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केंद्र काे भेजा था भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक, राज्य को पुनर्विचार के लिए लौटाया

क्योेंकि, कृषि मंत्रालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिख कर कहा- वह नहीं है संशोधन के सपोर्ट मेें।

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 08:28 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रांची. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2013 में बने केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून में झारखंड विधानसभा द्वारा पारित संशोधन विधेयक को कृषि मंत्रालय की आपत्ति के साथ पुनर्विचार के लिए राजभवन को लौटा दिया है। गृह मंत्रालय ने कृषि मंत्रालय की टिप्पणी और संशोधन विधेयक के संबंधित पहलुओं पर राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है। राजभवन ने मुख्य सचिव को फाइल भेज दी है। कृषि मंत्रालय ने कहा है कि यह संशोधन नेशनल पॉलिसी फॉर फार्मर्स 2007 और नेशनल रिहैबिलिटेशन एंड रिसर्च एलिमेंट पॉलिसी 2007 के खिलाफ है।

- बता दें कि मानसून सत्र के अंतिम दिन 12 अगस्त को विपक्ष के भारी विरोध के बीच झारखंड विधान सभा से यह संशोधन विधेयक पारित हुआ था। 5 सितंबर को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने अपनी सहमति देते हुए विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजने का आदेश दिया था।

- राज्य सरकार ने मूल भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अध्याय- 3 के उपबंधों में संशोधन का प्रस्ताव विधान सभा से पास करा कर केंद्र को भेजा था। इसमें जमीन अधिग्रहण में सोशल इंपैक्ट स्टडी की बाध्यता समाप्त करने का प्रावधान शामिल किया गया था। पहले जमीन लेने के पूर्व सोशल इंपैक्ट स्टडी कराना अनिवार्य था। संशोधन में इसके अलावा अनुसूचित क्षेत्रों में भू-अर्जन पेसा कानून के तहत कराने की बात थी।

कृषि मंत्रालय ने इसलिए की आपत्ति

- संशोधन विधेयक का विरोध करते हुए कहा गया था कि राज्य की 80 फीसदी जनता कृषि पर निर्भर है।
- राज्य में किसानों के पास बहुफसलीय कृषि भूमि उसके पास उपलब्ध जमीन का 20 ही फीसदी है।
- ऐसे जमीन का अधिग्रहण हो जाने से भुखमरी और बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

राज्य सरकार ने अधिग्रहण में हो रही देरी को बनाया था स्टैंड
सरकार ने कहा था कि भू-अर्जन अधिनियम 2013 की जटिल प्रक्रियाओं को कम करने के लिए विधेयक लाया जा रहा है। तर्क यह कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण करने में दो वर्ष से अधिक का समय लग रहा है। सोशल इंपैक्ट असेसमेंट कराने में ही आठ से नौ महीने का समय लग जाता है। गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा में 2013 के अधिनियम में संशोधन किया गया है।

हेमंत बोले, सीएम रघुवर दास को बर्खास्त करें केंद्र सरकार
विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता एवं झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने गुरुवार को प्रेसवार्ता में सीएम रघुवर दास पर राज्य की जमीन की हेराफेरी करने का आरोप लगाया। कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह संशोधन आखिर वह किसके दबाव में लाने को उत्सुक थे। सोरेन ने केंद्र सरकार से रघुवर दास को तत्काल बर्खास्त करने की भी मांग की।

विधेयक अटकने से हम पर ये असर

- इस संशोधन अधिनियम के अस्तित्व में नहीं आने से कई सरकारी परियोजनाओं का समय पर पूरा होना मुश्किल होगा।
- सरकार सोशल इंपैक्ट असेस्मेंट की जटिल प्रक्रिया, भूमि अधिग्रहण में लगने वाले दो वर्ष से अधिक समय से बचने के लिए इसे ला रही थी।

- अभी अडानी पावर प्लांट के लिए एसआईए की प्रक्रिया से रैयतों के जमीन का अधिग्रहण हुआ है। हरमू रोड फ्लाई ओवर के लिए भी एसआईए की प्रक्रिया तहत ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई है।
- यदि प्रस्तावित संशोधन अधिनियम पर मंजूरी मिल गई होती तो अडानी पावर प्लांट के लिए शेष जरूरी जमीन और हरमू रोड फ्लाई ओवर के लिए सीधे जमीन का अधिग्रहण, रैयतों को तय मुआवजा देकर हो जाता।

राज्य सरकार ने कहा -आपत्ति तो 2015 में ही दूर कर चुके

झारखंड सरकार ने विधेयक पुनर्विचार के लिए वापस आने पर स्पष्ट किया कि जो आपत्ति कृषि मंत्रालय ने दर्ज कराई उसे 2015 में ही संशोधित किया जा चुका है। इस बारे में एक-दो दिन में ही केंद्र को राज्य सरकार का पक्ष भेज दिया जाएगा।

- वेस्टलैंड, अनुपयोगी और गैर उपजाऊ बंजर भूमि के अधिग्रहण के लिए झारखंड में पहले से ही कानून है।

- बहुफसलीय सिंचित क्षेत्र का 2% से अधिक जमीन अर्जित नहीं किया जाएगा।
- शुद्ध बोआई क्षेत्र का एक चौथाई से अधिक अधिग्रहण नहीं किया जाएगा।

- झारखंड भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुर्नव्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार नियमावली 2015 में ये बातें दर्ज हैं।

सरकार ने संशोधन को इसलिए जरूरी बताया
सामाजिक विकास, आर्थिक आधारभूत परियोजनाओं और जनहित का काम के लिए भूमि अधिग्रहण जरूरी है। सरकारी आधारभूत परियोजना के तहत विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, अस्पताल, पंचायत भवन , आंगनबाड़ी केंद्र, रेल, सड़क, जलमार्ग, विद्युतीकरण, सिंचाई, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए आवास, जलापूर्ति, पाइप लाइन, ट्रांसमिशन व अन्य सरकारी भवन के लिए जमीन अधिग्रहण संबंधी विधेयक लाया गया है।