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घोटालेबाजों की टीम के अगुवा थे लालू, चारा के किंगपिन राम और श्याम थे उनकी आंखों के तारे

चारा घोटाले के देवघर केस में लालू किस तरह दोषी, जानिए कोर्ट के फैसले से...

Bhaskar News | Last Modified - Jan 08, 2018, 07:38 AM IST

  • घोटालेबाजों की टीम के अगुवा थे लालू, चारा के किंगपिन राम और श्याम थे उनकी आंखों के तारे
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    मामले में कोर्ट के मुताबिक लालू मदद न करते तो लूट मुमकिन न थी। -फाइल

    रांची. चारा घोटाला के केस नंबर आरसी 64(A)96 में फैसला सुनाने वाले सीबीआई के स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने अपने फैसले में लिखा है कि घोटाले के किंगपिन रहे फॉर्मर डायरेक्टर अॉफ एनिमल हसबैंडरी डॉ. रामराज राम और फार्मर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. श्यामबिहारी सिन्हा बिहार के उस वक्त के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की आंखों के तारे थे। इसी कारण दोनों अफसरों को राजनीतिज्ञ और नौकरशाहों की छत्रछाया मिली। इनके गलत कारनामों का कोई विरोध नहीं कर पाते थे। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चारा घोटालेबाजों की एक टीम थी, जिसमें जगदीश शर्मा और आरके राणा षडयंत्रकारी की भूमिका निभा रहे थे। कोर्ट ने कहा है कि अगर मुख्यमंत्री लालू प्रसाद नौकरशाहों को मदद नहीं पहुंचाते तो इतनी बड़ी लूट मुमकिन नहीं थी।

    लालू के टैन्योर में ही अफसरों-अपराधियों ने की लूट
    - स्पेशल जज शिवपाल सिंह ने अपने फैसले में आगे लिखा है कि लालू प्रसाद की रामराज राम से साठगांठ इतनी ज्यादा थी कि वे जिस दिन रिटायर होने वाले थे, उसी दिन उन्हें एक साल का सर्विस एक्सटेंशन दे दिया। रामराज के सर्विस एक्सटेंशन की फाइल मुख्यमंत्री के पास 18 जनवरी 1994 को डायरी नंबर 322 द्वारा आ गई थी। लालू प्रसाद ने इसे एक साल तक अपने पास दबाए रखा। 31 दिसंबर 1994 को इस पर आदेश दिया।

    - इसके अलावा लालू ने कई रिटायर्ड एनिमल हसबैंडरी के पदाधिकारियों को बैक डेट से सर्विस एक्सटेंशन दिया। डॉ. श्याम बिहारी के मामले में तो फाइनेंस डिपार्टमेंट ने आपत्ति भी जताई थी, फिर भी दो साल का एक्सटेंशन दे दिया।
    - लालू प्रसाद उस वक्त मुख्यमंत्री ही नहीं, बिहार के फाइनेंस मिनिस्टर भी थे। इस नाते वही पब्लिक मनी के कस्टोडियन थे। उनके टैन्योर में ही अफसरों और अपराधियों द्वारा पब्लिक मनी लूटे गए। किसी ने भी इस लूट का विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई।

    जिस चिट्ठी को आधार बनाया, वही गुम

    - बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र को रिहा करने का औचित्य ठहराते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि डॉ. मिश्र ने ही बिहार विधानसभा के सेशन में 8 जुलाई 1993 को ट्रेजरी से 1200 करोड़ की अवैध निकासी का मामला उठाते हुए श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी। उस समय डॉ. मिश्र अपोजीशन के लीडर थे। इन पर आरोप था कि डॉ. रामराज की प्रोन्नति के लिए इन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखी थी।

    - डॉ. श्याम बिहारी सिन्हा की उन्होंने प्रशंसा भी की थी। जिसके आधार पर लालू प्रसाद ने रामराज को प्रोन्नति और श्यामबिहारी को सेवाविस्तार दिया।

    - यह भी आरोप था कि चिट्ठी लिखने के एवज में इन्होंने रिश्वत ली। सीबीआई कोर्ट के सामने ये चिट्ठी पेश नहीं कर सकी और कोई ठोस सबूत भी नहीं दिया।

    उस वक्त के डीसीने घोटाले की रिपोर्ट भेजी, लेकिन उस पर आगे कार्रवाई नहीं की

    - कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि देवघर ट्रेजरी से हुई अवैध निकासी के लिए जब तत्कालीन ट्रेजरी पदाधिकारी सुबीर कुमार भट्टाचार्य को अभियुक्त बनाया गया, तो तत्कालीन डीसी को क्यों नहीं। ट्रेजरी से ज्यादा निकासी के बारे में देवघर के तत्कालीन मजिस्ट्रेट एसएस तिवारी ने रिपोर्ट सौंपी थी।

    - उन्होंने लिखा था कि असलियत में आवंटन छह हजार है, लेकिन देवघर के डिस्ट्रिक्ट एनिमल हसबैंडरी पदाधिकारी ने 50 लाख की निकासी कर ली है। तत्कालीन डीसी सुखदेव सिंह ने फाइनेंस कमिश्नर को रिपोर्ट भेजी, लेकिन उस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं की।

    तत्कालीन फाइनेंस कमिश्नर ने अभियुक्तों को पैसे निकालने की खुली छूट दे दी थी

    - बिहार के उस वक्त के फाइनेंस कमिश्नर फूलचंद सिंह जनवरी 1992 से फरवरी 94 तक फाइनेंस कमिश्नर की पोस्ट पर रहे। इस दौरान उन्होंने अभियुक्तों को अपनी सुविधा के मुताबिक निकासी की छूट दे रखी थी। इसके कारण बजट से काफी ज्यादा पैसे की निकासी कर ली गई।

