रांची

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नक्सली संगठनों की विज्ञप्ति के आधार पर CID ने 11 मृतकों को बताया नक्सली

मामले में अभी तक अकेले देवराज यादव, उर्फ अनुराग जी उर्फ डाक्टर की ही पहचान नक्सली के रूप में थी।

Danik Bhaskar

Jan 23, 2018, 08:11 AM IST

रांची. सीआईडी ने बकोरिया मुठभेड़ में मारे सभी 12 में से 11 के नक्सली होने का दावा किया है। 8 जून 2015 को हुए इस मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सीआईडी ने यह दावा किया। इसके लिए जांच एजेंसी ने नक्सली संगठन बिहार, झारखंड नॉर्थ छत्तीसगढ़ स्पेशल एरिया कमेटी और विजलेंस एण्ड रीजनल एण्ड जोनल कमेटी की विज्ञप्ति को आधार बताया। मामले में अभी तक अकेले देवराज यादव, उर्फ अनुराग जी उर्फ डाक्टर की ही पहचान नक्सली के रूप में थी। बाकी दस लोगों को लेकर सीआईडी खाक ही छान रही थी।


सीआईडी ने इसी आधार पर कोर्ट से सीबीआई जांच की मांग करनेवाली याचिका निरस्त करने की अपील की है। हालांकि सीआईडी के इस दावे में भी कई सवाल उठ रहे हैं, जिनपर जांच एजेंसी को आगे जवाब देना पड़ेगा।

चार बड़े सवाल जिनपर सीआईडी की रिपोर्ट मौन

1. जिस स्कॉर्पियों में नक्सली मारे गए उसमें खून के दाग क्यों नहीं मिले।

2. मारे गए लोगों में दो के अलावा किसी का भी क्रिमिनल रिकार्ड क्यों नहीं

3. फर्जी मुठभेड़ बतानेवाले जेजेएमपी उग्रवादी का बयान क्यों नहीं लिया।

4. डीआईजी और इंस्पेक्टर के बयान को क्यों गलत ठहराया गया।

याचिका में आरोप और सीआईडी का जवाब

आरोप : उदय यादव व रिश्तेदार नीरज यादव का नक्सलियों से कोई संबंध नहीं है।
सीआईडी :
बिहार, झारखंड नॉर्थ छत्तीसगढ़ स्पेशल एरिया कमेटी, विजलेंस एण्ड रीजनल एण्ड जोनल कमेटी की विज्ञप्ति ने इन लोगों को पीपुल लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी का सदस्य बताया है।
आरोप : फोटोग्राफ में सभी मारे गए लोग एक लाइन में लेटे कैसे दिख रहे हैं
सीआईडी :
यह फोटो मुठभेड़ के बाद तब ली गई होगी, जब सभी मृतकों को मजिस्ट्रेट इनक्वेस्ट के बाद एक लाइन में रखा गया था, मुठभेड़ में मारे गए लोगों की कई तस्वीरें पुलिस के पास भी हैं
आरोप : बरामद हथियार असली नहीं हैं
सीआईडी :
आठ हथियार बरामद किए गए। ये प्रोहिबिटेड बोर के रेग्युलर वेपन थे, आरएसएम और एफएसएल ने जांच के बाद इन्हें प्रभावकारी बताया, यह भी कहा है कि मुठभेड़ में इनका इस्तेमाल हुआ था।
आरोप : कुछ लोगों के इशारे पर मुठभेड़ की कार्रवाई हुई, थानेदार व डीआईजी को भी पता नहीं था।
सीआईडी :
मुठभेड़ की कार्रवाई आईबी रिपोर्ट पर हुई। ऑपरेशन में सीआरपीएफ, कोबरा, स्पेशल ब्रांच और स्टेट पुलिस शामिल थी, ऑपरेशन गोपनीय, अलग तरह का और उच्चस्तरीय था, नीड टू नो बेसिस पर केवल उन्हीं लोगों को जानकारी दी जा रही थी जो इससे जुड़े थे।

ऐसे चला था ऑपरेशन


25, 27 मई और तीन जून 2015 को आईबी ने 14 नक्सलियों के मोबाइल लोकेशन को लातेहार जिले के बार्डर पर ट्रैप किया। सूचना सीआरपीएफ को दी। सीआरपीएफ के कोबरा 209 के कमांडेंट ने टीम बनाकर ऑपरेशन शुरू किया। आठ जून की रात पलामू एसपी ने सतबरवा ओपी इनचार्ज को लातेहार पलामू हाइवे पर नक्सलियों के जाने की सूचना दी तथा कोबरा बटालियन को सहयोग करने का निर्देश दिया। मुठभेड़ के बाद देर रात एक बजे पलामू आईजी, एसपी, जोनल आईजी पलामू, कोबरा के सीओ एसपी लातेहार पहुंचे। मौके से बारह शव और आठ हथियार मिले। शवों की जांच में उसके हाथ में विस्फोटक के सुराग मिले थे। पोस्टमार्टम 10 जून को हुआ।

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