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11 साल की लड़की को छोड़ पूरा परिवार ब्लाइंड, घर की सारी जिम्मेदारी बेटी पर

पांचवीं में पढ़ने वाली लड़की घर चलाने दुकान चलाने मजबूर।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 03:27 AM IST

बोकारो. जिस उम्र में 11 साल की सृष्टि को खेलना-कूदना चाहिए, वह चार लोगों का परिवार चलाती है। दरअसल उसके माता, पिता और छोटी बहन ब्लाइंड हैं। बोकारो शहर में सृष्टि का परिवार रहता है। वह सुबह-शाम दुकान चलाती है। इससे जो कमाई होती है परिवार उसी पर पलता है। दुकान से फुर्सत निकालकर वह स्कूल भी जाती है।

8 साल की उम्र से वह दुकान चला रही, अब गुजारा मुश्किल

सृष्टि ने बताया कि मोहल्ले में पहले सिर्फ उसकी ही दुकान थी। बोकारो की एक संस्था ने तीन साल पहले दुकान खोलने में मदद की थी। अभी भी संस्था के लोग सामान मुहैया करवाते हैं। आठ साल की उम्र से वह दुकान चला रही है। जो पैसे मिलते थे, उससे परिवार चल जाता था। अब मोहल्ले में कई दुकानें खुल गई हैं। ऐसे में गुजारा मुश्किल हो गया है।

घर में खाना पकाने से लेकर सामान लाने तक की जिम्मेदारी सृष्टि की

- सृष्टि कहती हैं कि दुकान से समय निकालकर वह पढ़ने जाती है। वह बोकारो के एक स्कूल में पांचवीं में पढ़ती है। उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च स्कूल के प्रिंसिपल ही उठा रहे हैं।

- घर में खाना पकाने से लेकर सामान लाने तक की जिम्मेदारी सृष्टि की है। माता-पिता और बहन को कहीं जाना होता है तो उन्हें सृष्टि ही लेकर जाती है। अस्पताल से लेकर हर जरूरत के लिए पूरा परिवार सृष्टि पर ही निर्भर है। - वह अपने पिता के लिए किसी इंस्टीट्यूट में चपरासी की नौकरी के लिए कलेक्टर समेत जिले के कई अधिकारियों से गुहार लगा चुकी है, लेकिन अब तक कहीं सुनवाई नहीं हुई।

कई अस्पतालों में इलाज करवा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

- सृष्टि के पिता मोहन चौरसिया बताते हैं कि वे जन्म से ही ब्लाइंड हैं। बचपन में ही उनके माता-पिता का स्वर्गवास हो गया। परिवारवालों ने उनकी परवरिश की। जब बड़े हुए तो परिजनों ने ब्लाइंड हेमंती से उनकी शादी करवाई। शादी के बाद दो बेटी हुईं- सृष्टि और दृष्टि। सिर्फ सृष्टि की ही आंखों में रोशनी है, बाकी कोई देख नहीं सकता।

- मोहन ने बताया कि बोकारो जनरल अस्पताल समेत राज्य के कई अस्पतालों में इलाज करवा चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। परिवारवालों के साथ कुछ सामाजिक संगठनों ने भी इन तीनों का इलाज अलीगढ़, पटना, नालंदा में करवाया पर सुधार नहीं हुआ।