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गंभीर आरोपों से घिरे अफसरों को भी इंटेग्रिटी, भूूमि घोटाला-यौन उत्पीड़न के आरोपी बनेंगे IAS

यूपीएससी ने पहली बार पांच अफसरों को आईएएस के लिए प्रोविजनल रूप से सलेक्ट किया है।

अमरेंद्र कुमार/विनय चतुर्वेदी | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:04 AM IST

  • गंभीर आरोपों से घिरे अफसरों को भी इंटेग्रिटी, भूूमि घोटाला-यौन उत्पीड़न के आरोपी बनेंगे IAS

    रांची.राज्य प्रशासनिक सेवा के 31 अफसरों को आईएएस में प्रोन्नति देने पर यूपीएससी, केंद्र और राज्य सरकार ने सहमति दे दी है। इनमें करीब एक दर्जन अधिकारी भूमि घोटाला और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों से घिरे हैं। एक माह पहले निंदन की सजा पा चुके अफसरों के नाम भी इस सूची में हैं। यही नहीं, यूपीएससी ने पहली बार पांच अफसरों को आईएएस के लिए प्रोविजनल रूप से सलेक्ट किया है। ऐसा उनके खिलाफ चल रहे मामलों के कारण हुआ है।


    यूपीएससी, केंद्र और राज्य सरकार की 27 मार्च को हुई बैठक में तय हुआ कि प्रोविजनल रूप से सेलेक्ट अफसरों के आरोप अगर 31 दिसंबर तक खत्म हो जाते हैं तो वे आईएएस बन जाएंगे। अन्यथा उनकी वैकेंसी अगले साल की रिक्ति में जोड़ दी जाएगी। ऐसे में अगर आईएएस में प्रोन्नति की सूची जारी भी हो जाती है तो पांच पद अभी भी खाली ही रहेंगे।

    यूपीएससी और केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ईमानदार और स्वच्छ छवि के अफसरों को ही आईएएस में प्रमोशन दिया जा सकता है। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट (सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र) देने का प्रावधान है। लेकिन, राज्य सरकार ने गंभीर आरोपों से घिरे सात से अधिक अधिकारियों को इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इसके विपरीत जिन अधिकारियों के लिए सत्यनिष्ठा का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया, उन्हें भी सूची में शामिल कर लिया।


    मुख्य सचिव बोले-सजा पा चुके लोग नहीं बन सकेंगे आईएएस :डीओपीटी जब इसे यूपीएससी को भेजेगी, उसके बाद सूची फाइनल होगी और अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि अधिसूचना जारी होने से पहले राज्य सरकार से पूछा जाता है कि किसी के खिलाफ कोई मामला तो नहीं है। निगरानी स्वच्छता की रिपोर्ट भी मांगी जाती है। इसलिए उस समय तक सलेक्ट लिस्ट में आए नाम रिकॉल करने का अवसर है। ऐसे मामले सामने आने पर सजा के प्रभाव की अवधि में प्रमोशन नहीं मिल सकेगा।

    अफसरों पर आरोप और उनकी सफाई

    धनबाद के तत्कालीन डीडीसी चंद्रकिशोर मंडल के खिलाफ वित्तीय अनियमितता के आरोपों में दोषी मानते हुए सरकार ने विभागीय कार्यवाही चलाई थी। 26 फरवरी को उन्हें निंदन की सजा मिली। इस सजा के बाद एक साल तक प्रोन्नति पर रोक है। लेकिन उन्हें चुन लिया गया।
    चंद्रकिशोर :यूपीएससी को मेरा नाम भेजा गया है। एक साजिश के तहत मुझे निंदन की सजा दी गई है।

    धनबाद के तत्कालीन अपर समाहर्ता विनय कुमार राय को भी भूमि अर्जन घोटाले में एसीबी ने अपने अंतरिम जांच रिपोर्ट में दोषी पाया है। तत्कालीन कार्मिक सचिव ने एफआईआर की अनुमति भी दे दी, लेकिन कुछ अधिकारियों ने इनके मामले को शीर्ष स्तर पर पेंडिंग रखा है।
    विनय :मैंने एसीबी को अपना पक्ष भेज दिया है। उसका क्या फलाफल निकला, मुझे नहीं मालूम। आपको बताना मैं जरूरी नहीं समझता।

