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Bhaskar Analysis : तेजी से बढ़ते राज्याें में झारखंड 8वां, गरीबी में 30वां स्थान

राज्य और केंद्रीय मंत्रालयों की मानें तो राज्य के विकास का ग्राफ पहाड़ों जैसा, कहीं ऊंचा, कहीं नीचा।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 09:08 AM IST

रांची. झारखंड के विकास का ग्राफ पहाड़ों जैसा दिखता है। किसी मामले में ऊंचा तो कहीं घाटी में लुढ़कता हुआ। तेजी से बढ़ने वाले राज्यों में झारखंड देश में आठवें नंबर पर है। पहले पर गुजरात, दूसरा महाराष्ट्र, तीसरा मध्यप्रदेश और चौथा छत्तीसगढ़ है। विकास की गति नापे तो देश का औसत 6.9% है जबकि झारखंड का 7.2%। गुजरात का 10% है। लेकिन अब भी झारखंड को गरीब राज्य ही माना जाता है। गरीबी में राज्य का 30वां स्थान है। यहां हर दिन एक व्यक्ति औसतन 202 रु. कमाता है। जबकि देश में पहले स्थान पर मौजूद दिल्ली में एक आदमी प्रतिदिन 760 रु. कमाता है। कमाई का फायदा तब हो जब बचत सही हो। लेकिन महंगाई डायन कमाई खा रही है। खाद्य सामग्रियों की मंहगाई दर तेजी से गिरी है।

सामाजिक विकास सूचकांक में 48 अंक

- 2013 में झारखंड में मंहगाई करीब 11 अंक पर थी, जो अब घटकर 5.4 पर है। लेकिन यह अब भी यहां के लोगों के हिसाब से ज्यादा है।

- सामाजिक विकास सूचकांक में 48 अंकों के साथ झारखंड निम्न सूचकांक श्रेणी में नीचे से दूसरे स्थान पर है। इसके नीचे बिहार (45) है। उच्च सूचकांक श्रेणी में गुजरात (57) और छत्तीसगढ़ (57) हैं।

- मध्यम दर्जे के सूचकांक में मध्य प्रदेश (55) है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की पिछले साल की रिपोर्ट माने तो बेरोजगारी के मामले में झारखंड का देश में 8वां स्थान है। यहां प्रति हजार व्यक्तियों में 77 बेरोजगार हैं। सबसे कम कर्नाटक 9 और सबसे ज्यादा त्रिपुरा 197 है।

ओवरऑल क्राइम रेट के मामले में देश के 36 राज्यों में 30वां

- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड ओवरऑल क्राइम रेट के मामले में देश के 36 राज्यों में 30वें स्थान पर है। यानी आंकड़े थोड़ी बेहतर सुरक्षा तो दिखाते हैं।

- अपराध और नक्सलवाद के डर से इंडस्ट्रीज लगने में यहां दिक्कत होती है। इंडस्ट्रीज तभी लगेंगी जब ईज ऑफ डूईंग बिजनेस का माहौल हो। 2015 में राज्य की रैंकिंग तीसरी थी। 2016 में घटकर सातवीं हो गई। आशंका है कि यह दसवें तक पहुंच जाएगी।

अभी भी बिजली की पहुंच पर करना होगा काम
- राज्य में 2625.91 मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता है। झारखंड के 68 लाख घरों में से 38 लाख घरों में बिजली कनेक्शन है। यानी 56%, जबकि देश में यह आंकड़ा 72% का है। 28.2 लाख ग्रामीण और 1.8 लाख शहरी घरों में बिजली कनेक्शन नहीं है। रघुवर सरकार आने के बाद 2014 से अब तक 2250 किमी सड़कें भी राज्य में बनाई गई हैं।