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देश के 7 स्कैंडल, कहीं दूध तो कहीं कबाड़ बेचने वाला निकला दोषी

लालू यादव को फॉडर स्कैम के तीसरे केस में 5 साल की जेल हुई।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 06:50 PM IST

रांची. दूध बेचने से लेकर बिहार के सीएम पद तक का सफर तय करने वाले लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के तीसरे केस में भी दोषी साबित हुए। उन्हें बुधवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जज एसएस प्रसाद ने चाईबासा ट्रेजरी से अवैध तरीके से निकाले गए 33.67 करोड़ रुपए मामले में 5 साल जेल की सजा सुनाई। इस स्कैम में 950 करोड़ रुपए का घपला हुआ था। यह तो सिर्फ एक छोटा सा उदाहरण था, इंडिया में इससे भी बड़े स्कैम-घोटाले हुए, जिन्होंने देश को शर्मिंदा किया। DainikBhaskar.com कुछ ऐसे ही घोटाले अपने रीडर्स को बता रहा है।

क्या था चारा घोटाला

- 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाला में बिहार सरकार के खजाने से गलत ढंग से पैसे निकाले गए थे।
- कई वर्षों में ये पैसे पशुपालन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ निकाले थे।
- मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर 950 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा। हालांकि कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घोटाला कितने का है, क्योंकि इन वर्षों में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुई।
- चारा घोटाले का खुलासा 1994 में हुआ था तब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था।
- बिहार पुलिस ने 1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई कोषागारों से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए की अवैध निकासी के मामले दर्ज किए थे।
- सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई सौ कर्मचारी गिरफ्तार किए गए थे। कई ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में लिया गया और दर्जन भर केस दर्ज किए गए।
- विपक्षी दलों की मांग पर घोटाले की जांच सीबीआई से कराई गई। सीबीआई ने कहा था कि चारा घोटाले में शामिल सभी बड़े अभियुक्तों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं से हैं और काली कमाई का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया।
- पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने चारे, पशुओं की दवा आदि की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फर्जी बिल कोषागारों से वर्षों तक नियमित रूप से भुनाए। सीबीआई के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री (लालू यादव) को न सिर्फ इस मामले की जानकारी थी बल्कि उन्होंने कई मौकों पर वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में इन निकासियों की अनुमति दी थी।
- लालू के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और वे कई महीनों तक जेल में रहे।

कबाड़ बेचने वाले ने किया था खरबों का स्कैम

 

- पुणे के फार्म हाउस ओनर हस्सन अली खान साल 2011 में देश के सबसे बड़े टैक्स डिफॉल्टर के रूप में सामने आए। सरकारी कागजों में उन्होंने खुद का प्रोफेशन कबाड़ बेचने वाले का दिया था। उन पर 50 हजार करोड़ रुपए का टैक्स बकाया था।
- मुंबई के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उन्हें 50 हजार करोड़ का नोटिस भेजा था, जिसमें स्विस बैंक (यूबीएस एजी ज्यूरिख) में रखे धन की डीटेल्स मांगी गई थीं।
- इस स्कैम के बाद ही देश में एंटी-करप्शन मूवमेंट की शुरुआत हुई थी।
- हसन अली और उसकी वाइफ राइमा को 39,120 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग करने के लिए जेल भेजा गया। प्रेजेंट में वे जेल में ही हैं।

CWG स्कैम

 

- 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भी करोड़ों का घोटाला सामने आया। इस केस के मुख्य आरोपी बने गेम्स ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के चेयरमैन सुरेश कलमाड़ी।

- स्कैम के तहत कलमाड़ी पर गेम्स के दौरान चाइल्ड लेबर, सेक्स स्लेवरी, रेसिज्म और फाइनेंशियल घपलों के आरोप लगे।
- कलमाड़ी को क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी और चीटिंग के चार्जेस के साथ अरेस्ट किया गया था।

स्कॉर्पीन सबमरीन स्कैम

 

 

- साल 2005 में सामने आए इस हाई प्रोफाइल स्कैम में इंडियन नेवी पर भी धांधली के आरोप लगे थे।
- स्कैंडल में सीक्रेट नेवी डॉक्यूमेंट्स स्कॉर्पीन सबमरीन बनाने वाली कंपनी को बेचे गए थे।
- भारतीय सरकार ने एक फ्रेंच कंपनी के साथ ऑन-पेपर्स 19 हजार करोड़ की सबमरीन डील पक्की की थी। आरोपों के मुताबिक आर्म्स डीलर बिजनेसमैन अभिषेक वर्मा को कई करोड़ दिए गए थे।
- साल 2008 में सीबीआई ने पूरे स्कैम में इनवॉल्व्ड लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। बिजनेसमैन अभिषेक वर्मा ने तात्कालीन डिप्टी पीएम एलके आडवाणी पर क्रिमिनल डिफेमेशन का केस दायर किया था, जो कि 2016 में आपसी समझौते के बाद खत्म हुआ।

स्टाम्प पेपर स्कैम

 

- फल-सब्जी के व्यापारी अब्दुल करीम तेलगी ने फेक स्टाम्प पेपर छपवाकर करोड़ों का घोटाला किया था।

- इसकी शुरुआत फर्जी पासपोर्ट बनाने से हुई थी। उसमें माहिर होने के बाद तेलगी ने फेक स्टाम्प पेपर बैंक, इंश्योरेंस कंपनी, शेयर ब्रोकिंग फर्म को सप्लाई करना शुरू किया।
- इस घपले में तेलगी के साथ ही कई पुलिस अफसर और सरकारी बाबू शामिल थे। जांच के दौरान एक पुलिस वाला ऐसा भी मिला जिसकी सैलरी तो 9 हजार रु. महीना थी, लेकिन उसकी संपत्ति 100 करोड़ रुपए की थी।

बोफोर्स स्कैम

 

- 1980-90 के दशक के इस स्कैम में राजीव गांधी और एसके भटनागर जैसे दिग्गज नेताओं से लेकर विन चड्ढा और हिंदूजा फैमिली जैसे हाई प्रोफाइल नाम सामने आए थे।

- आरोपों के मुताबिक तात्कालीन भारतीय सरकार और स्वीडन की हथियार बनाने वाली कंपनी बोफोर्स के बीच 410 150mm हॉविट्जर फील्ड गन सप्लाई करने की डील हुई थी। 
- डील के एक साल बाद स्वीडिश रेडियो ने इस डील के लिए अधिकारियों को घूस देने के संगीन आरोप लगाए थे।
- इस पूरी डील में इटालियन बिजनेसमैन ओटावियो क्वात्रोची का नाम सामने आया था। 

माइनिंग स्कैम 

 

 

- ओडिशा में हुए इस स्कैम में नवीन पटनायक की सरकार पर अवैध खनन करने वाले बिजनेसमैन का साथ देने के संगीन आरोप लगे थे।
- स्कैम में हाई प्रोफाइल नेताओं से लेकर सरकारी अफसरों-बाबुओं के नाम शामिल थे।
- आरोपों के मुताबिक ओडिशा सरकार ने स्टेट के खनिज खदानों के मालिकों को खनिज अन्य स्टेट्स में अवैध ढंग से ट्रांसपोर्ट करने में मदद की थी।