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देश में 12 ज्योतिर्लिंग, इसमें से देवघर को हटाने ऐसी रची गई पूरी साजिश

Bhaskar News | Last Modified - Feb 14, 2018, 10:13 AM IST

देवघर वैद्यनाथ से द्वादश ज्योतिर्लिंग की पदवी छीनने की साजिश पर भास्कर का सबसे बड़ा खुलासा।
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    श्लोक के मूल रूप में प्रज्वलिकानिधाने की जगह पारालिकाभिदाने लिख दिया। उज्जैन में लगे इस शिलापट्‌ट में पहला शब्द पूर्वोत्तर है। जबकि भौगोलिक रूप से परली पूर्वोत्तर में नहीं है। शिलापट्ट से बिहार चिताभूिम मिटाकर परली महाराष्ट्र लिखा गया है। शैव महोत्सव के आमंत्रण पत्र में भी देवघर ज्योतिर्लिंग का नाम नहीं था। इसके अलावा द्वादश ज्योतिर्लिंग कैलेंडर में भी परली नाम जोड़ दिया गया।

    रांची.देश में 12 ज्योतिर्लिंग हैं, लेकिन अब भगवान शिव की इस सूची से देवघर ज्योर्तिलिंग को हटाने की साजिश की गई है। इस पर नया विवाद छिड़ गया है। देवघर के ज्योतिर्लिंग की जगह महाराष्ट्र के बीड जिले के परली वैद्यनाथ मंदिर को शामिल किया गया है। मामले में सामने आया है कि पहले उज्जैन में लगे शिलापट्‌ट पर से देवघर के नाम मिटाए गए। उसके बाद द्वादश ज्योतिर्लिंग के कैलेंडर में देवघर की जगह परली को जोड़ा अौर फिर महाराष्ट्र ने दबाव डालकर परली में घोषित कराया ज्योतिर्लिंग।

    यह विवाद शुरू हुआ शैव महोत्सव से

    शैव महोत्सव 5 से 7 जनवरी को उज्जैन में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने संयुक्त रूप से कराया था। जिसमें देशभर के बारहों ज्योतिर्लिंग से पंडित आए थे। देवघर वैद्यनाथ मंदिर के प्रतिनिधि भी उज्जैन गए थे, लेकिन जो आमंत्रण पत्र छपा था, उसमें देवघर ज्योतिर्लिंग के बदले परली के वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को शामिल किया गया था। यह देखकर देवघर के पंडित बेहद आहत हुए। उन्होंने तत्काल आयोजन समिति के समक्ष विरोध किया। अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा देवघर के महामंत्री दुर्लभ मिश्र ने कहा कि यदि देवघर वैद्यनाथ मंदिर को ज्योतिर्लिंग मानते नहीं है तो उन्होंने हमें द्वादश ज्योतिर्लिंग समागम शैव महोत्सव में बुलाया ही क्यों?

    लेकिन शोभायात्रा में महाराष्ट्र और बिहार दोनों का जिक्र

    इसका मतलब यह है इन ज्योतिर्लिंगों में हुए बदलाव को लेकर उज्जैन में भी दो धड़े काम कर रहे हैं। महाराष्ट्र के लोगों ने दबाव डालकर परली का नाम ज्योतिर्लिंग की सूची में डलवाया है। वे सशंकित भी थे तभी देवघर व परली दोनों को न्यौता दिया। हमलोग वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग से संबंधित धार्मिक और ऐतिहासिक दस्तावेज मध्य प्रदेश शासन और श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति उज्जैन को भेजेंगे। उन्हें कहेंगे कि 12 ज्योतिर्लिंगों की सूची में देवघर ज्योतिर्लिंग को शामिल किया जाए। अगर ऐसा नहीं होगा तो हम सभी दस्तावेजों के साथ न्यायालय जाएंगे।

    उज्जैन शैव महोत्सव आयोजन समिति के उपाध्यक्ष विभाष उपाध्याय ने कहा कि महोत्सव के कार्ड पर हमने जरूर देवघर बाबा वैद्यनाथ का उल्लेख नहीं किया, किंतु शोभायात्रा में महाराष्ट्र और बिहार दोनों का जिक्र किया था। हमारे लिए दोनों ही मंदिर पूजनीय है।

