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पहली बार जेएमएम विधायकों ने सदन में पहना काला नकाब, स्पीकर ने किया सस्पेंड

स्पीकर बोले- काला नकाब पहन विधायकों ने सदन की गरिमा गिराई।

Dainik Bhaskar

Jan 24, 2018, 08:16 AM IST
सत्र के दौरान चेहरे पर नकाब लग सत्र के दौरान चेहरे पर नकाब लग

रांची. झारखंड विधानसभा के इतिहास की पहली घटना रही जब झामुमो विधायकों ने सदन में काला नकाब पहन कर सरकार का विरोध किया। राज्य के आम बजट के दिन झामुमो विधायकों के इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए स्पीकर दिनेश उरांव ने काला नकाब पहनने वाले सभी झामुमो विधायकों को एक दिन के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया। स्पीकर ने कहा कि काला नकाब पहन कर विधायकों ने सदन की गरिमा गिराने का काम किया है। विरोध स्वरूप मासस के अरूप चटर्जी और निर्दलीय भानू प्रताप शाही छोड़ पूरा विपक्ष मुख्यमंत्री के बजट भाषण का वाक आउट कर गया। उसमें झामुमो के अलावा कांग्रेस, झाविमो व निर्दलीय ‌विधायक भी शामिल थे।


- मंगलवार को बजट सत्र के पांचवें दिन जैसे ही प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई, कुछ देर बाद झामुमो विधायक अमित कुमार महतो ने पहले काला नकाब पहन कर सरकार का विरोध करना शुरू किया।

- उसके कुछ देर बात झामुमो के ही रवींद्र महतो ने भी यही कृत्य दुहराया। फिर कुछ देर बाद जब मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश ही करने जा रहे थे कि प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन और साइमन मरांडी छोड़ झामुमो के सभी विधायकों ने एक-एक कर काला नकाब पहन कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
- हेमंत सोरेन ने कहा कि मुख्य सचिव राजबाला वर्मा, डीजीपी डीके पांडेय और एडीजी अनुराग गुप्ता को पद से नहीं हटा कर भ्रष्ट अधिकारियों को तरजीह दे रही है।

सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कड़ा प्रतिवाद किया

- हालांकि, झामुमो विधायकों द्वारा सदन में काला नकाब पहनने का सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी कड़ा प्रतिवाद किया। संसदीय कार्यमंत्री सरयू राय ने कहा कि इस घटना से सदन लज्जित है।

- यह सभी सीमाएं लांघ जाने वाली घटना है। इसे अगर नियंत्रित नहीं किया गया, तो आनेवाले दिन में विरोध का स्तर कहां जायेगा, इसकी कल्पना नहीं की जा सकेगी। इसलिए काला नकाब पहनने वाले विधायकों को एक दिन के लिए निलंबित किया जाना चाहिए।

- इसके अलावा ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा, कृषि मंत्री रणधीर सिंह, विरंची नारायण, रामकुमार पाहन, अनंत ओझा सहित कई अन्य विधायकों ने भी काला नकाब पहने जाने को सदन का अपमान बताया। कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक भी हुई। विपक्षी सदस्यों ने अधिकारियों को पद से हटाये जाने को लेकर नारेबाजी भी की।

बादल और अनंत के सवाल पर नोक-झोंक

- कांग्रेस विधायक बादल पत्रलेख के सवाल पर सदन में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान खूब नोक-झोंक हुई। दुमका में पिछले दिनों नौ परीक्षार्थियों की मौत का मामला उठाते हुए बादल ने कहा कि सरकार उनके परिजनों को 10-10 लाख रुपए की सहायता करे। उन्होंने यह भी कहा मंत्री के वहां हेलीकॉप्टर से जाने पर जो राशि खर्च हुई, उसे ही अगर सरकार सहायता के रूप में दे देती, तो ज्यादा अच्छा होता। इससे पहले मंत्री अमर बाउरी ने कह दिया कि आप घटना के बाद सबसे पहले वहां क्यों नहीं पहुंचे। इसी के बाद विवाद खड़ा हो गया। इस पर स्टीफन मरांडी ने बाउरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब आपको सही जानकारी नहीं है, तो फुरुक-फुरुक मत कीजिए। सबसे पहले पहुंचने वालों में बादल ही थे।

दुमका में छात्रों की मौत पर दें ज्यादा मुआवजा
- लुईस मरांडी भी बिफर उठीं और बोलीं कि घटना के बाद हर दल के नेता-कार्यकर्ताओं ने अपनी ओर से पूरा प्रयास किया। वह इसलिए समय पर नहीं पहुंच सकीं क्योंकि घटना के दिन उनकी तबीयत खराब थी। लुईस ने बताया कि उन्होंने एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की है। घायलों को भी 50-50 हजार दिए जाएंगे।
- इधर, अनंत ओझा के सवाल पर भी सदन में सत्ता पक्ष के ही विधायकों ने शिक्षा मंत्री को घेरने का प्रयास किया। अनंत ओझा ने दो सवाल किए थे। साहेबगंज में जैक का शाखा कार्यालय खोलने और दूसरा साहेबगंज में विश्वविद्यालय का गठन करने से संबंधित था।

- विभाग द्वारा विधानसभा को उपलब्ध कराये गए जवाब में कहा गया था कि माननीय सदस्य खुद जैक के सदस्य हैं, इसलिए उन्होंने यह मांग की है। इसके अलावा साहेबगंज में विश्वविद्यालय खोलने से संबंधित प्रश्न का उत्तर विभाग द्वारा अस्वीकारात्मक बता दिया गया। इस पर भी ओझा की नाराजगी थी।

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