    जमशेदपुर के तत्कालीन अपर समाहर्ता गणेश कुमार ने टाटा लीज की जमीन को रैयती जमीन बता कर उसका लगान निर्धारित कर दिया था। जांच में डीसी ने इन्हें दोषी बताते हुए विभागीय कार्यवाही चलाने के लिए प्रपत्र क भरकर सरकार को भेजा। विभागीय कार्यवाही चलाने के लिए आदेश देने का मामला शीर्ष स्तर पर लंबित है, फिर भी इंटेग्रिटी देकर उन्हें सूची में रखा गया है।
    गणेश : सरकार के निर्देश के बाद ही रसीद काटने का आदेश दिया था।


    खूंटी डीडीसी रहते हुए देवेन्द्र भूषण सिंह यौनाचार के एक मामले में निलंबित हुए थे। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है।
    देवेन्द्र : मेरे खिलाफ यह मामला है। यह मामला अभी चल रहा है, समाप्त नहीं हुआ है।

    सरायकेला के तत्कालीन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी भीष्म कुमार पर एक सीडीपीओ ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। सरायकेला खरसावां कोर्ट में मामला चल रहा है।
    भीष्म :वर्तमान में खूंटी के डीडीसी भीष्म कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया, पर फोन नहीं उठाया।

    गढ़वा के वर्तमान डीडीसी चंद्रमोहन प्रसाद कश्यप के खिलाफ रामगढ़ कोर्ट में पत्नी के साथ प्रताड़ना और भरण-पोषण के लिए मेंटेनेंस का केस चल रहा है।
    चंद्रमोहन :एक सप्ताह पहले पत्नी से समझौता हो गया है। जल्दी ही कोर्ट को इसकी जानकारी दे दी जाएगी।

    नामकुम सीओ रहे रामलखन गुप्ता पर सेना की जमीन का म्यूटेशन रैयतों को करने का आरोप है। एसीबी जांच में इन्हें प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया है। मुख्य सचिव के प्रस्ताव पर विधि विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलाने की अनुशंसा की है। इसके बाद भी राज्य सरकार ने इन्हें इंटेग्रिटी सर्टिफिकेट दे दिया है।

    आईएएस में प्रमोशन के लिए इन अफसरों का हुआ है सलेक्शन

    रणेंद्र कुमार, अनिल कु. सिंह, अनिल कु. राय, चितरंजन कुमार, चंद्र किशोर मंडल, कमल जॉन लकड़ा , इकबाल आलम अंसारी, राजेश कु. वर्मा, सुबोध किशोर सोरेन, उदय प्रताप, अशोक कु. सिंह, राजकुमार, रामलखन गुप्ता, शिशिर कु. सिंह, राजेश कु. पाठक, दिनेश प्रसाद, संजय कु. सिंह, रमाकांत सिंह, जगत नारायण प्रसाद, दिलीप टोप्पो, विनोद अनुग्रह मिंज, शशिधर मंडल, दानियल कंडूलना, कमलेश्वर प्रसाद सिंह, नेसार अहमद, दीपक कुमार शाही।
    इनका प्रोविजनल सलेक्शन :देवेंद्र भूषण सिंह, भीष्म कुमार, गणेश कुमार, बद्रीनाथ चौबे और विनय कु. राय।

    मुख्य सचिव बोले-सजा पा चुके लोग नहीं बन सकेंगे आईएएस

    मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा- दिल्ली में 27 मार्च को यूपीएससी के साथ हुई बैठक में 31 नामों पर सहमति बनी है। कुछ नाम प्राेविजनल लिस्ट में रखे गए हैं। वहां से इसकी प्रोसिडिंग आएगी। इस पर राज्य सरकार को अनुमोदन देना है। यदि किसी की सजा (निंदन) के प्रभाव की अवधि चल रही है, तो उन्हें अनफिट किया जाएगा। इसी तरह जिन्हें इंटेग्रिटी नहीं दी गई है, वे भी अनफिट होंगे। यूपीएससी से प्रोसिडिंग की दो कॉपी में आएगी। इस पर सरकार (सीएम) का अनुमोदन लेकर एक कॉपी डीओपीटी और एक कॉपी यूपीएससी को भेजी जाएगी। शेष पेज 10 पर

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