    भास्कर टीम ने जुटाए सभी पक्षों के मत

    जब भास्कर ने उनके सामने देवघर के ज्योतिर्लिंग होने से संबंधित तथ्य रखे तो उन्होंने कहा कि इस मामले में जो शंकराचार्य कहेंगे, वह मान्य होगा। इसके बाद भास्कर टीम पुरी में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती और रायपुर में शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से मिली। दोनों ने ही स्पष्ट रूप से कहा कि देवघर स्थित श्रीवैद्यनाथ मंदिर ही ज्योतिर्लिंग है।

    ज्योतिर्लिंग पर शोध कर चुके और श्रीश्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग वांड्मय के लेखक मोहनानंद मिश्र का कहना है कि देवघर में स्थित वैद्यनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। शिवपुराण की कोटिरूद्र संहिता में ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है। इसमें वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को चिताभूमि में बताया गया है। इस ज्योतिर्लिंग का वर्णन अन्य पुराणों में भी है। लेकिन, परली के ज्योतिर्लिंग का उल्लेख किसी धर्मग्रंथ में नहीं है। सिर्फ बम्बई संस्करण के स्तोत्र संकलन और गीताप्रेस की स्तोत्र रत्नावली में परली है।

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    रिपोर्ट - पुरी से धर्मेंद्र झा/ रायपुर से देवेंद्र गोस्वामी/ देवघर से रजनीश कुमार/उज्जैन से ओम प्रकाश सोनोवणे/परली से प्रकाश चवन।

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    प्रमुख दस्तावेज जो देवघर को ज्योतिर्लिंग प्रमाणित करते हैं

    बटेश्वर अभिलेख- 9वीं सदी के बटेश्वर अभिलेख में भी वैद्यनाथ का वर्णन है। यह कहलगांव (भागलपुर) में है। इसका पुराना नाम शिलाहृद और पत्थरघट्टा भी है। 1186 ई. में बटेश्वर प्रसिद्ध तीर्थस्थल था। यहीं पर सियाना पत्थर अभिलेख में बटेश्वर, चम्पा, वैद्यनाथ, धर्मारण्य (गया), सोमतीर्थ (सोमनाथ) का वर्णन है।

    आदिगुरु शंकराचार्य

    वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की भौगोलिक स्थिति के संबंध में आदिगुरु शंकराचार्य ने भी इसे पूर्व-उत्तर की दिशा में अवस्थित माना है। इसमें स्पष्ट तौर पर चिताभूमि (प्रज्वलिकानिधाने) का वर्णन है। उन्होंने कहा है- पूर्वोत्तरे प्रज्वलिकानिधाने सदा वसन्तं गिरिजासमेतम्, सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।

    प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान की पांडुलिपि

    राजस्थान के उदयपुर में प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान में भी हस्तलिखित पांडुलिपि की प्रति सुरक्षित है। उस पांडुलिपि में वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में लिखा है। इसमें प्रज्वलिकानिधाने की जगह पुण्यगयानिधाने लिखा है। उसमें भी लिखा है - पूर्वोत्तरे पुण्यगयानिधाने, सदा वसन्तम् गिरिजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।

    इन दोनों श्लोकों में दिशा का जो उल्लेख है उनमें पूर्व और उत्तर की ओर स्थित जगह की ही बात की गई है। केवल प्रज्वलिकानिधाने की जगह पर पुण्यगयानिधाने लिखा गया है। इन श्लोकों से भी देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की प्रमाणिकता होती है।

    प्रमुख श्लोक जो देवघर को ज्योतिर्लिंग बताते हैं

    कोटिरुद्रसंहिता में वर्णन : शिव महापुराण में वर्णित द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र में चिताभूमि शब्द का प्रयोग है, न कि परल्याम् का। 18 महापुराणों में से एक शिव महापुराण भी है। शिव महापुरण के कोटिरुद्रसंहिता के अध्याय एक में पेज संख्या दो में श्लोक 19 से 23 तक द्वादश ज्योतिर्लिंग का वर्णन है।

