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DB Expose: पीएम दौरे में की करोड़ों हड़पने की तैयारी, स्पेशल ऑडिट में घिरे अफसर

साहेबगंज में 6 अप्रैल 2017 को पीएम दौरे के समय चहेती एजेंसियों को बिना टेंडर सौंपा करोड़ों का काम।

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 08:08 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रांची. साहेबगंज में 6 अप्रैल 2017 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा हुआ था, तब उसकी आड़ में अफसरों ने करोड़ों रुपए हड़पने की तैयारी कर ली थी। मगर विशेष ऑडिट टीम ने इस खेल पर पानी फेर दिया। 21 अगस्त 2017 से 25 अगस्त 2017 तक साहेबगंज में हुए ऑडिट में टीम ने पाया कि बिना टेंडर के ही मौखिक आदेश पर करोड़ों के भव्य पंडाल, पार्किंग, साउंड सिस्टम, विद्युत व्यवस्था, वीवीअाईपी सहित आमजनों के बैठने की व्यवस्था और कैटरिंग का काम चहेती एजेंसियों को सौंप दिया गया। यह तर्क देते हुए कि कम समय मिलने के कारण मनोनयन की प्रक्रिया अपनाई गई। जबकि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की सूचना 5 जनवरी 2017 के ही मिल गई थी। तकरीबन तीन माह से अधिक का समय किसी भी टेंडर के लिए पर्याप्त होता है।


- विशेष ऑडिट टीम ने रिपोर्ट में साफ शब्दों में कहा है कि टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी कर निश्चित रुप से मनोनयन के आधार पर ठेकेदार या एजेंसी को अनुचित लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया है, जिससे सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ है। काम करने वाली एजेंसियों द्वारा भुगतान के लिए 9.50 करोड़ रुपए का बिल जमा किया गया है, वह बहुत ज्यादा है। इन बिलों के भुगतान से सरकारी राजस्व का नुकसान होगा।
- यही नहीं, ऑडिट में मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, साहेबगंज के डीसी डॉ. शैलेश कुमार चौरसिया, पुलिस अधीक्षक कार्यालय साहेबगंज, वन प्रमंडल पदाधिकारी साहेबगंज सहित कई जिम्मेवार अफसर संदेह के दायरे में है।

- ऑडिट टीम ने 8,26,10,224 रुपए को भुगतान योग्य नहीं पाया है। 4,26,10,224 रुपए की वसूली उन एजेंसियों से करने को कहा है, जिन्हें नियम विरुद्ध भुगतान किया गया है। 1,17,60,304 रुपए के बिल पर ऑडिट टीम ने आपत्ति जताई है। वहीं, दूसरी तरफ 4,50,00 रुपए के भुगतान को लंबित पाया है।

पंडाल बनाने वाले ने जो बिल दिया, उसे जांचा नहीं

- सभा स्थल पर पंडाल, पार्किंग, साउंड सिस्टम, विद्युत व्यवस्था आदि कार्यों के लिए 5 जनवरी 2017 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें आजमानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट प्रालि, रांची से उक्त सभी कार्य कराने का निर्देश दिया गया था। जिसके बाद जिला नजारत साहेबगंज द्वारा उक्त सभी कार्य की जिम्मेवारी आजमानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट प्रालि को सौंप दी गई।

- ऑडिट टीम ने जांच में पाया है कि 24-03-2017 को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में कम से कम ढाई लाख लोगों के बैठने के लिए भव्य पंडाल के निर्माण का निर्देश दिया गया था, जबकि 29-03-2017 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई समीक्षा में कम से कम एक लाख कुर्सियों की व्यवस्था और वीवीअाईपी के लिए अच्छे सोफे लगवाने का निर्देश दिया गया।

- एजेंसी को सौंपे गए कार्यादेश में न तो आवश्यकताओं का उल्लेख मदवार किया और न ही आपूर्ति किए गए सामग्रियों एवं किए गए कार्यों के दरों का सत्यापन किया गया। एजेंसी द्वारा जो दर एवं सामग्री का उल्लेख किया गया, उसे किसी भी सक्षम अधिकारी ने सत्यापित नहीं किया है कि बिल में लिखी मापी, सामग्री, दर आदि सही थे अथवा नहीं?

