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जज ने कविता से समझाई चारा घोटाले की कहानी, लालू को भेजी थी 1 करोड़ की घूस

लालू को चारा घोटाले के तीसरे मामले में सजा, पहली बार सीधे घूस लेने की बात सामने आई फैसले में।

Danik Bhaskar | Jan 25, 2018, 02:49 AM IST

रांची. चारा घोटाला से संबंधित चाईबासा कोषागार (आरसी 68 ए/96) से अवैध निकासी के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और डॉ. जगन्नाथ मिश्र को अदालत ने पांच साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर दस-दस लाख का जुर्माना भी लगाया है। लालू पर फैसले में रांची की सीबीआई कोर्ट के जज एसएस प्रसाद नेे सरकारी गवाह दीपेश चांडक के उस बयान को प्रमुखता दी, जिसमें उसने पहली बार स्पष्ट कहा है कि तत्कालीन विधायक आरके राणा के माध्यम से बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद घूस की रकम लेते थे। चांडक ने अपनी गवाही के पारा-94 में स्पष्ट कहा है कि तत्कालीन सीएम लालू प्रसाद को आरके राणा के माध्यम से एक करोड़ रुपए घूस में डॉ. श्याम बिहारी प्रसाद ने भेजा था।

56 आरोपियों में से 50 को सजा, 6 बरी

- मामले में सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता और पीसी एक्ट के तहत दोषी पाया गया है। दोनों में एक समान सजा दी गई है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर एक साल अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और पूर्व मंत्री आरके राणा को भी पांच-पांच साल के कारावास और दस-दस लाख के जुर्माने की सजा दी है।

- जज ने बुधवार को अपने 326 पेज के फैसले में इस मामले के 50 अन्य आरोपियों को भी दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जबकि छह आरोपियों को मामले से बरी कर दिया गया। अदालत ने सुबह 11.30 बजे फैसला सुनाया। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई की। दोपहर बाद सजा भी सुना दी। मामले में सीबीआई ने तीन आरोपी आपूर्तिकर्ताओं दीपेश चांडक, आरके दास और शैलेश प्रसाद सिंह को सरकारी गवाह बनाया था।

2 करोड़ 48 लाख सरकारी खजाने में भेजने का निर्देश

मामले में शामिल तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा से जब्त दो करोड़ 48 लाख रुपए को सरकारी खजाने में भेजने का निर्देश सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने कहा है कि उक्त राशि की दावेदारी के लिए श्याम बिहारी सिन्हा की ओर से कोई नहीं आया। ऐसी परिस्थिति में वह राशि राज्य सरकार के खजाने में भेज दी जाए।

दो नेता, जिन्हें तीन साल की सजा मिली, उन्हें जमानत

अदालत ने 56 आरोपियों में से 50 को साजिश रचने, धोखाधड़ी करने, फर्जी आवंटन व फर्जी बिल तैयार करने, सरकारी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करने और भ्रष्टाचार करने का दोषी माना है। दो नेताओं ध्रुव भगत और विद्यासागर निषाद को भी कोर्ट ने तीन-तीन साल सश्रम कारावास की सजा दी है। उन्हें 20-20 हजार के दो मुचलके पर जमानत दे दी गई है।

पेश न हुए जगन्नाथ िमश्र, गिरफ्तारी वारंट जारी
चाईबासा कोषागार से जुड़े मामले में बुधवार को फैसले का दिन था। कोर्ट में मामले के दो आरोपी बिहार के पूर्व सीएम डॉ. जगन्नाथ मिश्र और डॉ. बीएन शर्मा कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। कोर्ट ने इन दोनों को भी दोषी पाकर पांच-पांच साल की सश्रम कारावास की सजा दी है। अनुपस्थित रहने की वजह से कोर्ट ने दोनों की जमानत सुविधा को रद्द कर दिया है। साथ ही दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है।