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चारा घोटाला : पुरुषों को 4-5 और महिलाओं को 3 साल की सजा, जज ने बताया कारण

जज ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रति नरमी बरतने के कारण भी बताए।

Danik Bhaskar | Jan 26, 2018, 09:16 AM IST

रांची. चारा घोटाले में चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी मामले में सीबीआई के स्पेशल जज एसएस प्रसाद ने बुधवार को 50 दोषियों को सजा सुनाई। इनमें से 46 पुरुषों को चार से पांच साल जबकि चार महिलाओं को तीन-तीन साल की सजा। दो महिलाओं को संदेह का लाभ देकर बरी भी कर दिया। जज ने अपने फैसले में महिलाओं के प्रति नरमी बरतने के कारण भी बताए। फ्रेंच लेखक साइमनडी डिबोरियर की पुस्तक ‘द सेकंड सेक्स’ का हवाला देते हुए लिखा-पुरुष खुद को सफलता के शिखर पर ले जाने के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं। महिलाएं सामाजिक दायित्व से हमेशा दबी रहती हैं। ऐसे में व्यापारिक गतिविधियां निभाना कतई संभव नहीं है। सुझाव भी दिया-महिलाओं को आंख, नाक और कान खुला रखने की जरूरत है।

जज ने अपने फैसले में क्या लिखा है?
- जज ने अपने फैसले में लिखा है- पूरा मामला देखने से लगता है कि उस समय पूरा सिस्टम घोटालेबाजों के लिए काम कर रहा था। एक अंग्रेजी मुहावरा “एक्सेसओरियम सिक्यूटर प्रिंसिपल’ का जिक्र करते हुए लिखा-अधीनस्थ कर्मचारी अपने शीर्ष पदाधिकारी की हर गतिविधियों का आंख मूंद कर अनुसरण कर रहा था। घोटाला ऊपर से नीचे तक एक लय में चल रहा था।

- चाईबासा के तत्कालीन डीसी सजल चक्रवर्ती, तत्कालीन पशुपालन सचिव महेश प्रसाद और तत्कालीन वित्त आयुक्त फूलचंद सिंह की कार्यशैली पर कहा कि इन लोगों ने बिहार बजट मैनुअल और बिहार वित्तीय नियमों का खुलकर उल्लंघन किया है।

- केंद्र और राज्य के बीच आईएएस कड़ी की भूमिका निभाता है। महान विचारक प्लूटो की पुस्तक ‘द रिपब्लिक’ में राजा अलेक्जेंडर को आदर्श के रूप में दर्शाया गया है। लेकिन वह कभी भी खुद को आदर्श साबित नहीं कर पाया। वहीं महान विचारक चाणक्य ने भी कहा था कि राजा कौटिल्य ने खुद को एक महान सचिव के रूप में साबित किया था। कौटिल्य की सफलता को देखते हुए ही भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था तैयार की गई है।

...और जज के गुण भी बताए

स्पेशल जज एसएस प्रसाद ने फैसले की कॉपी में जज के गुण भी बताए हैं। ब्रिटेन के महान राजनीतिक विचारक हेराल्ड लास्की की पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि इसमें जस्टिस होम्स को जजों का हॉलमार्क बताया गया है। अच्छा जज बनने के लिए होम्स के फैसले और उनकी दैनिक गतिविधियों का अनुसरण करना चाहिए। अच्छा जज वही हो सकता है जो अच्छा इंसान हो।

- जजों के पास जीवन और उनके काम का अनुभव होता है। वह अंतहीन परंपराओं की परख रखने के साथ गंभीर तर्कों को चुटकी में सुलझाने वाला व्यक्तित्व होता है। जज को भयमुक्त तो रहना ही चाहिए, साथ ही लोगों की इच्छाओं और उम्मीदों से खुद को दूर रखने वाला तपस्वी भी होना चाहिए।

- बारीक विवादों को पल भर में पकड़ने की क्षमता होनी चाहिए। ज्यूरिस्ट के साथ स्टेट्समैन, विचारक और एडवोकेट का गुण भी होना चाहिए। फैसलों में उनकी महानता झलकनी चाहिए।