    शिवमहापुराण का श्लोक : सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोंकारे परमेश्वरम्।। केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम्। वाराणस्यां च विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे। वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने। सेतुबंधे च रामेशं धुश्मेशं च शिवालये। द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत। सर्वपापैर्विनिर्मुक्त: सर्वसिद्धिफलं लभेत्।।

    गीता प्रेस-बम्बई संस्करण का श्लोक :सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम, उज्जयिन्यां महाकालमोंकार ममलेश्वरम्।। परल्यां वैद्यनाथ च डाकिन्यां भीमशंकरम्। सेतुबन्धेतु रामेशं नागेशं दारुका वने।। वाराणस्यांतु विश्वेशं त्र्यबकं गौमती तटे। हिमालयेतु केदारं धुश्मेशं च शिवालये।। एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रात: पठेन्नर:, सप्त जन्म कृतं पापं स्मरेणन विनश्यति।

    इन दोनों श्लोक में एक ही विषमता है कि वैद्यनाथं चिताभूमो के बजाय परल्यां वैद्यनाथ लिखा है। (श्रीश्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग वांड्गमय के लेखक मोहनानंद मिश्र के अनुसार)

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें, क्या कहना है दो शंकराचार्य का इस मामले में?...

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    क्या कहना है दो शंकराचार्य का इस मामले में?

    3 वैद्यनाथ, पर देवघर ज्योतिर्लिंग

    गोवर्धनमठ पुरी पीठ के शकंराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का कहना है "देवघर ज्योतिर्लिंग है, शैव महोत्सव के आयोजक और विद्वत परिषद से पूछना चाहिए कि उन्होंने इसे ज्योतिर्लिंग में क्यों शामिल नहीं किया। देश में तीन वैद्यनाथ हैं। देवघर, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में है। भक्त परंपरा के अनुसार इन्हें ज्योतिर्लिंग मानते हैं। लेकिन देवघर ज्योतिर्लिंग है। मैं स्वयं भी कई बार देवघर स्थित बाबा के दर्शन कर चुका हूं। उज्जैन के शैव महोत्सव में इन्हें ज्योतिर्लिंग में क्यों शामिल नहीं किया गया, यह वहां की विद्वत परिषद व आयोजकों से पूछना चाहिए।"

    देवघर दर्शन से ही परली दर्शन

    ज्योतिषपीठाधीश्वर एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया, "शिवमहापुराण के अनुसार देवघर ज्योतिर्लिंग है, इसके दर्शन से परली के भी दर्शन हो जाते हैं, कहीं किसी प्रकार का विवाद है ही नहीं। कहीं कोई विवाद नहीं है। शिवमहापुराण के अनुसार देवघर ज्योतिर्लिंग में शामिल है। देवघर में जो दर्शन करता है, उसे परली के भी दर्शन हो जाते हैं। दुनिया में एक ही नाम के कई शिवलिंग हैं। दोनों ही शिवलिंग ज्योतिर्लिंग हैं। शास्त्रों में दोनों का वर्णन है। 12 ज्योतिर्लिंग सिर्फ श्रद्धा के लिए हैं। शिवलिंग प्रकट होने की कथा केवल श्रद्धा बढ़ाने के लिए है। "

    महाराष्ट्र का पक्ष: परली में ही असली ज्योतिर्लिंग

    महाराष्ट्र के ‘परली वैजनाथ (वैद्यनाथ)’ ही असली ज्योतिर्लिंग हैं। इसकी पुष्टि शिवपुराण में मिलती है। करवीर पीठ के शंकराचार्य विद्यानृसिंह भारती ने भी इसी ‘पूर्वोत्तर’ स्थान बीड जिले के परली के अधिकृत होने की पुष्टि की है। इसी गांव के पंडित विजय पाठक ने इसकी पुष्टि करते हुए शिवपुराण मे दिया गया श्लोक सुनाया।

    पूर्वोत्तरे पारलिकाभिदाने सदा‌शिवंतं गिरीजासमेतं । सुरासुरादितपादपद्ममं श्रीवैद्यनाथं सततं नमामि ।।

    पूर्वोत्तर में परलीगांव में गिरीजा के साथ स्थित इस सदाशिव को मेरा सदा नमस्कार है। अक्षांश-रेखांश को देखें तो परली बीड जिले के पूर्वोत्तर में आता है।

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