- सामग्री खरीदारी पर 26.85 लाख का अनियमित व्यय: ऑडिट टीम ने बताया है कि बिना टेंडर, बिना कोटेशन आमंत्रित किए मनमाने ढंग से 26,85,567 रुपए में विभिन्न सामग्रियों की खरीदारी की गई।

- क्रय खंड-खंड आदेश देकर किया गया, ताकि निविदा की प्रक्रियाओं से बचा जा सके। किसी भी सामग्री की दर का निर्धारण जिला क्रय समिति द्वारा अनुशंसित नहीं है।

- सामग्रियों की विस्तृत जानकारी भी भंडार पंजी में सही ढंग से अंकित नहीं की गई। जिस वजह से ऑडिट टीम को यह नहीं बताया गया कि सामग्रियों का वितरण किसे किया गया तथा उसका आदेश किस स्तर से दिया गया। जिला प्रशासन द्वारा सभी नियमों का उल्लंघन कर सामग्रियों का क्रय किया गया, जो घोर अनियमितता एवं भुगतान योग्य नहीं है।

भोजना-नाश्ता सप्लाई का काम मेसर्स कावेरी रेस्टाेरेंट काे देने के लिए नियमों का उल्लंघन

- अतिथियों के लिए भोजन-नाश्ता का प्रबंध किया जाना था। 29 मार्च 2017 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा की गई समीक्षा बैठक में रांची के मेसर्स कावेरी रेस्टोरेंट को कैटरिंग संबंधी कार्यों के लिए मनोनीत किया गया। जिसके आलोक में साहेबगंज डीसी के गोपनीय शाखा द्वारा (ज्ञापांक-507/02-04-17) कैटरिंग सर्विस प्रदान करने लिए मेसर्स कावेरी रेस्टोरेंट, रांची को आपूर्ति आदेश सौपा गया।

- इस आदेश में यह उल्लेखित नहीं किया गया कि किस प्रकार के भोजन एवं नाश्ते की कितनी मात्रा में आपूर्ति की जानी है। जांच में टीम ने पाया कि आपूर्तिकर्ता द्वारा कुल 44,01,540 रुपए का बिल जमा किया गया, जो बहुत ज्यादा है।

- दूसरी तरफ नियमों के विरुद्ध एक्टिव कैटरर्स साहेबगंज को खाना-नाश्ता के लिए 4,65,500 रुपए (चेक संख्या-181287/04-05-17) का भुगतान किया गया है। किसी भी आपूर्तिकर्ता के चयन में निविदा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है।

ऑडिट टीम ने रिपोर्ट में ये कहा है

- बिना वैट कटौती किए आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान किया गया। वैट की कुल राशि 3,89,407 थी। ऐसे में उक्त राशि उत्तरदायी व्यक्ति से 12 प्रतिशत ब्याज सहित वसूली होनी चाहिए।
- जांच के क्रम में कुल 48,544 रुपए आयकर राशि की कटौती नहीं की गई। जबकि किसी भी कार्यालय द्वारा 20,000 रुपए से अधिक भुगतान पर आयकर कटौती नहीं होने की स्थिति में भुगतान नहीं करना है। ऐसे में उक्त राशि की वसूली भी 12 प्रतिशत ब्याज के साथ होनी चाहिए।
- विभिन्न मद में भुगतान किया गया, मगर 15,573 रुपए बिक्री कर की राशि की कटौती नहीं की गई। इस राशि की वसूली भी 12 प्रतिशत ब्याज के साथ होनी चाहिए।
- आजमानी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, रांची द्वारा सामान की ढुलाई, लोडिंग एवं अनलोडिंग के अंतर्गत ट्रांसपोर्टेशन एवं लेबर चार्ज के रूप में 1.08 करोड़ का दावा किया गया है। जांच के क्रम में इससे संबंधित कोई कागजात या भुगतान से संबंधित बिल आदि नहीं दिया गया। ऐसे में एजेंसी से संबंधित बिल की मांग की गई है।
- वित्त नियमावली के नियम 208, 245 व 235 का उल्लंघन हुआ है।

इन पर थी प्रोग्राम की प्रमुख जिम्मेदारी

- डॉ. शैलेश कुमार चौरसिया, उपायुक्त

- मोतीलाल हेंब्रम, उपसमाहर्ता, नजारत

- सुरेश कुमार रवानी, प्रधान नाजीर

- श्रीकांत कुमार, सहायक नाजीर

- विष्णु शुक्ला - विजय कुमार सिन्हा।

- डॉ. शैलेश कुमार चौरसिया, उपायुक्त

- मोतीलाल हेंब्रम, उपसमाहर्ता, नजारत

- सुरेश कुमार रवानी, प्रधान नाजीर

- श्रीकांत कुमार, सहायक नाजीर

- विष्णु शुक्ला - विजय कुमार सिन्हा।

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