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पत्नी का गला काट पति ने धड़ अौर सिर दीवान में छुपाया, उसी पर सोया पूरी रात

हत्यारे पति ने पत्नी को पीछे से पकड़कर एक हाथ से मुंह बंद किया और दूसरे हाथ से गला काट दिया।

Danik Bhaskar | Feb 18, 2018, 04:51 AM IST

हजारीबाग. चर्चा में रहे अनु पाठक हत्याकांड में हत्यारे पति विनोद पाठक ने गिरफ्तारी के बाद कई अहम खुलासे किए हैं। आरोपी ने पुलिस को बताया कि इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर से उसका 2013 से अफेयर चल रहा है। 2 साल पहले इसकी जानकारी बेटी और पत्नी को हो गई। तबसे पत्नी से वह टार्चर हो रहा था। अाखिर में उसने पत्नी की हत्या का मन बना लिया और प्लान तरीके से 29 जनवरी को बड़ी बेदर्दी से वारदात को अंजाम दे दिया।

अनु ने मंजु से कहा था- विनोद को तुम रख लो मुझे और मेरे बच्चों को बक्श दो

विनोद पाठक के मुताबिक, 20 जनवरी को ही अनु पाठक को मारकर लाश को ठिकाने लगाने का मन बना लिया था। इसके लिए उसने 26 जनवरी को पूरी तैयारी कर ली। विनोद ने हत्या के लिए हार्डवेयर शॉप से डायगर खरीदा और फुटपाथ से काले रंग की प्लास्टिक बैग और रस्सी खरीदी थी। यहां तक की घर के सभी तालों के दो चाबी थे इसलिए उसने नया ताला भी खरीदा।

28 जनवरी को मंजू ठाकुर को लेकर दोनों में जमकर विवाद हुआ। 29 को विनोद 10:15 मिनट पर ऑफिस में हाजिरी लगाकर फिर वापस घर आ गया और अनु के साथ जमकर पिटाई की। इसके बाद करीब 12 बजे अनु ने फोन कर मंजु से कहा कि विनोद को तुम रख लो मुझे कोई दिक्कत नहीं, लेकिन मुझे और मेरे बच्चों को बक्श दो।

एक हाथ से मुंह बंद किया और दूसरे हाथ से गला काट दिया

12:15 पर विनोद ने अनु को पीछे से पकड़कर एक हाथ से मुंह बंद किया और दूसरे हाथ से गला काट दिया। मंजु ठाकुर को फोनकर उसने बताया कि मैंने अनु को मार दिया है। फिर कमरा बंदकर सबूत मिटाने में जुट गया। इस काम में उसे ढाई घंटे से ज्यादा लगे। सिर और धड़ को प्लास्टिक बैग में पैक कर दीवान के बाॅक्स में डालने में 3 बज गए। फिर कमरे में नया ताला लगाकर दोबारा ऑफिस चला गया।

उसी दीवान पर वह सोया, जिसमें अनु की लाश छुपा रखी थी

शाम को घर आने पर बड़ी बेटी कृति के सवालों से घिर गया। गुस्से में उसकी भी हत्या का मन बना लिया और हमला भी कर दिया, जिसे पड़ोसियों ने बचा लिया। इस दौरान गुनाह से बचने के मुद्दे पर लगातार मंजू ठाकुर और विनोद पाठक में बातें होती रही। रात में उसी दीवान पर वह सोया, जिसमें अनु की लाश छुपा रखी थी।

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वीडियो: रविंद्र प्रताप सिंह।

बचने बना रखा था पूरा प्लान, बेटी ने सारा खेल बिगाड़ दिया  

 

विनोद का प्लान था कि सुबह थाना में पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाने के बाद वह लाश को ठिकाना लगा देगा। 30 जनवरी को सुबह वह कमरा बंदकर पुलिस थाना पहुंचा, जहां पत्नी के लापता होने की सूचना दी। वहीं पीछे से इंस्पेक्टर मंजू ठाकुर भी पहुंची और टीओपी इंचार्ज से पैरवी की कि इनकी(विनोद) पत्नी भाग गई है जरा देख लीजिएगा। इसी दौरान विनोद की बेटी कृति ने पुलिस थाने में फोन कर दिया। बेटी और टीओपी इंचार्ज में बात होते देख विनोद समझ गया कि गड़बड़ है और वह थाना से बाहर निकल गया।

 

कई जगहों पर छुपता फिर रहा था विनोद

 

बाहर मौजूद मंजू ठाकुर उसे लेकर सीएमपीडीआई(जहां विनोद काम करता है) के सिक्युरिटी सुपरवाइजर के घर पहुंची। शाम 5 बजे  तक वहीं रहा। वहां से भागकर वह डोभी और वहां से बस पकड़कर गया पहुंचा। गया में रात में ही रात बिताने के बाद 31 जनवरी को ट्रेन से इटावा(यूपी) पहुंचा। जहां पर अपने घर पर ठहरा। 1 फरवरी को इटावा में एक जानने वाले के यहां ठहरा। फिर वहां से जोधपुर चला गया। जोधपुर से आगरा चला गया। आगरा से वृंदावन गया। ज्यादातर समय वृंदावन में गुजारा। वृंदावन से दोबारा आगरा लौट आया। जब परिवार पर पुलिस के बढ़ते दबाव की जानकारी मिली तो किसी के जरिए परिवार से कई बार बात की। 15 फरवरी को विनोद पाठक के कानपुर पहुंचने की जानकारी हजारीबाग पुलिस को मिली। पुलिस टीम उसके हजारीबाग पहुंचने की इंतजार में थी। वह जैसे ही कोडरमा स्टेशन पर उतरा, उसे गिरफ्तार कर लिया गया।  

 

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पत्नी के हत्यारे को है अब है पश्चाताप

 

हत्यारा विनोद पाठक जब पुलिस गिरफ्त में आया तो उसके दाढ़ी बढ़े हुए थे। उसने कहा कि पत्नी अनु की हत्या करने का अब उसे पश्चाताप है। मुझे उसे डायवोर्स दे देना चाहिए था। अब मेरी नौकरी भी गई, पत्नी भी गई, बच्चे भी गए और मुझे भी सजा होना तय है।  अब तक के खुलासे में इस हत्याकांड में इंस्पेक्टर मंजु ठाकुर की लगातार कहीं-न-कहीं हाथ की बात सामने आ रही है। मामले में वह पहले से ही जेल में है।