आस-पास लोकल एरिया में क्या इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं जाम कर दी जाएं? लेकिन, आखिरकार तय किया गया कि इस तरह का कोई भी कदम गोपनीयता को खत्म कर सकता है।

लेकिन, बड़ी संख्या में वायुसेना के पायलटों की गतिविधि को कैसे गोपनीय रखा जा सकता था?

इसके लिए व्यापक रणनीति बना ली गई थी। मिशन पर जाने वाले जांबाज पायलटों से व्यक्तिगत तौर पर मेरा मिलना जरूरी था। मैं 21 फरवरी को ग्वालियर गया। पायलटों से मुलाकात की। बड़ी समस्या उड़ान को सीक्रेट रखने की थी। उनके हवाई मार्ग की दिक्कत यह थी कि दिल्ली से रवाना होने वाली रोज की सिविलियन उड़ानें ऊपर की ओर रुख कर रही होती हैं, जबकि आने वाली घरेलू और विदेश उड़ानें नीचे उतर रही होती हैं। ऐसे में नई दिल्ली के इंदिरा गंाधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लगे रडार में बड़ी संख्या में फाइटर विमानों की ब्लिप (एक तरह की सूचना) आने से हल्ला मच सकता था। यह संभावना खत्म करने लिए एयरपोर्ट पर वायु सेना के एक अधिकारी को विशेष सरकारी दूत के साथ भेजा गया, ताकि रेथियॉन रडार पर आने वाली ब्लिप को नजरअंदाज कराया जा सके।

एयरस्ट्राइक के दौरान ऐसी कोई परिस्थिति भी बनी होगी, जिससे आपकी भी धड़कने बढ़ गई हों?

हां, एक मौका आया था। दरअसल हमारे फाइटर जब अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे तो हमने देखा कि मुरीद (रावलपिंडी के पास एक जगह, जहां पाकिस्तान का एक एयर बेस है) के आकाश में पाकिस्तानी वायुसेना का एक टोही विमान और एक लड़ाकू विमान गश्त कर रहा है। उन्हें वहां से भटकाने के लिए हमने दो सुखोई-30 और चार जगुआर विमानों को बहावलपुर की ओर तेजी से रवाना किया। हमारे इन विमानों की मूवमेंट देख पाकिस्तानी विमान उनकी ओर लपके और खतरा टल गया। हमारे फाइटर पोजिशन ले चुके थे। पहली एयरस्ट्राइक 3 बजकर 28 मिनट पर हुई और चार बजे तक मिशन पूरा हो गया था। सभी लड़ाकू विमान सुरक्षित लौटकर पश्चिमी कमान के दो अड्डों पर उतर गए।

इस मिशन के दौरान पाकिस्तानी एयरफोर्स की क्या प्रतिक्रिया थी?

वे हाई अलर्ट पर थे, पर इस स्ट्राइक से वे हक्के-बक्के रह गए। हमने गौर किया कि स्ट्राइक के तुरंत बाद उनके विमान बालाकोट में मंडरा रहे थे। शायद उन्हें लग रहा था कि एक और स्ट्राइक होने वाली है।

हमले के दौरान बालाकोट में पाक के लड़ाकू विमानों को कैसे भ्रमित किया?

कितने टारगेट थे? हमला सिर्फ बालाकोट में क्यों?

हम नागरिक आबादी को चपेट में नहीं लेना चाहते थे। जहां लोगों को नुकसान हो सकता था, वे निशाने छोड़ दिए। मकसद सिर्फ आतंक पर चोट करना था। इसके लिए बालाकोट उपयुक्त निशाना बना था।’ - सी. हरि कुमार पूर्व एयर मार्शल

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