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लालू के अलावा इस शख्स पर थी सभी की निगाहें, ऐसा था घोटाले के आरोपियाें का हाल

21 साल तक चली लंबी सुनवाई में 14 आरोपियों की मौत, एक अभी तक फरार

Bhaskar News | Last Modified - Jan 25, 2018, 04:04 AM IST

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    झारखंड के पूर्व चीफ सेक्रेटरी सजल चक्रवर्ती को सिक्युरिटी गार्ड्स का ही सहारा।

    रांची. चारा घोटाला से संबंधित चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र को अदालत ने पांच साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर दस-दस लाख का जुर्माना भी लगाया है, लेकिन खचाखच भरे कोर्ट परिसर में सभी की निगाहें दो शख्सियतों पर थी, बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती। बीमार चल रहे सजल चक्रवर्ती काफी परेशान नजर आ रहे थे। वे कभी सीढ़ियों पर बैठ जाते तो, कभी किसी का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते। जब उन्हें सजा सुनाई गई उसके बाद सीढ़ी पर बैठ गए। सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर उन्हें उठाया। इसके बाद वे बाहर फाइलिंग सेंटर के पास नीचे बैठ गए।

    ऐसा था लालू का भी हाल

    - चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 68(ए)96 में सजा सुनाए जाने के बाद लालू प्रसाद सीढ़ियों से नीचे उतरे और कैदी वाहन की ओर बढ़ने लगे। अगल-बगल सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों की भारी भीड़। लालू ने किसी से बातचीत नहीं की। सुरक्षाकर्मी उन्हें भीड़ से बचाते आगे ले जाने लगे। इससे पहले करीब वे करीब साढ़े तीन घंटे कोर्ट में रहे। मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज ने इन्हें सुबह 11 बजे दोषी ठहराया और दोपहर दो बजे लालू सहित सभी अभियुक्तों को सजा सुना दी। इस दरम्यान राजद की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी उनके बगल में बैठी थीं। दोषी ठहराए जाने के बाद लालू नीचे आए और चाय की चुस्की ली। उस दरम्यान कई लोगों ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी के सवाल का जवाब नहीं दिया।

    76 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट

    8 जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश 11 मार्च 1996 को दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के इस आदेश पर 19 मार्च 1996 को अपनी मुहर लगा दी थी। तब जाकर सीबीआई ने 28 अगस्त 1996 को चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी को लेकर वर्तमान मुकदमा आरसी-68ए96 दर्ज की गई थी। उस दौरान कुल 76 आरोपियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में सीबीआई ने जांच की कार्रवाई पूरी कर कुल 76 आरोपियों के खिलाफ 12 दिसंबर 2001 को अदालत में साक्ष्य के साथ चार्जशीट दाखिल की गई।

    क्या लिखा था चार्जशीट में?

    चार्जशीट में सीबीआई ने पुष्टि की। 1992-93 की अवधि में चाईबासा कोषागार से 67 फर्जी आवंटन पत्र के आधार पर चाईबासा के तत्कालीन जिला पशुपालन पदाधिकारी, डॉ पांडेय, सीपी शर्मा ने अन्य पशुपालन पदाधिकारियों से साठगांठ करके आपूर्तिकर्ता आरोपियों ने 37 करोड़ 62 लाख 79 हजार आठ सौ तेरासी रुपए की अवैध निकासी कर लिया।

    21 साल तक चली लंबी सुनवाई में 14 आरोपियों की मौत, एक अभी तक फरार

    यह भी साक्ष्य में आया कि चाईबासा और सरायकेला जिला में पशुओं के देखरेख के लिए चारा, दवा और संबंधित उपकरणों की ना तो खरीद की गई और ना ही आपूर्ति की गई। इसी मामले में कोर्ट ने 50 आरोपियों को दोषी पाकर सजा सुनाई। जबकि, मामले से जुड़े 14 अन्य आरोपी सुनवाई के दौरान गुजर गए।

    इसमें चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, भोला राम तुफानी, डॉ रामराज राम, के अरूमुगम, डाॅ श्याम बिहारी सिन्हा, ब्रज भूषण प्रसाद, डॉ पांडेय सीपी शर्मा, डॉ दूबराज दोरेय, डॉ जीपी त्रिपाठी, चंद्रशेखर दुबे, डॉ रंजीत कुमार मिश्रा, एसएन सिन्हा, शकुंतला सिन्हा और राजो सिंह शामिल है। मामले के एक अन्य आरोपी फुल सिंह अभी तक फरार है। सीबीआई की टीम गिरफ्तार नहीं कर सकी। मामले दो अन्य आरोपी सुशील कुमार झा और प्रमोद कुमार जायसवाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

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    फैसला सुनाए जाने से पहले लालू प्रसाद कोर्ट के बाहर चाय पीते हुए।
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    विजय मल्लिक(लाल घेरे में) : चारा घोटाला के सजायाफ्ता विजय कुमार मल्लिक आपूर्तिकर्ता थे। इनकी फर्म दिल्ली की मल्लिक इंटरप्राइजेज ने 32 हजार 920 क्विंटल बादाम खल्ली की आपूर्ति दिखाकर एक करोड़ 19 लाख 71 हजार रुपए फर्जी तरीके से लिया। यह पैसा उन्होंने नई दिल्ली स्थित रौशन आरा रोड पंजाब नेशनल बैंक के खाते से निकाला।
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    दयानंद कश्यप रांची के अशोक नगर में रहने वाले चारा आपूर्तिकर्ता दयानंद प्रसाद कश्यप मेसर्स वैष्णव इंटरप्राइजेज के मालिक हैं। उन्होंने अपने फर्म के माध्यम से 21 हजार 453 क्विंटल का मिनरल मिक्सचर की आपूर्ति दिखाकर एक करोड़ 19 लाख का फर्जी भुगतान लिया।
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    पूर्व विधायक आरके राणा वेटनरी डॉक्टर के साथ-साथ बिहार वेटनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे। ये राजनीतिज्ञों को श्याम बिहारी सिन्हा द्वारा दी जाने वाली हवाई टिकट, होटल खर्च आदि की सुविधा मुहैया कराते थे। जज ने फैसले में एक गवाह के हवाले से लिखा कि श्याम बिहारी आरके राणा के जरिए ही लालू को घूस देते थे।
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    त्रिपुरारी मोहन प्रसाद : बिहार सर्जिको मेडिको एजेंसी के संचालक हैं। इसके अलावा मानस सेल्स कारपोरेशन पटना के पार्टनर भी हैं। इन पर 94 लाख 24 हजार रुपए की राशि फर्जी दवा की आपूर्ति कर लेने का आरोप था। उन्होंने पीली मकई की आपूर्ति दिखाकर भी दो करोड़ 26 लाख का भुगतान लिया।
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    केएन झा(लाठी के साथ) 1992-93 में पशुपालन विभाग के क्षेत्रीय निदेशक और विभाग के ओवरऑल इंचार्ज भी थे। आपूर्तिकर्ताओं को सप्लाई आर्डर देना और प्रशासनिक नियंत्रण इनके जिम्मे था। इन्होंने करोड़ों की फर्जी आपूर्ति आदेश जारी किया।
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    मंगलवार को मामले में आरोपियों से कोर्ट कैम्पस और पार्किंग तक फुल हो गई थी।
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