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चारा घोटाले में सजा में रहम की अपील; जज बोले- बहादुरी का कोई सर्टिफिकेट मिला है तो दिखाएं

पूर्व विधायक आरके राणा के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट 72 साल के बुजुर्ग हैं, उन्हें डायबिटीज है।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 04:20 AM IST

रांची(झारखंड). देवघर ट्रेजरी से जुड़े चारा घोटाला के कांड संख्या आरसी 64(ए)96 में शुक्रवार को लालू प्रसाद सहित पांच अभियुक्तों की सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। कुल 16 में से अब तक 10 अभियुक्तों की सुनवाई पूरी कर ली गई है। शेष छह के मामले में शनिवार को सुनवाई होगी। इसके बाद सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह सजा का एेलान करेंगे। सभी अभियुक्तों के वकील ने अपने क्लाइंट के बीमार और बूढ़े होने की दलीलें देते हुए सजा में रहम की अपील की। पूर्व विधायक आरके राणा के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट 72 साल के बुजुर्ग हैं, उन्हें डायबिटीज है, घर में पत्नी के अलावा कोई नहीं है। इसपर कोर्ट ने कहा कि बहादुरी या वीरता का कोई पुरस्कार मिला हो, सर्टिफिकेट है, तो उसे जमा करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीमारी के आधार पर सजा कम करने की सभी अपील कर रहे हैं, लेकिन मेडिकल सर्टिफिकेट कोई नहीं दे रहा है। वकीलों ने कहा- हुजूर कल जमा कर देंगे। जज ने कहा रोज-रोज ऐसा होगा, तो सजा कब सुनाएंगे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारा से ई-कोर्ट में पेश हुए लालू

सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार से ई-कोर्ट में पेश किए गए। बहस शुरू होते ही लालू के वकील ने अपने क्लाइंट के वकील होने के दस्तावेज पेश किए। बताया कि लालू प्रसाद वर्ष 1999 में ही वकील होने का सर्टिफिकेट ले चुके हैं। कोर्ट ने उसे अभिलेख में रख लिया। इसके बाद वकील ने कहा कि लालू की सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को आधार मानते हुए कम से कम सजा की अपील की। यह भी कहा कि लालू को 2013 में चारा घोटाला के चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ की अवैध निकासी मामले आरसी 20(ए)96 में पांच साल की सजा मिली है। मौजूदा मामला देवघर ट्रेजरी से मात्र 89 लाख की अवैध निकासी का है। इसलिए इसी अनुपात में इन्हें कम सजा दी जानी चाहिए, यह एक साल या छह महीने हो सकता है।

पत्नी की बीमारी का भी हवाला दिया
अभियुक्त रविंद्र कुमार राणा के वकील ने कहा कि उनके क्लाइंट 72 साल के हैं, उन्हें रीढ़ की भी बीमारी है, पत्नी का घुटना ट्रांसप्लांट हुआ है। इसके बाद पूर्व आईएएस फूलचंद सिंह, राजाराम जोशी और महेश प्रसाद के वकील ने भी उनके बूढ़े होने और बीमारी से ग्रसित होने का हवाला दिया। महेश प्रसाद के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति दिखाते कहा कि ट्रायल कोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपी केएल बकोरिया को 4 साल की सजा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 1 साल कर दी। फैसले में इस आधार को भी ध्यान में रखा जाए।

सीबीआई की दलील...बिल्कुल स्वस्थ हैं लालू
सीबीआई के वकील राकेश प्रसाद ने कहा कि लालू बिल्कुल स्वस्थ हैं। हाल के दिनों में उन्होंने मजबूती से रैली का आयोजन किया था। उनकी दैनिक गतिविधियों और व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रम इसके गवाह हैं। जहां तक षड्यंत्र की बात है तो वह एक राज्य के मुखिया थे, जिन्हें जनता ने चुना था। लेकिन इन्होंने उस दौरान फर्जी आवंटन की जानकारी रहते हुए भी कोषागार से सरकारी राशि की खुली छूट दे रखी थी। लालू प्रसाद ने जिस बेदर्दी से सरकारी खजाने की लूट की है, उससे इन्हें भादवि की धारा 467 के तहत आजीवन कारावास या कम से कम 10 साल की सजा मिलनी चाहिए।