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बनारसी पंचांग में 2018 में शादी की 69 और मिथिला पंचांग में 46 तिथियां

बनारसी के अनुसार सबसे अधिक शुभ मुहूर्त जुलाई में 15, मिथिला के मुताबिक फरवरी में 13

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 09:08 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रांची/समस्तीपुर. उम्मीदों से भरा आने वाला वर्ष 2018 कुछ हद तक आपके लिए खुशनुमा सौगात लेकर आ रहा है। विवाह लग्न की बात करें तो सबसे ज्यादा 69 शुभ मूहुर्त बनारसी पंचांग में है। सिर्फ जुलाई महीने में ही 15 लग्न की तिथियां हैं। उधर, मिथिला पंचांग में 2018 में कुल 46 लग्न की तिथियां हैं। जनवरी में दोनों पंचांगों में कोई लग्न मूहुर्त नहीं है वहीं फरवरी में बनारसी पंचांग में 14 और मिथिला पंचांग में 13 मूहुर्त शुभ माना गया है।

बनारसी पंचांग : 14 दिन फरवरी में लग्न मूहुर्त

जनवरी : कोई लग्न नहीं

फरवरी : कुल चौदह दिन: 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 18, 19, 20, 23, 24 आैर 28
मार्च : कुल आठ दिन: 3, 4, 5, 6, 7, 8, 10 और 12 मार्च
अप्रैल : कुल दस दिन: 18, 19, 20, 24, 25, 26, 27, 28, 29 और 30 अप्रैल
मई : कुल नौ दिन: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 11, 12 और 13 मई
जून :कुल ग्यारह दिन: 14, 18, 19, 20, 21, 23, 25, 27, 28, 29 और 30 जून
जुलाई : कुल पंद्रह दिन: 4, 5, 6, 9, 10, 11, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22 और 23 जुलाई
अगस्त : कोई लग्न नहीं
सितंबर : कोई लग्न नहीं
अक्टूबर - कोई लग्न नहीं
नवंबर - कोई लग्न नहीं
दिसंबर- कुल दो दिन: 9 और 15 दिसंबर

2018 का ग्रहण

माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 31.1.2018 : प्रारंभ-5:36, मोक्ष- 9:30 मिनट। चन्द्र ग्रहण। 13.7.2018- भारत मे सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा।
27.7.2018 चन्द्र ग्रहण- प्रारंभ-10:44 रात्री और मोक्ष - 3:58 रात्रि। 11.8.2018-सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

मिथिला पंचांग : मार्च में छह

जनवरी - कोई लग्न नहीं
फरवरी - कुल तेरह दिन: 1, 2, 4, 5, 7, 9, 11, 15, 16, 18, 19, 21 और 23 फरवरी
मार्च -कुल छह दिन: 2, 4, 5, 7, 9, और 12 मार्च
अप्रैल-कुल आठ दिन: 16, 19, 20 , 25, 26, 27, 29 और 30 अप्रैल
मई - कुल पांच दिन: 4, 6, 7, 11 और 13 मई
जून - कुल छह दिन: 18, 22, 25, 27, 28 और 29 जून
जुलाई -कुल पांच दिन: 1, 2, 4, 5 और 15 जुलाई
दिसंबर -कुल तीन दिन: 10, 12 और 13 दिसंबर

विवाह लग्न श्रेष्ठ एवं प्रकृति के अनुकूल होंगे

उत्तरा रोहिनी, स्वाति अनुराधा और रेवती विवाह में सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र माने जाते हैं, जो प्रकृति के संतुलन को स्थिरता प्रदान करते हैं। विवाह जीवन स्थिरता का ही प्रतीक है। इसलिए बनारसी और मिथिला पंचांग में विवाह लग्न की जो तिथियां हैं, वह इन्हीं नक्षत्रों के आधार पर चलेंगी। इन तिथियों पर होनेवाले विवाह लग्न प्रकृति के अनुकूल होंगे। -आचार्य पंडित श्याम सुंदर भारद्वाज

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