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सीएम भी कर चुके हैं इस ज्योर्तिलिंग की 7 बार पैदल यात्रा, पैर में पड़ जाते थे छाले

सीएम आवास में पुरानी बातों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने भास्कर से इस बात को साझा किया।

रजनीश कुमार | Last Modified - Feb 15, 2018, 07:22 AM IST

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    झारखंड के सीएम रघुवर दास। - फाइल।

    रांची. मुख्यमंत्री का पद संभालने से पहले रघुवर दास कांवर लेकर बाबाधाम जाते थे। भगवान शिव के प्रति आस्था इतनी अधिक कि सावन आते ही गेरुआ वस्त्र सिलवाते और कंधे पर कांवर लेकर दोस्तों के साथ देवघर के लिए निकल पड़ते। बुधवार को सीएम आवास में पुरानी बातों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने दैनिक भास्कर से इस बात को साझा किया।

    ट्रेन में पैर रखने की भी जगह नहीं मिल रही थी, धक्का खाते पहुंचे

    सीएम दास ने कहा कि हम पांच मित्रों की मंडली थी। इनके साथ सात साल सुल्तानगंज से कांवर लेकर बाबाधाम तक की पैदल यात्रा की। एक बार टूरिस्ट बस से काठमांडूृ के पशुपतिनाथ मंदिर भी गए। 12-15 साल पहले की बात है। वे लोग ट्रेन से जसीडीह गए। ट्रेन में भीड़ इतनी कि पैर रखने की भी जगह नहीं मिल रही थी। धक्का खाते जसीडीह पहुंचे, वहां से सुल्तानगंज गए, फिर कांवर लेकर बाबाधाम आए। इसके अगले साल ट्रक से और बाद के पांच साल टूरिस्ट बस से गए। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी देवघर में पूजा-अर्चना की, लेकिन अब वहां सुविधाएं काफी बढ़ गई हैं। शुरुआती दिनों में जब जाते थे, तो पैर में छाले पड़ जाते थे, लेकिन शिवभक्ति का आनंद ही कुछ और है। उन्होंने कहा कि देवघर में श्रद्धालुओं को और अधिक सुविधाएं मिले, इसके लिए राज्य सरकार हरसंभव उपाय करेगी।

    ज्योतिर्लिंग मुद्दे पर 23 को देवघर में जुटेंगे विद्वान,

    देवघर में ज्योतिर्लिंग मुद्दे पर 23 फरवरी को विद्वानों और पंडितों का जुटान होगा। सभी देवघर स्थित श्री बाबा वैद्यनाथ मंदिर के ही ज्योतिर्लिंग होने से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे। धर्मरक्षिणी महासभा के महामंत्री दुर्लभ मिश्रा ने कहा कि यह महासंयोग है कि महाशिवरात्रि के दिन ही बाबा वैद्यनाथ के ज्योतिर्लिंग होने के विवाद पर विराम लग गया है। शैव महोत्सव के बाद लोगों में ज्योतिर्लिंगों को लेकर जो भ्रम की स्थिति पैदा की गई थी, भास्कर ने पूरी पड़ताल और तथ्यों के साथ स्थापित कर दिया कि देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ मंदिर ही ज्योतिर्लिंग है।

    लिखित में लेंगे कि देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ मंदिर ही ज्योतिर्लिंग
    महामंत्री दुर्लभ मिश्रा ने कहा कि यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होगी। 23 फरवरी को देवघर में विद्वान व पंडित जुटेंगे। इसमें मंदिर से जुड़े सभी धार्मिक साक्ष्य और ऐतिहासिक तथ्य एकत्रित किए जाएंगे। इन सभी साक्ष्यों और तथ्यों को लेकर शंकराचार्य से मिलेंगे और उनसे लिखित में लेंगे कि देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ मंदिर ही ज्योतिर्लिंग है। शंकराचार्य द्वारा प्रमाण देने के बाद शैव महोत्सव के आयोजक मध्यप्रदेश शासन और महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति उज्जैन को साक्ष्य भेजकर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में संशोधित कर देवघर स्थित वैद्यनाथ मंदिर को शामिल करने की मांग की जाएगी। महाकालेश्वर मंदिर परिसर स्थित शिलालेख और श्लोक में भी सुधार करवाया जाएगा।

    चक्रधरपुर में शंकराचार्य का अनुष्ठान

    ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने भास्कर में प्रकाशित देवघर की रिपोर्ट पढ़ने के बाद कहा कि भास्कर ने तथ्यों के साथ देवघर के श्री वैद्यनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग होने की बात रखी है। जो सच है, उस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। वे चक्रधरपुर के पास स्थित विश्व कल्याण आश्रम में धार्मिक अनुष्ठान में आए हैं।

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    झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम में भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नौवां ज्योतिर्लिग है।
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