    - सीएजी ने 1988-89 से 1994-95 की रिपोर्ट में एनिमल हसबैंडरी डिपार्टमेंट के ग्रांट, खर्च और ज्यादा निकासी की रिपोर्ट दी। 1989 में ग्रांट 36.77 करोड़ था, जबकि निकासी 42.96 करोड़, यानी 17 फीसदी ज्यादा। 1994-95 में 229 फीसदी ज्यादा निकासी कर ली गई।

    कोर्ट की सिफारिश- लालू को ओपन जेल भेजें, पर नियम जो एक तिहाई सजा काट चुका हो, उसी को भेज सकते हैं ओपन जेल

    - कोर्ट ने अपने फैसले के अंतिम पैराग्राफ में सभी सजायाफ्ता कैदियों को हजारीबाग ओपन जेल भेजने की सिफारिश की है। कहा है कि सभी अभियुक्त जानवरों को चारा और दवा देने के एक्सपर्ट हैं। इसमें से कुछ जानवर के डॉक्टर भी हैं। ज्यादातर बूढ़े हो गए हैं। ओपन जेल का माहौल अच्छा है। इसलिए ये लोग उस जेल में रहकर सजा आराम से काट सकते हैं।

    - वहीं, नियम के मुताबिक, जो अभियुक्त कम-से-कम एक तिहाई सजा पूरी कर चुके हैं, उनके आवेदन पर ही विचार किया जाएगा। सजायाफ्ता कैदी को ओपन जेल भेजने की सिफारिश डीसी, एसएसपी वाली डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी करती है। इसके बाद जेल आईजी की अध्यक्षता वाली स्टीयरिंग कमेटी विचार करती है। फिर होम सेक्रेटरी राज्य के होम मिनिस्टर से सिफारिश करते हैं। आखिरी फैसला होम मिनिस्टर ही करते हैं।

    हजारीबाग आेपन जेल में अभी तक गायों को शिफ्टिंग नहीं हुई

    - 25 एकड़ में बने हजारीबाग आेपन जेल में वन बीएचके के 100 कॉटेज हैं। यहां गौशाला तो है, लेकिन अभी तक गायों को शिफ्ट नहीं किया गया है।
    - इसमें अभी 12 हार्डकोर कैदी रह रहे हैं। जिनमें 50 लाख का ईनामी बड़ा विकास और छोटा विकास भी शामिल हैं।

    क्या है देवघर ट्रेजरी केस?

    - बिहार सरकार ने 1991 से 1994 के बीच मवेशियों की दवा और चारा खरीदने के लिए सिर्फ 4 लाख 7 हजार रुपए ही पास किए थे। जबकि इस दौरान देवघर ट्रेजरी से 6 फर्जी अलॉटमेंट लेटर से 89 लाख 4 हजार 413 रुपए निकाले गए।

    इन्हें 3.5 साल जेल, 5 लाख जुर्माना
    1) लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व सीएम
    2) फूलचंद सिंह, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    3) महेश प्रसाद, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    4) बेक जूलियस, पूर्व आईएएस ऑफिसर
    5) सुनील कुमार सिन्हा,
    6) सुशील कुमार सिन्हा,
    7) राजा राम जोशी
    8) सुबीर भट्टाचार्य

    9) आरके राणा-पॉलिटिकल लीडर

    इन्हें 7 साल सजा, 10 लाख जुर्माना
    10) जगदीश शर्मा, पॉलिटिकल लीडर
    11) सुनील गांधी
    12) त्रिपुरारी मोहन प्रसाद
    13) गोपीनाथ दास

    ये हो चुके हैं बरी
    - जगन्नाथ मिश्रा, बिहार के पूर्व सीएम
    - ध्रुव भगत, पूर्व पीएसी चेयरमैन
    - एसी चौधरी, पूर्व आईआरएस ऑफिसर
    - सरस्वती चंद्रा, चारा सप्लायर
    - सदानंद सिंह, चारा सप्लायर
    - विद्या सागर निषाद, पूर्व मंत्री

    कुल कितने आरोपी थे ?
    - एक सीबीआई ऑफिशियल के मुताबिक, इस केस में 38 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें 11 लोगों की मौत हो चुकी है। 3 सरकारी गवाह बन गए थे। दो ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिन्हें 2006-07 में दोषी करार दिया गया था। बाकी बचे 22 आरोपियों पर केस चल रहा था।

    सजा के बाद लालू के पास क्या ऑप्शन?
    - रांची स्पेशल कोर्ट ने लालू समेत अन्य आरोपियों को 3.5 साल की सजा सुनाई है। 3 साल से ज्यादा सजा होने पर उन्हें बेल नहीं मिल सकती।
    - फैसले की कॉपी मिलते ही लालू की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है।

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    बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र। - फाइल
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    घोटाले के दौरान डीसी रहे सुखदेव सिंह पर कार्रवाई नहीं करने का था आरोप। - फाइल
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    बिहार के उस वक्त के फाइनेंस कमिश्नर फूलचंद सिंह पर था अपराधियों को पैसे निकालने की खुली छूट देने का आरोप। -फाइल
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    चारा घोटाले पर फैसला देने वाले सीबीआई के स्पेशल जज शिवपाल सिंह।
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    25 एकड़ में बने हजारीबाग आेपन जेल में अभी 12 हार्डकोर बंदी रह रहे हैं।
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