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लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने पर झारखंड राजी, संभावना तलाशने कमेटी बनेगी

झारखंड में इसकी संभावना तलाशने और माहौल तैयार करने के लिए एक वरिष्ठ मंत्री के नेतृत्व में कमेटी बनाई जाएगी।

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 02:04 AM IST
सीएम दास ने कहा कि व्यवस्था मे सीएम दास ने कहा कि व्यवस्था मे

रांची. मुख्यमंत्री रघुवर दास झारखंड में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने पर राजी हैं। बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में रविवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजेपी देशभर में एक साथ चुनाव कराने की पक्षधर है। झारखंड में इसकी संभावना तलाशने और माहौल तैयार करने के लिए एक वरिष्ठ मंत्री के नेतृत्व में कमेटी बनाई जाएगी। कमेटी में एक रिटायर्ड आईएएस, चुनाव कार्य से जुड़े रिटायर्ड अफसर और समाज के बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा।

सीएम ने कहा- खर्च बचेगा और समय की बर्बादी रुकेगी
सीएम ने कहा कि नगर निकाय, जिला परिषद, विधानसभा और लोकसभा का चुनाव हर पांच साल में एक साथ होने से खर्च और समय की बर्बादी रुकेगी। विकास कार्यों के लिए ज्यादा समय मिलेगा। लेकिन इसके लिए आम सहमति बनाने की जरूरत है। सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की जाएगी। वे सकारात्मक पहल करें।

जो वादा किया था, अधिकतर पूरे किए

सीएम ने कहा कि जनता जागरूक है। उनकी अपेक्षाओं पर सरकार खरी नहीं उतरेगी, तो वह बिना चीर-फाड़ के इलाज कर देगी। यही कारण है कि 2014 के चुनावी घोषणा पत्र में पार्टी ने जो वादा किया था, उसमें से अधिकांश को पूरा कर चुकी है। आदिवासी समाज भी 67 साल में सभी दलों का चरित्र देख चुकी है।

अजेय भारत की ओर बढ़ रही बीजेपी

पूर्वोत्तर राज्यों में बीजेपी की जीत पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी अजेय भारत की ओर बढ़ रही है। देश की जनता क्षेत्रवाद, संप्रदायवाद, जातिवाद से ऊपर उठकर विकासवाद की राजनीति को स्वीकार कर रही है। पूर्वोत्तर के राज्य विकास से अछूते थे, कांग्रेस ने वहां की जनता का शोषण किया। अब जनता ने मोदी और शाह के विकास के मंत्र को स्वीकार किया है, तो वहां भी अन्य राज्यों की तरह तेजी से विकास होगा। देश के करोड़ों लोग कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में जुट गए हैं।

व्यवस्था में कमी हो सकती है, नीयत में नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था में कमी हो सकती है, लेकिन सरकार की नीयत में कमी नहीं है। यहां डॉक्टर की कमी है, कैंपस सलेक्शन कर इसे पूरा कर रहे हैं। राज्य को विकसित होने के लिए कम से कम 10 साल चाहिए, वह भी स्थिर सरकार के साथ। स्थानीय लोगों की नियुक्ति में गड़बड़ी पर कहा कि सूचना के अधिकार के तहत निकलवा काम लें, पता चल जाएगा।