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लालू के अलावा इस शख्स पर थी सभी की निगाहें, ऐसा था घोटाले के आरोपियाें का हाल

21 साल तक चली लंबी सुनवाई में 14 आरोपियों की मौत, एक अभी तक फरार

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2018, 01:46 AM IST
झारखंड के पूर्व चीफ सेक्रेटरी झारखंड के पूर्व चीफ सेक्रेटरी

रांची. चारा घोटाला से संबंधित चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र को अदालत ने पांच साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर दस-दस लाख का जुर्माना भी लगाया है, लेकिन खचाखच भरे कोर्ट परिसर में सभी की निगाहें दो शख्सियतों पर थी, बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती। बीमार चल रहे सजल चक्रवर्ती काफी परेशान नजर आ रहे थे। वे कभी सीढ़ियों पर बैठ जाते तो, कभी किसी का सहारा लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते। जब उन्हें सजा सुनाई गई उसके बाद सीढ़ी पर बैठ गए। सुरक्षाकर्मियों ने मिलकर उन्हें उठाया। इसके बाद वे बाहर फाइलिंग सेंटर के पास नीचे बैठ गए।

ऐसा था लालू का भी हाल

- चारा घोटाले के कांड संख्या आरसी 68(ए)96 में सजा सुनाए जाने के बाद लालू प्रसाद सीढ़ियों से नीचे उतरे और कैदी वाहन की ओर बढ़ने लगे। अगल-बगल सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों की भारी भीड़। लालू ने किसी से बातचीत नहीं की। सुरक्षाकर्मी उन्हें भीड़ से बचाते आगे ले जाने लगे। इससे पहले करीब वे करीब साढ़े तीन घंटे कोर्ट में रहे। मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज ने इन्हें सुबह 11 बजे दोषी ठहराया और दोपहर दो बजे लालू सहित सभी अभियुक्तों को सजा सुना दी। इस दरम्यान राजद की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी उनके बगल में बैठी थीं। दोषी ठहराए जाने के बाद लालू नीचे आए और चाय की चुस्की ली। उस दरम्यान कई लोगों ने उनसे बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी के सवाल का जवाब नहीं दिया।

76 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई थी चार्जशीट

8 जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद पटना हाईकोर्ट ने चारा घोटाले से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश 11 मार्च 1996 को दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के इस आदेश पर 19 मार्च 1996 को अपनी मुहर लगा दी थी। तब जाकर सीबीआई ने 28 अगस्त 1996 को चाईबासा कोषागार से अवैध निकासी को लेकर वर्तमान मुकदमा आरसी-68ए96 दर्ज की गई थी। उस दौरान कुल 76 आरोपियों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में सीबीआई ने जांच की कार्रवाई पूरी कर कुल 76 आरोपियों के खिलाफ 12 दिसंबर 2001 को अदालत में साक्ष्य के साथ चार्जशीट दाखिल की गई।

क्या लिखा था चार्जशीट में?

चार्जशीट में सीबीआई ने पुष्टि की। 1992-93 की अवधि में चाईबासा कोषागार से 67 फर्जी आवंटन पत्र के आधार पर चाईबासा के तत्कालीन जिला पशुपालन पदाधिकारी, डॉ पांडेय, सीपी शर्मा ने अन्य पशुपालन पदाधिकारियों से साठगांठ करके आपूर्तिकर्ता आरोपियों ने 37 करोड़ 62 लाख 79 हजार आठ सौ तेरासी रुपए की अवैध निकासी कर लिया।

21 साल तक चली लंबी सुनवाई में 14 आरोपियों की मौत, एक अभी तक फरार

यह भी साक्ष्य में आया कि चाईबासा और सरायकेला जिला में पशुओं के देखरेख के लिए चारा, दवा और संबंधित उपकरणों की ना तो खरीद की गई और ना ही आपूर्ति की गई। इसी मामले में कोर्ट ने 50 आरोपियों को दोषी पाकर सजा सुनाई। जबकि, मामले से जुड़े 14 अन्य आरोपी सुनवाई के दौरान गुजर गए।

इसमें चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, भोला राम तुफानी, डॉ रामराज राम, के अरूमुगम, डाॅ श्याम बिहारी सिन्हा, ब्रज भूषण प्रसाद, डॉ पांडेय सीपी शर्मा, डॉ दूबराज दोरेय, डॉ जीपी त्रिपाठी, चंद्रशेखर दुबे, डॉ रंजीत कुमार मिश्रा, एसएन सिन्हा, शकुंतला सिन्हा और राजो सिंह शामिल है। मामले के एक अन्य आरोपी फुल सिंह अभी तक फरार है। सीबीआई की टीम गिरफ्तार नहीं कर सकी। मामले दो अन्य आरोपी सुशील कुमार झा और प्रमोद कुमार जायसवाल ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

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