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150 सालों से जंजीरों में बंधे हैं भगवान, चप्पल पहनकर घुसने पर लकड़ी से होती थी पिटाई

लक्कड़ बाबा के नाम से जानते हैं लोग, इसी रूप में करते हैं पूजा, मांगते हैं मन्नत

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 03:09 AM IST
कोयल नदी के तट पर 18वीं सदी में नरसिंह बाबा ने प्राण-प्रतिष्ठा कर लक्कड़ बाबा की स्थापना की थी कोयल नदी के तट पर 18वीं सदी में नरसिंह बाबा ने प्राण-प्रतिष्ठा कर लक्कड़ बाबा की स्थापना की थी

मनोहरपुर(रांची). मनोहरपुर में कोयल नदी के तट पर अवस्थित नरसिंह आश्रम के मुख्य द्वार पर विगत 150 से ज्यादा सालों से लकड़ी के तने के आकार के रूप में स्थापित एक भगवान जंजीरों में बंधे हुए हैं। लोग इसी रूप में उनकी पूजा भी करते हैं। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगनेवालों की मुरादें अवश्य पूरी होती हैं। स्थानीय लोग इन्हें लक्कड़ बाबा के नाम से तब से जानते व मानते आ रहे हैं। इन्हें नरसिंह बाबा ने ही स्थापित किया था। नरसिंह आश्रम के पुजारी श्रीकृष्ण शुक्ल उर्फ भैया महाराज के अनुसार 1850 के दशक में इन्हें नरसिंह बाबा ने स्थापित किया था।ये है इसके पीछे की कहानी...

- इसके पीछे की कहानी व मान्यता के अनुसार एक बार बरसात के दिनों में नरसिंह बाबा कोयल नदी के तट पर स्नान करने गए थे। तब उन्होंने एक हरे पेड़ को बहते पाया।

- उन्होंने उस पेड़ को नदी से निकालकर आश्रम ले आए और उन्हें प्राण-प्रतिष्ठा कर आश्रम के मुख्य द्वार पर स्थापित कर दिया।

- लक्कड़ बाबा को नरसिंह बाबा ने वहां दरबान के रूप में स्थापित किया। ताकि वे आश्रम आने-जानेवाले लोगों पर नजर रख सकें।

- कहा जाता है कि उस वक़्त जो भी जूते-चप्पल पहनकर आश्रम में प्रवेश करता था, उसे डंडा फेंक कर लक्कड़ बाबा दंडित किया करते थे।

- यह डंडा आज भी लक्कड़ बाबा की पीठ पर बंधा हुआ है। बहरहाल लक्कड़ बाबा की लकड़ी की प्रजाति का भी आज तक पता न चल पाया है।

क्यों बंधे जंजीरों से भगवान

- पुजारी के अनुसार लक्कड़ बाबा उस जमाने में आश्रम परिसर के अलावा पूरे मनोहरपुर का भ्रमण करते थे। यहां के लोग अपने पूर्वजों के हवाले से बताते हैं कि उन्हें मनोहरपुर में भ्रमण करते उनके पूर्वजों ने देखा भी था। परन्तु लक्कड़ बाबा के रूप को देख लोग भयभीत हो जाते थे।

- यह जानकर नरसिंह बाबा ने उन्हें जंजीरों से बांधकर द्वार पर पुनर्स्थापित कर दिया। परन्तु नरसिंह बाबा के साल 1942 में समाधि लेने के बाद लक्कड़ बाबा का भी ईश्वरीय प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया लेकिन उन्हें मानने वालों में लक्कड़ बाबा की आस्था कभी कम नहीं हुई है।

कौन थे नरसिंह बाबा

- स्थानीय लोगों के अनुसार, नरसिंह बाबा एक प्रखर योगी और स्वतंत्रता सेनानी थे।

- 1857 कि सिपाही विद्रोह के दौरान वे 24 साल की अवस्था में अमृतसर से मनोहरपुर आए और यहां पुराना मनोहरपुर राज परिवार के द्वारा करीबन 8 -10 एकड़ दान में दी गई जमीन पर आश्रम की स्थापना की।

- वे काफी चमत्कारी भी थे और उनके चमत्कार की कहानियां आज भी लोगों को बखूबी याद है।

- कहा जाता है आश्रम परिसर में उन्होंने कई तरह के फलदार, फूलदार व मसालों के पेड़ लगाए थे। लेकिन बाबा के बाद धीरे-धीरे वे पेड़ भी अब नहीं रहे।

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कोयल नदी के तट पर 18वीं सदी में नरसिंह बाबा ने प्राण-प्रतिष्ठा कर लक्कड़ बाबा की स्थापना की थीकोयल नदी के तट पर 18वीं सदी में नरसिंह बाबा ने प्राण-प्रतिष्ठा कर लक्कड़ बाबा की स्थापना की थी
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